राजस्थान ग्रामीण जल सुरक्षा: गहरे पानी में जाने और स्टंट करने पर पाबंदी, पंचायतों को रखने होंगे लाइफ जैकेट और बचाव किट

राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में तालाबों, पोखरों और जलाशयों में डूबने से होने वाली दर्दनाक घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। पंचायती राज विभाग के आयुक्त जोगाराम ने प्रदेश की सभी जिला परिषदों के सीईओ को एक विस्तृत गाइडलाइन जारी की है। इस नई नियमावली का मुख्य उद्देश्य मनोरंजन के नाम पर जोखिम उठाने वाले युवाओं और अनजाने में हादसों का शिकार होने वाले पशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

सेल्फी और शराब पर पूरी तरह प्रतिबंध

गाइडलाइन के अनुसार, अब ग्रामीण जलाशयों के पास सेल्फी लेना, गहरे पानी में बिना सुरक्षा के कूदना और वहां शराब पीना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। विभाग ने पाया है कि अक्सर युवा सोशल मीडिया और मनोरंजन के चक्कर में गहरे पानी में उतर जाते हैं, जो जानलेवा साबित होता है। अब स्थानीय स्तर पर ऐसी गतिविधियों पर सख्त निगरानी रखी जाएगी।

सुरक्षा के लिए उठाए जाएंगे ये 7 कड़े कदम:

  • चेतावनी बोर्ड और संकेतक: हर जलाशय के पास स्थानीय भाषा में ‘गहरा पानी’, ‘तैरना मना है’ और ‘फिसलन’ जैसे स्पष्ट चेतावनी बोर्ड लगाए जाएंगे। रात के समय दुर्घटनाओं को रोकने के लिए रिफ्लेक्टिव (चमकने वाले) साइनबोर्ड भी लगाए जाएंगे।
  • लोहे की जाली से बाड़बंदी: जो जलाशय अधिक गहरे और खतरनाक हैं, उनके चारों ओर लोहे की जाली या मजबूत बाड़ लगाई जाएगी ताकि कोई अनजाने में पानी में न गिरे।
  • सुरक्षित घाट का निर्माण: फिसलन वाली जगहों पर रेत डाली जाएगी। लोगों के पानी तक पहुंचने के लिए पक्की सीढ़ियां या सुरक्षित घाट बनाए जाएंगे।
  • पशुओं के लिए अलग व्यवस्था: अक्सर पशु पानी पीने के दौरान दलदल में फंस जाते हैं। इसके लिए अलग से सुरक्षित घाट बनाने और गहरे हिस्सों में ‘पार्शियल फेंसिंग’ करने के निर्देश दिए गए हैं।
  • बचाव किट की अनिवार्यता: हर बड़े जलाशय पर अब अनिवार्य रूप से रस्सी, लाइफ जैकेट, लंबे बांस और फर्स्ट एड किट (प्राथमिक चिकित्सा किट) उपलब्ध रखनी होगी।
  • निगरानी रजिस्टर: ग्राम पंचायतों को अब अपने क्षेत्र के जलाशयों की निगरानी के लिए एक अलग रजिस्टर मेंटेन करना होगा, जिसमें सुरक्षा मानकों की नियमित जांच दर्ज होगी।
  • स्वयंसेवकों की तैनाती: त्योहारों या भीड़भाड़ वाले समय में स्थानीय चौकीदार या स्वयंसेवकों को तैनात किया जाएगा ताकि किसी भी अप्रिय घटना को तुरंत रोका जा सके।

पंचायती राज विभाग ने स्पष्ट किया है कि इन नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ स्थानीय प्रशासन सख्त कार्रवाई कर सकता है। विभाग का लक्ष्य है कि मानसून और गर्मी के सीजन में जलस्रोतों पर होने वाली जनहानि को शून्य पर लाया जा सके।

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