राजस्थान में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स का अजीब हाल: 11 साल में 4 शहर नहीं बने ‘स्मार्ट’, अब 12 नए शहरों को चमकाने की तैयारी

जयपुर | राजस्थान में केंद्र सरकार के ‘स्मार्ट सिटी’ प्रोजेक्ट की कछुआ चाल और राज्य सरकार की नई घोषणाओं ने विकास के मॉडल पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। एक ओर जहां पिछले 11 वर्षों में जयपुर, कोटा, उदयपुर और अजमेर जैसे प्रमुख शहर पूरी तरह ‘स्मार्ट’ नहीं बन पाए हैं, वहीं राज्य सरकार ने अब 12 नए छोटे शहरों को स्मार्ट बनाने का जिम्मा उन्हीं एजेंसियों को सौंप दिया है जो पुराने प्रोजेक्ट पूरे करने में विफल रही हैं।

₹3600 करोड़ खर्च, फिर भी काम अधूरा

रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 11 सालों में जयपुर, कोटा, उदयपुर और अजमेर पर करीब ₹3600 करोड़ खर्च किए जा चुके हैं। प्रत्येक शहर पर ₹800 से ₹980 करोड़ रुपये लगाए गए, लेकिन नतीजा सिफर रहा।

  • केंद्र ने रोका पैसा: मार्च 2025 की समयसीमा खत्म होने तक जयपुर, कोटा और अजमेर की 13 महत्वपूर्ण योजनाएं अधूरी रह गईं।
  • केंद्र सरकार ने इन प्रोजेक्ट्स के लिए आगे वित्तीय मदद देने से मना कर दिया है, जिसके कारण राज्य सरकार को अब अपने स्तर पर वित्तीय प्रबंधन करना पड़ रहा है।

इन 12 नए शहरों को ‘स्मार्ट’ बनाने का टास्क

पुराने काम पूरे न होने के बावजूद, राज्य सरकार ने अब दूसरे और तीसरे दर्जे के 12 शहरों को स्मार्ट बनाने की घोषणा की है। इसकी जिम्मेदारी जयपुर और उदयपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड को दी गई है:

  1. जयपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड (JSCL) के जिम्मे: मंडावा, खाटूश्यामजी, भिवाड़ी, अलवर, बीकानेर और भरतपुर। (बजट: ₹330 करोड़)
  2. उदयपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड के जिम्मे: नाथद्वारा, माउंट आबू, जैसलमेर, भीलवाड़ा और बालोतरा।
    • बजट आवंटन: नाथद्वारा और माउंट आबू के लिए ₹30-30 करोड़, जैसलमेर और भीलवाड़ा के लिए ₹60-60 करोड़ और बालोतरा के लिए ₹60 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

जोधपुर और पाली भी कतार में

खबर के अनुसार, ‘जोधपुर-पाली मारवाड़ इंडस्ट्रियल एरिया’ के तहत इन दोनों शहरों को भी स्मार्ट सिटी बनाने का दावा किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट का अनुमानित निवेश ₹1000 करोड़ से अधिक है। इसमें राजीव गांधी लिफ्ट कैनाल से पानी और बिजली आपूर्ति को सक्षम बनाने के लिए करोड़ों रुपये के प्रोजेक्ट्स प्रक्रियाधीन हैं।

अधूरे प्रोजेक्ट्स की लंबी फेहरिस्त

जो 13 प्रोजेक्ट्स जयपुर, कोटा और अजमेर में अधूरे रह गए हैं, उनमें शामिल हैं:

  • एकीकृत कमांड नियंत्रण केंद्र (ICCC)
  • सीसीटीवी निगरानी कैमरे
  • आपातकालीन कॉल बॉक्स और सार्वजनिक संबोधन प्रणाली
  • स्मार्ट सड़कें और साइकिल ट्रैक
  • डिजिटल लाइब्रेरी और ई-स्वास्थ्य केंद्र

निष्कर्ष: क्या यह केवल चुनावी घोषणा है?

विशेषज्ञों का कहना है कि जब राजधानी जयपुर और कोटा जैसे शहर 11 साल में स्मार्ट नहीं बन सके, तो मात्र एक साल में 12 नए शहरों को स्मार्ट बनाने का दावा कितना वास्तविक है, यह बड़ा सवाल है। केंद्र द्वारा फंड रोके जाने के बाद राज्य सरकार पर वित्तीय बोझ बढ़ना तय है।

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