जयपुर, राजस्थान की उपमुख्यमंत्री एवं महिला एवं बाल विकास मंत्री दिया कुमारी ने गुरुवार को विधानसभा में प्रदेश के आंगनबाड़ी केंद्रों के सुदृढ़ीकरण और बच्चों के पोषण स्तर में सुधार के लिए महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आंगनबाड़ी केंद्रों पर स्थान और वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता के आधार पर ‘पोषण वाटिकाएँ’ (Nutri-Gardens) विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
कुपोषण के खिलाफ ‘पोषण वाटिका’ एक प्रभावी हथियार
प्रश्नकाल के दौरान विधायक संदीप शर्मा द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए दिया कुमारी ने बताया कि पोषण वाटिकाओं का मुख्य उद्देश्य स्थानीय समुदाय में ताजी और हरी सब्जियों के प्रति जागरूकता लाना और बच्चों के आहार में पोषक तत्वों की कमी को दूर करना है।
- वर्तमान स्थिति: प्रदेश में अब तक 107 सक्षम आंगनबाड़ी केंद्रों और 242 आदर्श आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषण वाटिकाएँ विकसित की जा चुकी हैं।
- विगत वर्षों का रिकॉर्ड: नवाचार के तहत वित्तीय वर्ष 2020-21 में 7,686 और 2021-22 में 6,465 केंद्रों पर ये वाटिकाएँ बनाई गई थीं।
- शैक्षणिक लाभ: इन वाटिकाओं के माध्यम से बच्चों को कृषि तकनीकों और संतुलित आहार के बारे में व्यावहारिक ज्ञान भी दिया जा रहा है।
मानदेय वृद्धि और सुविधाओं पर अपडेट
मंत्री ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के हितों पर चर्चा करते हुए बताया कि राज्य सरकार समय-समय पर मानदेय में वृद्धि करती रही है। साथ ही, केंद्र सरकार को भेजे जाने वाले एनुअल प्रोग्राम इम्प्लीमेंटेशन प्लान (APIP) में भी मानदेय और अन्य भत्तों में वृद्धि के प्रस्ताव निरंतर भेजे जा रहे हैं।
आंगनबाड़ी केंद्रों को मिलने वाली अन्य सुविधाएं:
- कार्यालय व्यय: ₹2,000 प्रति केंद्र प्रति वर्ष (दैनिक सामग्री के लिए)।
- विद्युत बिल: ₹500 प्रति केंद्र प्रति माह।
- मरम्मत कार्य: ₹3,000 प्रति केंद्र प्रति वर्ष।
- अन्य किट: प्री-स्कूल किट, मेडिसिन किट, मोबाइल फोन और यूनिफॉर्म के लिए भी बजट प्रावधान किए गए हैं।
कोटा जिले की रिपोर्ट और अन्य जानकारी
विधायक के मूल प्रश्न के जवाब में उन्होंने बताया कि कोटा जिले में कुल 1,312 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इनमें से 280 केंद्र विभाग के स्वयं के भवनों में, 502 किराये के भवनों में और 530 अन्य राजकीय व निजी भवनों में चल रहे हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान में आंगनबाड़ी केंद्रों पर खेल मैदान विकसित करने की कोई योजना विभाग के पास नहीं है।
सरकार का पूरा ध्यान फिलहाल केंद्रों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार लाने पर केंद्रित है।
