करौली चिकित्सा विभाग में ‘जंगलराज’: महिला ANM को BCMO ने दी प्रताड़ना, आरोपों के घेरे में ‘फिसड्डी’ CMHO और गबन के आरोपी अधिकारी

करौली/गुढ़ाचंद्रजी। राजस्थान की भजनलाल सरकार और राष्ट्रीय महिला आयोग भले ही महिला सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे करें, लेकिन करौली जिले में धरातल पर ये वादे दम तोड़ते नजर आ रहे हैं। ताजा मामला गुढ़ाचंद्रजी ब्लॉक की पीएचसी रायसना का है, जहाँ कार्यरत एक महिला एएनएम (ANM) ने ब्लॉक सीएमएचओ (BCMO) जगराम मीणा पर मानसिक प्रताड़ना और अभद्र व्यवहार के गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता ने अतिरिक्त जिला कलेक्टर (ADM) को अपनी आपबीती सुनाते हुए न्याय की गुहार लगाई है।

“चुटकी बजाकर बोले- यहाँ से भाग जा”: प्रताड़ना की पूरी कहानी

पीड़िता के अनुसार, प्रताड़ना का सिलसिला तब शुरू हुआ जब वह अपना इन्सेन्टिव फॉर्म जमा कराने ब्लॉक ऑफिस गई थी। आरोप है कि:

  • अभद्र व्यवहार: BCMO जगराम मीणा ने ऑफिस के गेट पर ही पीड़िता को रोक दिया और चुटकी बजाते हुए अभद्र भाषा का प्रयोग किया। उन्होंने चिल्लाते हुए कहा, “तुझे अभी APO (पदस्थापन प्रतीक्षा) कर दूंगा, यहाँ से भाग जा।”
  • अनुपस्थिति का दबाव: पीड़िता 9 मार्च को अवकाश पर थी, जिसकी सूचना उन्होंने अपनी इंचार्ज को दी थी। इसके बावजूद BCMO ने केंद्र पर पहुंचकर उनके अवकाश को काटकर क्रॉस लगा दिया और वहां तैनात CHO को भी धमकाया।
  • अनसुनी शिकायतें: पीड़िता का कहना है कि उन्होंने कलेक्टर, सीएमएचओ और महिला आयोग तक को रजिस्ट्री से शिकायतें भेजीं, लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई।

आरोपी BCMO पर 33 लाख के गबन का भी आरोप

हैरानी की बात यह है कि जिस BCMO पर महिला कर्मचारी को प्रताड़ित करने का आरोप है, वह पहले से ही 33 लाख रुपये की सरकारी राशि के गबन का आरोपी है। ऑडिट रिपोर्ट में दोषी पाए जाने के बावजूद वह आज भी रसूख के दम पर उसी कुर्सी पर काबिज है, जो विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिह्न है।

करौली CMHO: ‘फिसड्डी’ रैंकिंग और विफलता का पर्याय

इस पूरे मामले में करौली के कार्यवाहक सीएमएचओ (CMHO) डॉ. जयंती लाल मीणा की भूमिका सबसे ज्यादा विवादित रही है। उन्हें जिले का अब तक का सबसे विफल अधिकारी माना जा रहा है:

  1. रैंकिंग में फिसड्डी: आयुष्मान भारत स्वास्थ्य मिशन जैसी फ्लैगशिप योजना में करौली जिला प्रदेश में 41वें नंबर पर है।
  2. आरोपियों से साठगांठ: पूर्व में एक दलित महिला चिकित्सक के मामले में भी आरोपियों पर कार्रवाई करने के बजाय उन पर मेहरबानी दिखाने के आरोप लगे हैं।
  3. विवादास्पद इतिहास: धौलपुर में कार्यकाल के दौरान भी डॉ. जयंती लाल को चार बार चार्जशीट मिली थी और उनकी वेतन वृद्धियां तक रोकी गई थीं।

“अतिरिक्त जिला कलेक्टर हेमराज परिडवाल ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सीएमएचओ को जांच कर दोषी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। हालांकि, पीड़िता ने चेतावनी दी है कि यदि उसे कुछ होता है, तो इसकी जिम्मेदारी उच्च अधिकारियों की होगी।”


प्रमुख सवाल: जो जनता और प्रशासन पूछ रहा है?

  • गबन का आरोपी अधिकारी अब तक सस्पेंड क्यों नहीं हुआ?
  • महिला आयोग के निर्देशों के बावजूद दोषी बाबू और अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
  • बार-बार विवादित रहने वाले अधिकारी को बार-बार मुख्य पदों की जिम्मेदारी क्यों दी जा रही है?
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