नई दिल्ली: देशभक्ति और साहस की कोई उम्र नहीं होती। यह साबित करने वाले पंजाब के नन्हे वीर बालक श्रवण सिंह की कहानी ने पूरे देश का दिल जीत लिया है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान अपनी जान की परवाह किए बिना भारतीय सेना के जवानों की निःस्वार्थ सेवा करने वाले इस बालक को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने व्यक्तिगत रूप से शाबाशी दी है।
एक भावुक और प्रेरणादायक मुलाकात में, प्रधानमंत्री मोदी ने नन्हे श्रवण सिंह को अपने पास बिठाया और बड़े धैर्य व आत्मीयता के साथ उनके अनुभव सुने।
पीएम ने धैर्यपूर्वक सुनी वीरता की कहानी प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा साझा की गई जानकारी और तस्वीरों में पीएम मोदी इस बहादुर बच्चे की बातें बहुत ध्यान से सुनते नजर आ रहे हैं। श्रवण ने प्रधानमंत्री को अपनी तोतली लेकिन आत्मविश्वास से भरी जुबान में बताया कि कैसे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान, जब हर तरफ खतरा था, तब वह कैसे जवानों तक पानी, दूध और चाय पहुंचाता था।
पीएम मोदी ने इस बालक के अदम्य साहस को “छोटी उम्र, बड़ा हौसला” का जीता-जागता उदाहरण बताया। उन्होंने श्रवण की पीठ थपथपाकर उसका उत्साहवर्धन किया और कहा कि उसकी यह निस्वार्थ सेवा हर भारतीय के लिए प्रेरणा है।
क्या था श्रवण का कारनामा? गौरतलब है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान जब सुरक्षा बल मोर्चे पर डटे थे, तब लगभग 10 वर्षीय श्रवण सिंह ने अद्भुत साहस दिखाया था। गोलियों और खतरे के बीच, यह बच्चा जवानों के लिए ‘सप्लाई लाइन’ बन गया था। वह जरूरी रसद लेकर जवानों तक पहुंचता रहा, जिससे उनका मनोबल बढ़ा।
भविष्य का फौजी इस मुलाकात के दौरान श्रवण ने एक बार फिर अपनी देशभक्ति का परिचय देते हुए प्रधानमंत्री के सामने अपनी इच्छा दोहराई कि वह बड़ा होकर भारतीय सेना में अफसर बनना चाहता है और देश की रक्षा करना चाहता है। एक बच्चे में देशप्रेम का ऐसा ज्वार देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति भावुक हो उठा।
यह मुलाकात न केवल श्रवण के लिए जीवन भर की यादगार बन गई, बल्कि यह देश के उन तमाम युवाओं के लिए भी एक संदेश है कि राष्ट्र सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं है।
