जयपुर। राजस्थान में खेलों की नर्सरी तैयार करने वाले और देश को ओलंपिक-एशियाड के मेडल दिलाने वाले प्रशिक्षकों (Coaches) के साथ सरकारी सिस्टम भद्दा मजाक कर रहा है। मुख्यमंत्री द्वारा बजट 2025-26 में की गई एक ऐतिहासिक घोषणा, जिसमें पहली बार द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेताओं को अर्जुन अवार्डी खिलाड़ियों के समान भूमि देने का वादा किया गया था, अब सरकारी दफ्तरों की फाइलों में दफन होकर रह गई है। Expose Now के आज के खुलासे में हम बात कर रहे हैं प्रदेश के उन ‘द्रोणाचार्यों’ की, जिन्हें सम्मान के नाम पर सिर्फ आश्वासन मिला है और वे आज भी एक भू-खंड के लिए सिस्टम के आगे मजबूर हैं।

सरकारी सिस्टम की सुस्ती का कच्चा चिट्ठा
सरकार की मंशा भले ही साफ हो, लेकिन अफसरशाही ने इसे पलीता लगा दिया है। तारीख-दर-तारीख कैसे खेल गुरुओं को घुमाया जा रहा है, इसका पूरा ब्यौरा चौंकाने वाला है:
- तारीख दर तारीख, बस इंतज़ार: बजट 2025-26 की घोषणा के बाद 27 मार्च 2025 को इसकी अधिसूचना (Notification) जारी हो गई थी। कायदे से अब तक कोचों को जमीन मिल जानी चाहिए थी, लेकिन 11 महीने बीत जाने के बाद भी एक भी कोच को जमीन का कब्जा नहीं मिला है।
- फाइलों का फुटबॉल: खेल विभाग ने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए 08 अगस्त 2025 को प्रस्ताव तैयार कर नगरीय विकास विभाग (UDH) को भेज दिया था। लेकिन सवाल यह है कि अगस्त से लेकर अब तक UDH विभाग इन फाइलों पर कुंडली मारकर क्यों बैठा है? खेल विभाग से गेंद UDH के पाले में तो गई, लेकिन वहां जाकर अटक गई।
सिस्टम से हताशा: 8 में से केवल 6 आवेदन
सिस्टम की पेचीदगियों और लेटलतीफी का आलम यह है कि प्रदेश के 8 द्रोणाचार्य विजेताओं में से केवल 6 ने ही हिम्मत जुटाकर आवेदन किया है। बाकी 2 गुरुओं ने शायद सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने की जहमत से डरकर आवेदन ही नहीं किया। यह स्थिति सवाल खड़ा करती है कि जब खिलाड़ियों (अर्जुन अवार्डियों) को जमीन देने की प्रक्रिया तेज हो सकती है, तो उन गुरुओं के साथ सौतेला व्यवहार क्यों? जिन्होंने देश का मान बढ़ाया, उन्हें एक प्लॉट के लिए विभाग-दर-विभाग अर्जी क्यों लगानी पड़ रही है?
Expose Now का सवाल: क्या यह घोषणा सिर्फ बजट की हेडलाइन बनने के लिए थी?
ग्राउंड रिपोर्ट: इंतज़ार की इंतहा और आक्रोश
सूत्रों की मानें तो आवेदन करने वाले 6 कोच अभी भी विभागों के चक्कर काट रहे हैं। कभी ‘सर्वे’ के नाम पर तो कभी ‘लोकेशन’ के नाम पर फाइल को अटकाया जा रहा है। खेल जगत में इस लेटलतीफी को लेकर भारी आक्रोश है। घोषणा हुए करीब एक साल होने को आया, अधिसूचना भी निकल गई, लेकिन ज़मीन कहाँ है? सरकार के पास देने के लिए सिर्फ आश्वासन है, अलॉटमेंट लेटर नहीं। अगर जल्द ही इन 6 प्रस्तावों पर अंतिम निर्णय नहीं लिया गया, तो यह खेल जगत के सबसे बड़े सम्मान का अपमान होगा।
