करौली। प्रदेश में आगामी भीषण गर्मी की आहट के साथ ही मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने आमजन को राहत देने के लिए संवेदनशीलता दिखाते हुए बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार, प्रदेशभर में निर्बाध पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए जलदाय विभाग के सभी फील्ड अधिकारियों और कर्मचारियों के अवकाश तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए गए हैं।
सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश के हर हिस्से में, चाहे वह शहरी हो या सुदूर ग्रामीण क्षेत्र, आमजन को शुद्ध और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराया जा सके।
बजट और वित्तीय स्वीकृतियां: आंकड़ों की जुबानी
पेयजल संकट से निपटने और सुचारू व्यवस्था के लिए राज्य सरकार ने खजाना खोल दिया है:
- कुल स्वीकृत राशि: 41 जिलों के शहरी क्षेत्रों के लिए 55.88 करोड़ रुपये और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 154.83 करोड़ रुपये की स्वीकृति जारी।
- जल परिवहन (टैंकर): 1 अप्रैल से 31 जुलाई 2026 तक के लिए शहरी क्षेत्रों हेतु 23 करोड़ और ग्रामीण क्षेत्रों हेतु 82.37 करोड़ रुपये आवंटित।
- कलेक्टरों को पावर: प्रत्येक जिले में आकस्मिक पेयजल कार्यों के लिए जिला कलेक्टरों की अनुशंसा पर 1-1 करोड़ रुपये खर्च करने की विशेष अनुमति।
- JJM प्रोजेक्ट्स: जल जीवन मिशन के तहत पूर्ण हो चुकी योजनाओं के रखरखाव के लिए हर जिले को 25-25 लाख रुपये अलग से दिए गए हैं।
धरातल पर निगरानी: श्रमिक और वाहनों की तैनाती
पेयजल आपूर्ति की रियल-टाइम मॉनिटरिंग और मरम्मत कार्यों के लिए सरकार ने अतिरिक्त संसाधनों को मंजूरी दी है:
- मार्च 2026: 500 श्रमिक और 100 किराये के वाहन।
- अप्रैल 2026: 2000 श्रमिक और 400 किराये के वाहन।
- मई से जुलाई 2026: 2500 श्रमिक और 450 किराये के वाहन प्रतिमाह तैनात रहेंगे।
कंट्रोल रूम से होगी सीधी निगरानी
जनता की पेयजल संबंधी शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए राज्य और जिला स्तर पर 24×7 नियंत्रण कक्ष (Control Rooms) स्थापित किए गए हैं। अवकाश पर रोक के साथ ही यह भी निर्देश दिए गए हैं कि केवल अपरिहार्य परिस्थितियों में ही उच्च अधिकारी की विशेष अनुशंसा पर छुट्टी मिल सकेगी, ताकि फील्ड में अधिकारियों की मौजूदगी सुनिश्चित रहे।
