वन मंत्री संजय शर्मा का निर्देश: टाइगर रिजर्व के ग्रामीणों को मिले संशोधित विस्थापन पैकेज का लाभ, सरिस्का के रास्ते भी होंगे सुगम

जयपुर, राजस्थान के वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संजय शर्मा ने सोमवार को जयपुर के अरण्य भवन में वन विभाग की एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक ली। बैठक में उन्होंने वन्यजीव संरक्षण, बजट घोषणाओं की पूर्ति और टाइगर रिजर्व क्षेत्रों में रह रहे ग्रामीणों के विस्थापन को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए।

संशोधित विस्थापन पैकेज का होगा व्यापक प्रचार

वन मंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि टाइगर रिजर्व क्षेत्रों में निवासरत ग्रामीणों के लिए राज्य सरकार द्वारा लागू किए गए संशोधित विस्थापन पैकेज का अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार किया जाए। उन्होंने कहा कि विस्थापन की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया जाए ताकि वन क्षेत्रों में बसे लोग स्वेच्छा से बाहर आकर सरकार द्वारा दिए जा रहे बेहतर आर्थिक लाभों का लाभ उठा सकें।

रणथंभौर की तर्ज पर संवरेगा सरिस्का

पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मंत्री ने घोषणा की कि सरिस्का टाइगर रिजर्व में भी रणथंभौर की तर्ज पर इंटरलॉकिंग टाइल्स लगाकर पर्यटकों के मार्ग को सुगम बनाया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने बजट घोषणाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने और विकास कार्यों के लिए लंबित वन विभाग की स्वीकृतियों को बिना देरी जारी करने के निर्देश दिए।

अवैध खनन और अतिक्रमण पर जीरो टॉलरेंस

श्री शर्मा ने विभाग को सख्त निर्देश दिए कि:

  • अवैध खनन और अतिक्रमण के प्रति संवेदनशील क्षेत्रों को चिन्हित कर एक ठोस कार्य योजना तैयार की जाए।
  • वृक्षारोपण कार्यक्रमों में स्थानीय प्रजातियों के पौधों को प्राथमिकता दी जाए और नवीन तकनीक का उपयोग कर उनकी जीवितता (Survival Rate) बढ़ाई जाए।

शहीद वनकर्मियों के आश्रितों को तत्काल अनुकंपा नियुक्ति

वन एवं वन्यजीवों की रक्षा करते हुए अपनी जान गंवाने वाले वनकर्मियों के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए मंत्री ने कहा कि ड्यूटी के दौरान आकस्मिक मृत्यु होने की स्थिति में उनके आश्रितों को अनुकंपात्मक नियुक्ति देने की प्रक्रिया में कोई देरी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को ऐसे मामलों में त्वरित कार्यवाही सुनिश्चित करने को कहा।

इनकी रही उपस्थिति

बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव (वन एवं पर्यावरण), प्रधान मुख्य वन संरक्षक (HoFF) सहित मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने व्यक्तिगत रूप से भाग लिया। वहीं, विभिन्न संभागों के मुख्य वन संरक्षक (CCF) वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से चर्चा में शामिल हुए।

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