जलदाय कर्मचारियों की हुंकार के आगे झुका प्रशासन: निजीकरण नहीं करने का मिला लिखित आश्वासन, नई भर्ती की भी जगी आस

जयपुर। राजस्थान के जलदाय विभाग (PHED) में निजीकरण की सुगबुगाहट के खिलाफ चल रहा आक्रोश शुक्रवार को एक बड़ी जीत में बदल गया। जयपुर स्थित जलभवन में ‘प्रान्तीय नल मजदूर यूनियन (इंटक)’ के बैनर तले प्रदेशभर से आए हजारों जलदाय कर्मचारियों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। कर्मचारियों की एकजुटता और बढ़ते दबाव के आगे आखिरकार विभाग को झुकना पड़ा और मुख्य अभियंता ने लिखित में आश्वासन दिया कि विभाग में किसी भी प्रकार का निजीकरण नहीं किया जाएगा।

जलभवन में गूंजी इंकलाब की आवाज

यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष संजय सिंह शेखावत के नेतृत्व में सुबह से ही कर्मचारियों का जलभवन परिसर में जुटना शुरू हो गया था। प्रदेश के कोने-कोने से आए हजारों कर्मचारियों ने विभाग और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कर्मचारी नेताओं ने स्पष्ट किया कि जलदाय विभाग आम जनता की जीवन रेखा है और इसके निजीकरण को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

सीएम आवास कूच की तैयारी और प्रशासन की दस्तक

प्रदर्शन के दौरान जब आक्रोशित कर्मचारी मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच करने के लिए तैयार हुए, तो विभागीय अधिकारियों में हड़कंप मच गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्य अभियंता (मुख्यालय) देवराज सोलंकी स्वयं धरना स्थल पर पहुँचे। उन्होंने कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और जलदाय मंत्री कन्हैयालाल चौधरी कर्मचारियों के हितों के प्रति पूरी तरह सकारात्मक हैं।

लिखित आश्वासन और नई भर्ती का वादा

मुख्य अभियंता सोलंकी ने इंटक पदाधिकारियों को लिखित में पत्र सौंपकर आश्वस्त किया कि विभाग में निजीकरण की कोई योजना नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने तकनीकी कर्मचारियों की रुकी हुई नई भर्ती प्रक्रिया को भी अतिशीघ्र शुरू करने का वादा किया। इस लिखित भरोसे के बाद कर्मचारियों ने अपना आंदोलन समाप्त किया।

एकजुटता की जीत

संजय सिंह शेखावत और अन्य पदाधिकारियों ने इसे कर्मचारियों के संघर्ष और एकता की जीत बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में दोबारा निजीकरण का प्रयास हुआ, तो इससे भी बड़ा आंदोलन किया जाएगा। इस मौके पर जगदीश राज श्रीमाली, बाबूलाल शर्मा, ताराचन्द सैनी और राजेन्द्र सिंह सोलंकी सहित कई प्रमुख कर्मचारी नेता मौजूद रहे।

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