जालोर/जयपुर | 24 फरवरी, 2026 राजस्थान में शिक्षा के नाम पर चल रहे फर्जीवाड़े की परतें लगातार खुल रही हैं। पीटीआई (PTI) भर्ती परीक्षा-2022 में फर्जी डिग्री को लेकर स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) की जांच में ओपीजेएस (OPJS) विश्वविद्यालय, चूरू की बड़ी हेराफेरी सामने आई है। वहीं, एक दशक पुराने जोधपुर नेशनल यूनिवर्सिटी के 25 हजार फर्जी डिग्रियों के मामले का रहस्य आज भी अनसुलझा है।
SOG की जांच: ‘जल गया रिकॉर्ड’ की झूठी कहानी का पर्दाफाश
पीटीआई भर्ती परीक्षा-2022 की जांच कर रही SOG ने जब ओपीजेएस यूनिवर्सिटी, चूरू से वर्ष 2018 और 2019 का बीपीएड (B.P.Ed) रिकॉर्ड मांगा, तो प्रबंधन ने कहानी रची कि रिकॉर्ड रूम में आग लगने से सभी दस्तावेज जल गए हैं।
- झूठ का खुलासा: SOG की जांच में सामने आया कि आग रिकॉर्ड रूम में नहीं, बल्कि 28 दिसंबर 2019 को यूनिवर्सिटी के मुख्य द्वार के पास बने बुक स्टोर में लगी थी, जो मुख्य बिल्डिंग से 50 मीटर दूर है।
- सत्यापन पर सवाल: SOG ने सवाल उठाया कि अगर रिकॉर्ड जल गया था, तो छात्रों के दस्तावेजों का सत्यापन यूनिवर्सिटी ने किस आधार पर किया? इसका प्रबंधन के पास कोई जवाब नहीं था।
- FIR दर्ज: एसओजी यूनिट राजगढ़ (चूरू) ने 20 फरवरी 2026 को ओपीजेएस यूनिवर्सिटी के प्रबंधन और 47 अभ्यर्थियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच रिपोर्ट मुख्यालय भेज दी है।
सीटें 500, लेकिन डिग्रियां बांटी 1359 को!
घोटाले की हद तब पार हो गई जब SOG ने आंकड़ों का मिलान किया:
- ओपीजेएस विवि को 2016 से बीपीएड के लिए हर साल 100-100 सीटों की मान्यता मिली थी।
- 25 सितंबर 2022 (परीक्षा तिथि) तक 5 सत्रों में अधिकतम 500 अभ्यर्थी ही बीपीएड कर सकते थे।
- लेकिन, पीटीआई भर्ती परीक्षा में इस यूनिवर्सिटी की डिग्री लगाकर 1,359 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था।
- कई अभ्यर्थियों ने आवेदन में किसी और विवि का जिक्र किया था, लेकिन सत्यापन के दौरान बैक डेट में बनी ओपीजेएस की डिग्री जमा करा दी।
जांच के दायरे में यूनिवर्सिटी प्रबंधन
SOG ने हरियाणा के जोगेंद्र दलाल, सरिता कड़वासरा, संगीता कड़वासरा, रमन नांदल और सुमित सहित 8 लोगों को जांच के दायरे में लिया है। जोगेंद्र दलाल फिलहाल जेल में है, जबकि रमन नांदल फरार है।
जोधपुर नेशनल यूनिवर्सिटी: 25 हजार फर्जी डिग्रियों का रहस्य बरकरार
एक दशक पहले 2015-16 में उजागर हुए जोधपुर नेशनल यूनिवर्सिटी के ‘डिग्री कांड’ में एसओजी की ताबड़तोड़ गिरफ्तारियों के बावजूद आज तक यह पता नहीं चल सका है कि करीब 25 हजार फर्जी डिग्रियां कहां गईं। ये डिग्रियां न तो वापस ली गईं और न ही नष्ट की गईं, जिससे इनके दुरुपयोग का खतरा आज भी मंडरा रहा है।
संस्कृत विवि में भी फर्जीवाड़ा: 282 अवैध डिग्रियों पर लगी मुहर
जगदगुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय में भी नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं। सत्र 2023-24 में संबंद्ध कॉलेजों ने 400 सीटों वाले कोर्स (PGDCA और PGDYT) में 682 छात्रों को बैठा दिया। यूनिवर्सिटी ने इन 282 अतिरिक्त छात्रों को गलत तरीके से डिग्रियां भी बांट दीं और दोषी कॉलेजों से सिर्फ जुर्माना वसूल कर मामले को रफा-दफा कर दिया।
