जयपुर: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार राजस्थान की पहचान ‘खेजड़ी’ को बचाने के लिए एक नया ‘वृक्ष संरक्षण विधेयक’ (Tree Protection Bill) लाने की तैयारी में है। सोमवार को संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल के निवास पर इस संबंध में गठित उच्च स्तरीय समिति की पहली बैठक आयोजित की गई। इस कानून का मुख्य उद्देश्य पेड़ों की अवैध कटाई को रोकना और पर्यावरण संरक्षण को कानूनी रूप से मजबूत बनाना है।
बड़ा बदलाव: खेती ही नहीं, अब आबादी जमीन पर भी सुरक्षा
अभी तक राजस्थान में पेड़ों की कटाई पर लगाम लगाने वाले नियम केवल कृषि भूमि पर ही प्रभावी थे। लेकिन नया कानून इस दायरे को काफी बड़ा कर देगा।
वर्तमान व्यवस्था बनाम प्रस्तावित नया कानून (Table)
| विशेषता | वर्तमान नियम (काश्तकारी कानून) | प्रस्तावित नया कानून (वृक्ष संरक्षण विधेयक) |
| लागू क्षेत्र | केवल कृषि भूमि (Agricultural Land) | समस्त भूमियाँ (आबंटित, रूपांतरित, अधिग्रहित और आबादी) |
| दायरा | गैर-कृषि भूमि पर स्पष्ट कानून की कमी | गैर-कृषि उपयोग वाली सभी भूमियों पर लागू |
| अनुमति | केवल चुनिंदा मामलों में आवश्यक | प्राधिकृत अधिकारी से अनुमति लेना अनिवार्य |
| हटाने की सीमा | – | केवल न्यूनतम आवश्यक पेड़ ही हटाए जा सकेंगे |
| पेनल्टी | सीमित दंड का प्रावधान | कठोर दंड एवं पेनल्टी के प्रावधान |
समिति की बैठक के मुख्य बिंदु
बैठक में राजस्व एवं उपनिवेशन मंत्री हेमन्त मीणा और वन मंत्री संजय शर्मा सहित विधि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
- तुलनात्मक अध्ययन: कमेटी अन्य राज्यों में मौजूद वृक्ष संरक्षण कानूनों का अध्ययन कर रही है ताकि राजस्थान के लिए एक ‘बिना मुकदमे वाला’ लेकिन ‘मजबूत’ कानून बनाया जा सके।
- स्टेकहोल्डर्स की राय: ड्राफ्ट को अंतिम रूप देने से पहले पर्यावरण विशेषज्ञों, स्टेकहोल्डर्स और विधि विशेषज्ञों के सुझाव लिए जा रहे हैं।
- अगली बैठक: कमेटी की अगली महत्वपूर्ण बैठक 11 मार्च 2026 को आयोजित की जाएगी।
पर्यावरण प्रेमियों की जीत:
“खेजड़ी केवल एक पेड़ नहीं, राजस्थान की संस्कृति और भावनाओं का प्रतीक है। नया कानून यह सुनिश्चित करेगा कि विकास के नाम पर हरियाली का अनावश्यक विनाश न हो। अब गैर-कृषि भूमि (जैसे खाली प्लॉट या रूपांतरित जमीन) पर भी पेड़ काटने से पहले सरकार को जवाब देना होगा।” — संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल
