करौली। राजस्थान के मुखिया भजनलाल शर्मा पीड़ित परिवादियों की समस्या समाधान के लिए भले ही कितने गंभीर हों, और चाहे करौली जिला 181 (राजस्थान जनसंपर्क शिकायत समाधान) टोल-फ्री नंबर पर राज्य में दूसरे नंबर पर हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। अधिकारियों के भ्रष्टाचार, चालाकियों और असंतोषपूर्ण जवाबों ने सिस्टम की पोल खोल दी है। परिवादियों को राहत देने के नाम पर सिर्फ झूठी सूचनाओं का आदान-प्रदान जारी है।
भजनलाल सरकार भले ही ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति और भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के बड़े-बड़े दावे करती हो, लेकिन ये वादे सिर्फ विज्ञापनों, जनसभाओं, प्रेसवार्ता और सोशल मीडिया तक सिमटे नजर आते हैं। जब मुख्यमंत्री ने 181 पोर्टल पर अपनी निगरानी बढ़ाई, तो ‘EXPOSE NOW’ टीम ने हकीकत से रूबरू होने के लिए कुछ शिकायतें दर्ज कराईं, जिसके बाद गोलमाल और भ्रष्टाचार की जो परतें सामने आईं, वे हैरान करने वाली हैं।
सर्विस बुक्स का खेल और ब्लैकमेलिंग का नेक्सस
EXPOSE NOW टीम ने 181 पर शिकायत दर्ज कराई कि करौली में सैकड़ों चिकित्सकों की ‘सर्विस बुक्स’ नियमों को ताक पर रखकर CMHO दफ्तर में क्यों रखी हुई हैं? 181 हेल्पलाइन की मॉनिटरिंग से जुड़े उच्चाधिकारियों के दबाव में सीएमएचओ साहब ने तय समय में जवाब तो दे दिया, लेकिन वह जवाब भ्रष्टाचार की परतों में लिपटा साल 2009 के एक सर्कुलर का रटा-रटाया बहाना था।

हैरानी की बात यह है कि बीते वर्ष नवंबर महीने में भी चिकित्सकों के एक संगठन ने मुख्यमंत्री, मंत्री, जिला कलेक्टर और चिकित्सा विभाग के अधिकारियों को शिकायती पत्र सौंपकर बताया था कि करौली में कार्यवाहक सीएमएचओ डॉ. जयंतीलाल मीना की खुलेआम दादागिरी चल रही है। कई बार पत्र लिखने के बाद भी वे सर्विस बुकों को संबंधित आहरण वितरण अधिकारियों (DDO) को नहीं लौटा रहे हैं।

इसका कारण सिर्फ एक है: चिकित्सकों को ब्लैकमेल कर, डरा-धमकाकर उनसे चौथवसूली करना। यह मामला कई सालों से चल रहा है और इसका मास्टरमाइंड एक महिला चिकित्सक से रिश्वत और मानसिक प्रताड़ना का आरोपी बाबू इमरान खान है, जो अधिकारियों की शह पर यह सब कर रहा है।
सीएमएचओ का कबूलनामा और फिर पलटी
जब मीडिया और उच्चाधिकारियों ने सीधा जवाब मांगा, तो सीएमएचओ का वही ‘सर्कुलर 2009’ का राग था। लेकिन चिकित्सा विभाग के उच्चाधिकारियों के मुताबिक वह सर्कुलर सिर्फ अस्थायी (Temporary) था, जिसके बाद ‘राजस्थान सर्विस अधिनियम रूल्स’ लागू हो गया, जिसके तहत सर्विस बुकें आहरण वितरण अधिकारी के पास होनी चाहिए।
जब सवाल उठा कि क्या करौली कोई ‘स्पेशल जिला’ है? अन्य जिलों में तो सर्विस बुकें DDO के पास हैं! तब खुद सीएमएचओ साहब ने दबी जुबान से कबूल किया था कि, “जब मैं धौलपुर सीएमएचओ पद पर तैनात था, तब DDO के पास ही सर्विस बुकें थीं।” 24 नवंबर को सीएमएचओ ने चिकित्सक संगठन और मीडिया के दबाव में अपनी स्वच्छ छवि दर्शाते हुए निदेशक से मार्गदर्शन लेकर उचित कार्यवाही का आश्वासन दिया था। लेकिन अब फरवरी में फिर वही रटा-रटाया जवाब देकर साबित कर दिया कि यहाँ सिर्फ “लूट सको जितना लूट लो” की नीति चल रही है।
जांच के नाम पर साधी चुप्पी: 33 लाख का महाघोटाला
करौली चिकित्सा विभाग में ‘EXPOSE NOW’ द्वारा उजागर किए गए ‘ऑपरेशन महाघोटाला’ (भ्रष्टाचार की दीमक जिसने नियमों को कुचलकर सरकारी खजाने में लगाई करीब 33 लाख रुपए की सेंध) खबर प्रकाशित होने के बाद, निदेशालय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं (राजस्थान) ने तुरंत एक्शन लिया।
निदेशालय ने करौली सीएमएचओ को सख्त पत्र जारी कर घोटाले की जांच करवाने, दोषी अधिकारियों/कार्मिकों से गबन की राशि वसूलने, सख्त विभागीय कार्रवाई करने और एफआईआर (FIR) दर्ज कराकर पालना रिपोर्ट भेजने के आदेश दिए थे। लेकिन कई सप्ताह गुजरने के बाद भी ये आदेश सिर्फ ‘हवा-हवाई’ साबित हुए हैं। विभाग ने जिसे दोषी माना, वह आज भी मजे से उसी कुर्सी पर बैठकर अपने भ्रष्टाचार की करतूतों को दबाता नजर आ रहा है।
भरतपुर जेडी का बेतुका जवाब: अपनी ही बात से मुकरे
EXPOSE NOW ने जब जेडी सुनील कुमार से सवाल किया कि सर्विस बुकें कहाँ होनी चाहिए? तो उन्होंने साफ माना था कि यह आचरण चिकित्सकों को प्रताड़ित करने और भ्रष्टाचार को दर्शाता है। उन्होंने कहा था, “मैं जब खुद सीएमएचओ था, तब DDO के पास ही सर्विस बुकें हुआ करती थीं। शिकायत आएगी तो आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।”
लेकिन हद तो तब हो गई जब 181 पोर्टल पर CMHO के जवाब से असंतुष्टि जताने के बाद शिकायत लेवल-3 (सीधे जेडी के पास) पहुंची। वहां से भी वही CMHO वाला रटा-रटाया जवाब (2009 सर्कुलर) आ गया! जब उनसे पूछा गया कि धौलपुर, सवाईमाधोपुर और भरतपुर जिलों में सर्विस बुकें DDO के पास हैं, करौली के नादौती ब्लॉक में ब्लॉक कार्यालय पर हैं, तो फिर बाकी करौली में ऐसा क्यों? जेडी साहब का सीधा जवाब था— “इस प्रकरण में राहत संभव नहीं है।” इससे साफ जाहिर होता है कि चिकित्सकों पर हो रहे अत्याचार में CMHO के साथ खुद जेडी साहब की भी पूरी मिलीभगत है।
निदेशालय की जांच कमेटी का सच: चिकित्सक हो रहे मानसिक प्रताड़ित
दलित महिला चिकित्सक प्रकरण में वर्तमान में मंडरायल ब्लॉक सीएमएचओ पर तैनात डॉक्टर महेश मीणा ने जांच कमेटी के सामने खुद कबूल किया था कि: “हमारे जिले की सर्विस बुक्स सीएमएचओ दफ्तर में रखी हुई हैं और बाबू इमरान खान को ‘सर’ कहना पड़ता है। सर्विस बुक्स यानी (जान हथेली में) CMHO दफ्तर में रखने की वजह से सभी चिकित्सक दबाव में रहते हैं और मानसिक रूप से प्रताड़ित होते हैं।”
गुढ़ाचंद्रजी महाघोटाला: जेडी साहब की मिलीभगत आई सामने
33 लाख रुपए के गबन की खबर प्रकाशित होने के बाद खुद मुख्यमंत्री, चिकित्सा मंत्री और चिकित्सा विभाग की ACS गायत्री राठौड़ ने नाराजगी जताई। निदेशालय ने जेडी सुनील कुमार को तुरंत जांच कर रिपोर्ट भेजने के आदेश दिए, लेकिन आज तक जेडी ने ना कोई जांच दल गठित किया, ना ही कोई पड़ताल की।
EXPOSE NOW ने जब सवाल किया तो वे बचते नजर आए। पहले कहा “आदेश की जानकारी नहीं है”, फिर कहा “दिखवाता हूँ, संबंधित बाबू से पूछता हूँ।” टीम की बारीकी से की गई पड़ताल में सामने आया कि एक अर्दली के जरिए जेडी साहब की मामले को दबाने के लिए ‘अच्छी खासी डील’ हुई है। सच्चाई जानने के लिए जब जेडी साहब से कई बार संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने फोन उठाना ही बंद कर दिया।
न्याय की गुहार और 15 लाख की ‘घूस’ का दावा
गुढ़ाचंद्रजी के तत्कालीन ब्लॉक सीएमएचओ डॉक्टर राजेश मीणा ने चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर और चिकित्सा विभाग के निदेशक को शिकायत भेजकर मार्गदर्शन मांगा है। उन्होंने बताया कि विभाग की ऑडिट ने भी वर्तमान ब्लॉक सीएमएचओ दंत चिकित्सक जगराम मीणा को 33 लाख के गबन का आरोपी माना है।
डॉ. राजेश पिछले 2 साल से शिकायत कर रहे हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही। आरोपी जगराम मीणा खुलेआम कहता है— “ऊपर 15 लाख रुपए दिए हैं, मुझे हटाने वाला कौन है?” तत्कालीन ब्लॉक सीएमएचओ ने विभाग की छवि बचाने के लिए उसे तुरंत हटाने की मांग की है। वहीं, निदेशक जन स्वास्थ्य रवि शर्मा से बातचीत की कोशिश की गई तो वे मंत्री के साथ बैठक में व्यस्त रहे।
जेडी और CMHO ने किया चिकित्सक का नंबर ब्लॉक
जब डॉ. राजेश मीना ने जेडी सुनील कुमार और सीएमएचओ जयंतीलाल मीना से आरोपी पर कार्रवाई की जानकारी लेनी चाही, तो जवाब देने के बजाय दोनों अधिकारियों ने उनका मोबाइल नंबर ही ब्लॉक कर दिया। एक तरफ सरकार कहती है कि अधिकारी हमेशा नंबर चालू रखेंगे, दूसरी तरफ विभाग के मुखिया ही अपने कार्मिक का नंबर ब्लॉक कर रहे हैं।
सबसे हास्यास्पद बात यह है कि जब एक बड़े नेताजी ने सीएमएचओ साहब से गुढ़ाचंद्रजी प्रकरण पर कार्रवाई की बात कही, तो उन्होंने इसे ‘फर्जी शिकायत’ बता दिया। जबकि इस घोटाले को खुद उनके विभाग की ऑडिट टीम ने पकड़ा है। ऐसे में निष्पक्ष जांच कैसे संभव है जब जांच अधिकारी खुद घोटालेबाज के हमदर्द हों?
आखिर बाबू इमरान का ‘गॉडफादर’ कौन है?
करौली मेडिकल विभाग में भ्रष्टाचार का जिक्र हो और बाबू इमरान खान का नाम न आए, यह असंभव है। यह वह बाबू है जो सालों से करौली में जमा है, यहां तक कि करौली में जमे रहने के लिए वह अपना प्रमोशन (Forego) तक छोड़ चुका है!

बीते वर्ष इसी बाबू पर एक दलित महिला चिकित्सक से रिश्वत और अस्मत (Sex Favor) मांगने का आरोप लगा था। निदेशालय द्वारा गठित रामबाबू जायसवाल की तीन सदस्यीय कमेटी ने जांच में बाबू इमरान खान और तत्कालीन सीएमएचओ डॉ. दिनेश चंद मीणा को दोषी माना था। इसके बाद इमरान को सस्पेंड कर उसका मुख्यालय जयपुर (और बाद में दौसा) कर दिया गया।
मामला राष्ट्रीय महिला आयोग, मानवाधिकार आयोग और हाईकोर्ट तक पहुंचा। पुलिस ने भी विभाग की रिपोर्ट के आधार पर दोनों को दोषी माना। लेकिन पुलिस जांच की बड़ी चूक (या भ्रष्टाचार) देखिए कि पुलिस ने अस्मत मांगने के आरोप पर FR (Final Report) लगा दी, जबकि रिश्वत और प्रताड़ना का दोषी माना। नए कानूनों के तहत ऐसे मामले में FR लगने का सवाल ही नहीं उठता।
कहाँ है डेपुटेशन, कहाँ बैठा है बाबू? हैरानी की बात यह है कि मुख्यालय डेपुटेशन पर दौसा होने के बावजूद, बाबू इमरान खान आज भी करौली सीएमएचओ कार्यालय में अपनी उसी सस्पेंड होने वाली कुर्सी पर विराजमान नजर आता है। सीएमएचओ की साठगांठ से उसे समय सीमा में आरोप पत्र तक जारी नहीं किया गया। आखिर ‘जीरो टॉलरेंस’ सरकार में इस बाबू का गॉडफादर कौन है?
बाबू का खौफ: अधिकारी ‘सर’ बोलकर छोड़ते हैं कुर्सी
चिकित्सा विभाग में बाबू इमरान खान का ऐसा टेरर है कि नाम न छापने की शर्त पर कार्मिकों ने बताया: “कोई भी सीएमएचओ आए या जाए, उसे बाबू इमरान खान का अर्दली बनना ही पड़ता है।” सीएमएचओ, आरसीएचओ और बड़े-बड़े गजेटेड अफसर इस बाबू के सामने खड़े रहते हैं और उसे ‘सर’ कहकर अभिवादन करते हैं। सर्विस बुक का मामला हो, जिला स्तर की भर्ती हो, या भ्रष्टाचार की फाइलें— सब कुछ बाबू इमरान खान ही निपटाता है।
EXPOSE NOW सरकार से जवाब मांगता है कि जिस बाबू पर इतने आरोप हैं, जो सस्पेंड हो चुका है, जिसके कारण विभाग की किरकिरी हो चुकी है, उस पर फाइनल एक्शन क्यों नहीं हो रहा?
इनका क्या कहना है…
“करौली सीएमएचओ दफ्तर में सर्विस बुकें रखने को लेकर हम उच्चाधिकारियों को लिखित शिकायत दे चुके हैं। करौली सीएमएचओ ने दादागिरी कर रखी है। इसका मकसद सिर्फ सर्विस बुक रखकर चिकित्सकों को टॉर्चर करना है। अन्य जिलों में सर्विस बुकें आहरण वितरण अधिकारी के पास हैं। अगर समय रहते सर्विस बुक्स संबंधित अधिकारियों को नहीं लौटाई गईं, तो चिकित्सक संघ उग्र आंदोलन पर उतारू होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सीएमएचओ की होगी। राजस्थान चिकित्सा संघ फेडरेशन चिकित्सकों के हित में हमेशा खड़ा है।” — डॉ. ईश्वर पनवार, प्रदेश अध्यक्ष, राजस्थान चिकित्सा संघ फेडरेशन
