‘कह दो हम सुरक्षा नहीं दे सकते, बोर्ड लगा दो’: जर्जर स्कूलों पर राजस्थान हाईकोर्ट की सरकार को कड़ी फटकार

जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रदेश के जर्जर सरकारी स्कूलों की स्थिति में सुधार के लिए पर्याप्त बजट आवंटित न करने पर राज्य सरकार के प्रति भारी नाराजगी व्यक्त की है। न्यायाधीश महेंद्र कुमार गोयल और न्यायाधीश अशोक कुमार जैन की खंडपीठ ने सोमवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान मौखिक रूप से बेहद सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि सरकार सुरक्षा नहीं दे सकती, तो स्कूलों के बाहर बोर्ड लगा दे कि बच्चे अपनी रिस्क पर आ रहे हैं।

20 हजार करोड़ की जरूरत, मिला नाममात्र का बजट

कोर्ट में सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि शिक्षा विभाग ने स्कूलों की मरम्मत के लिए 20 हजार करोड़ रुपये की आवश्यकता बताई है। इसके विपरीत, सरकार की ओर से बताया गया कि केवल 550 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। इस पर कोर्ट ने तल्खी दिखाते हुए कहा:

  • “स्कूलों को दी गई राशि कुछ भी नहीं है, यह ऊंट के मुंह में जीरा है।”
  • “क्या अस्पताल जैसे कार्यों को छोड़कर अन्य सभी टेंडर रोक दें ताकि स्कूलों को ठीक किया जा सके?”
  • “सरकार की ओर से केवल कागज पेश हो रहे हैं, फाइलों के पन्ने 1540 तक पहुँच गए हैं लेकिन धरातल पर कुछ नहीं हो रहा।”

दानदाताओं के भरोसे पर सवाल: ‘सांवरिया सेठ को 600 करोड़, आपको कुछ नहीं’

हाईकोर्ट ने सरकार को सीएसआर (CSR) और भामाशाहों से सहयोग लेने की सलाह दी। कोर्ट ने उदाहरण देते हुए कहा कि सांवरिया सेठ मंदिर में हर साल 600 करोड़ रुपये का चढ़ावा आता है, लेकिन सरकार को दानदाताओं का सहयोग नहीं मिल रहा, इसका सीधा मतलब है कि लोगों को सरकार पर विश्वास नहीं है।

आधी जगहों पर महिला टॉयलेट तक नहीं

कोर्ट ने शिक्षण संस्थानों में बुनियादी सुविधाओं के अभाव पर भी चिंता जताई। खंडपीठ ने कहा कि आधे स्कूल-कॉलेजों में शिक्षिकाओं और बालिकाओं के लिए टॉयलेट तक नहीं हैं। कोर्ट ने निर्देश दिया कि सभी सरकारी और निजी संस्थानों का चार्टर्ड इंजीनियर से निरीक्षण करवाया जाए और इसकी शुरुआत जयपुर से की जाए।

5 मार्च तक का आखिरी मौका

कोर्ट ने इस मामले में सहयोग के लिए अधिवक्ता आलोक गर्ग और अधिवक्ता सुनील समदड़िया को न्यायमित्र (Amicus Curiae) नियुक्त किया है। मामले की अगली सुनवाई 5 मार्च को तय की गई है। कोर्ट ने चेतावनी दी कि यह सरकार के लिए आखिरी मौका है, इसके बाद कोई रियायत नहीं दी जाएगी।

Share This Article
Leave a Comment