देशभक्ति उम्र की मोहताज नहीं होती और इसका जीता-जागता सबूत पेश किया है पंजाब के 10 वर्षीय बेटे श्रवण सिंह ने। जिस उम्र में बच्चे खिलौनों से खेलते हैं, उस उम्र में श्रवण ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारतीय सेना के जवानों के लिए ‘लाइफलाइन’ बनने का काम किया। गोलियों की तड़तड़ाहट और जान के खतरे के बीच इस नन्हे बालक ने जो साहस दिखाया, उसने न केवल सेना के अधिकारियों का दिल जीत लिया, बल्कि देश तोड़ने की बात करने वाले अलगाववादियों और खालिस्तानियों को भी देशभक्ति का ककहरा सिखा दिया है।
जान की परवाह किए बिना बना ‘सप्लाई लाइन’ जानकारी के अनुसार, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ (सुरक्षा बलों द्वारा चलाया गया एक अभियान) के दौरान स्थिति तनावपूर्ण थी। सेना के जवान मोर्चे पर डटे थे। ऐसे कठिन समय में 10 साल का श्रवण सिंह अपनी जान की परवाह किए बिना जवानों की सेवा में जुट गया। वह अपने नन्हे हाथों में कभी पानी की बोतलें, कभी दूध, तो कभी चाय और मठ्ठा लेकर जवानों तक पहुंचता रहा।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, श्रवण के चेहरे पर डर का नामोनिशान नहीं था। उसके मन में सिर्फ एक ही धुन थी—अपने देश के रक्षकों की सेवा करना। उसकी इस निस्वार्थ सेवा ने मोर्चे पर तैनात थके हुए जवानों में नई ऊर्जा भर दी।
पीएम मोदी से बोला- ‘बड़ा होकर मैं भी अफसर बनूंगा’ श्रवण की इस वीरता की चर्चा जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंची, तो वे भी इस बच्चे के जज्बे के कायल हो गए। जब श्रवण से पूछा गया कि वह ऐसा क्यों कर रहा है और भविष्य में क्या करना चाहता है, तो उसने प्रधानमंत्री मोदी को बताया, “मैं भी बड़ा होकर भारतीय सेना में अफसर बनूंगा और देश की रक्षा करूंगा।” उसकी आंखों में देशप्रेम की चमक देखकर हर कोई नतमस्तक हो गया।
खालिस्तानियों के लिए कड़ा संदेश श्रवण सिंह की यह कहानी उन मुट्ठी भर लोगों के लिए एक करारा जवाब है जो पंजाब को भारत से अलग करने के सपने (खालिस्तान) देखते हैं। यह बच्चा ‘असली पंजाब’ का प्रतिनिधित्व करता है—वह पंजाब जो गुरुओं की धरती है और जिसने हमेशा भारत की रक्षा के लिए सबसे ज्यादा बलिदान दिए हैं।
विशेषज्ञों और सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि जो लोग विदेशों में बैठकर भारत विरोधी एजेंडा चलाते हैं, उन्हें 10 साल के श्रवण सिंह से देशभक्ति सीखनी चाहिए। श्रवण ने साबित कर दिया है कि पंजाब का बच्चा-बच्चा तिरंगे के लिए जीता है और तिरंगे के लिए ही मर मिटने को तैयार है।
