राजाखेड़ा: 29 जनवरी को नसबंदी, 28 फरवरी को 3 माह की गर्भवती; राष्ट्रीय कार्यक्रम में जानलेवा लापरवाही का आरोप, एसडीएम ने दिए जांच के आदेश

By Admin

राजाखेड़ा। स्वास्थ्य विभाग द्वारा की जा रही लापरवाहियां गाहे-बगाहे सुर्खियां बनतीं। परिवार कल्याण जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों में जानलेवा लापरवाही का एक नया प्रकरण राजाखेड़ा में सामने आया। यहां नसबंदी के एक माह बाद ही पीड़िता 3 माह की गर्भवती बताई गई। नसबंदी के 20 दिन बाद गर्भवती होने पर उसका गर्भपात भी किया गया। पीड़िता परिजनों के साथ सोमवार को उपखंडाधिकारी (एसडीएम) सुशीला मीणा से मिली। सारा घटनाक्रम बताकर लिखित आवेदन देकर कानूनी कार्यवाही की मांग। एकबारगी मीणा भी प्रकरण सुनकर आश्चर्यचकित। तुरंत पीड़िता को लेकर शहीद राघवेंद्र सिंह उप जिला चिकित्सालय पहुंचीं और चिकित्सकों की क्लास लगाकर पूर्ण जांच के निर्देश।

शहीद राघवेंद्र सिंह उप जिला चिकित्सालय

गंभीर मामला: पहले गर्भपात, फिर 3 माह का गर्भ

पीड़िता निशा पत्नी भीकाराम (उम्र 30, जाति राठोर, निवासी वार्ड नं. 7 मुन्ना कॉलोनी राजाखेड़ा) ने चिकित्सकों के समक्ष एसडीएम को बताया कि गत 29 जनवरी 2026 को नसबंदी ऑपरेशन कराया। उस समय चिकित्सकों द्वारा जांच में पेट के अंदर कोई बच्चा नहीं होने की पुष्टि। ऑपरेशन के कुछ दिनों बाद प्रेग्नेंसी जांच किट से चेक करने पर प्रेग्नेंट होने का खुलासा। घबराई पीड़िता ने पूरे घटनाक्रम की सूचना चिकित्सक को दी। 18 फरवरी 2026 को चिकित्सकों ने जांच कर गर्भपात किया। कुछ दिन बाद पुनः परेशानी होने पर 28 फरवरी 2026 को अल्ट्रासाउंड। इसमें वह 3 माह की गर्भवती बताई गई। चिकित्सकों की इस गंभीर लापरवाही से परिवार घबराया। चिकित्सकों ने प्राइवेट दिखाने या धौलपुर जाने का जवाब दिया, जबकि गर्भपात यहीं किया गया।

प्रकरण में गंभीर लापरवाही का अंदेशा

नसबंदी ऑपरेशन प्रायः स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के प्रेरित करने पर महिलाएं करवातीं। जिम्मेवारी होती कि जिन महिलाओं का ऑपरेशन करवाना, उनकी कुछ दिन पहले से नियमित जांच आरंभ कर दें। जिससे वे गर्भवती न हो जाएं। ऑपरेशन से पूर्व चिकित्सालय में भी गर्भ की जांच अनिवार्य। सुनिश्चित किया जाता कि महिला गर्भवती न हो, उसके बाद ही ऑपरेशन। ऐसे में दोनों स्तरों पर गंभीर लापरवाही, जिससे महिला की जान पर बन आई।

एक माह में दो बार कैसे गर्भधारण?

प्रकरण में सबसे बड़ी बात— 29 जनवरी को ऑपरेशन के दिन महिला गर्भवती नहीं। लेकिन 18 फरवरी को गर्भवती पाए जाने पर गर्भपात। 10 दिन बाद पुनः अल्ट्रासाउंड करवाने पर 3 माह की गर्भवती। ऐसे में यह कैसे संभव, यह एक बड़ा सवाल। मामले में लोग जिले से बाहर के मेडिकल बोर्ड से निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे।

इनका कहना: “पीड़ित परिवार और महिला मेरे पास आए। मैं स्वयं उनके साथ चिकित्सालय गई और प्राथमिक जांच की। मामला गंभीर, इसकी गहन जांच करवाई जाएगी।” — सुशीला मीणा, उपखंडाधिकारी, राजाखेड़ा

(नोट: प्रकरण में डॉ. नरेंद्र मुद्गल, पीएमओ राजाखेड़ा सहित संबंधित चिकित्सा स्टाफ से भी जवाब-तलब की संभावना।)

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