विधानसभा में गूंजा ‘फर्जी डिग्री’ का मुद्दा: 10 निजी विश्वविद्यालयों की हो रही जांच; सरकार को नहीं पता कितनों ने हथिया ली सरकारी नौकरी

जयपुर: राजस्थान में निजी विश्वविद्यालयों (Private Universities) द्वारा बड़े पैमाने पर बांटी जा रही फर्जी डिग्रियों का मामला विधानसभा में गूंजा है। इन डिग्रियों के आधार पर बड़ी संख्या में अयोग्य युवा सरकारी सेवा में आ चुके हैं, लेकिन राज्य सरकार के पास इसका कोई स्पष्ट आंकड़ा नहीं है कि फर्जी डिग्री लेकर कितने लोग सरकारी नौकरी में नियुक्त हो चुके हैं।

भाजपा विधायक प्रताप सिंह सिंघवी ने विधानसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए यह मुद्दा उठाया और सरकार से जवाब मांगा। इस पर उच्च शिक्षा विभाग ने विस्तृत जानकारी सदन पटल पर रखी।

प्रदेश के 53 में से 10 निजी विश्वविद्यालयों पर जांच की आंच

उच्च शिक्षा के संयुक्त सचिव डॉ. मुकेश कुमार शर्मा ने विधानसभा के प्रमुख सचिव को जानकारी दी है कि प्रदेश में कुल 53 निजी विश्वविद्यालय संचालित हैं। शिकायतें मिलने के बाद इनमें से 10 विश्वविद्यालयों के खिलाफ जांच की जा रही है।

इन विश्वविद्यालयों के खिलाफ चल रही है जांच:

  1. ओपीजेएस विवि, चूरू (OPJS University, Churu)
  2. सिंघानिया विवि, झुंझुनूं (Singhania University, Jhunjhunu)
  3. सनराइज विवि, अलवर (Sunrise University, Alwar)
  4. श्रीधर विवि, झुंझुनूं (Shridhar University, Jhunjhunu)
  5. मेवाड़ विवि, चित्तौड़गढ़ (Mewar University, Chittorgarh)
  6. माधव विवि, सिरोही (Madhav University, Sirohi)
  7. रैफल्स विवि, अलवर (Raffles University, Alwar)
  8. निर्वाण विवि, जयपुर (Nirwan University, Jaipur)
  9. यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, जयपुर (University of Technology, Jaipur)
  10. जगदीश झबरमल टिबड़ेवाला विवि, झुंझुनूं (JJT University, Jhunjhunu)

संचालक, डीन और दलालों सहित कई जा चुके हैं जेल

उच्च शिक्षा विभाग ने बताया कि इस फर्जीवाड़े में कई बड़ी गिरफ्तारियां हो चुकी हैं:

  • ओपीजेएस विवि (चूरू) मामला: संचालक जोगेंद्र सिंह, पूर्व रजिस्ट्रार सरिता कड़वासरा, पूर्व रजिस्ट्रार जितेंद्र यादव, संगीता कड़वासरा, सुमित और दलाल सुभाषचंद्र, प्रदीप शर्मा, परमजीत सिंह, गंगासिंह, अवनीश कंसल, अजय भारद्वाज, बाबूलाल पटेल तथा रवि त्यागी को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है।
  • मेवाड़ विवि (गंगरार, चित्तौड़गढ़) मामला: तत्कालीन डीन (फार्मेसी) किशोर चंदुल, कार्यालय सहायक राजेश सिंह और उप परीक्षा नियंत्रक सुशील शर्मा को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है।

योग्य अभ्यर्थियों का हक मार रहे अयोग्य

विधायक प्रताप सिंह सिंघवी ने अपने प्रस्ताव में कहा कि इस आपराधिक कृत्य में विश्वविद्यालयों के परीक्षा नियंत्रक, कार्मिक और शिक्षकों की संलिप्तता के आरोप हैं। फर्जी डिग्रियों के भ्रष्टाचार के कारण बड़ी संख्या में अयोग्य अभ्यर्थियों ने सरकारी नौकरियां प्राप्त कर ली हैं, जिससे मेहनत करने वाले योग्य अभ्यर्थियों का चयन प्रभावित हुआ है।

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