प्रधानमंत्री लोन योजना में ‘दलालों का बोलबाला’: क्या 2 हजार 500 रुपये में बिक गई 5 लाख की फाइल?

By Admin

झुंझुनूं में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने जिला उद्योग एवं वाणिज्य केंद्र में बड़ी कार्यवाही करते हुए एक रिश्वतखोर बाबू को रंगे हाथों दबोचा है। यह मामला एक युवा उद्यमी के सपनों से जुड़ा है, जहाँ प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के तहत लोन पास करवाने की एवज में खुलेआम रिश्वत की मांग की गई थी ।

5 लाख का लोन और दो बार रिजेक्शन का सस्पेंस

यह कहानी झुंझुनूं के रहने वाले रविकांत की है, जिन्होंने अपना स्वरोजगार शुरू करने के लिए PMEGP योजना के तहत 5 Lakh रुपये के ऋण के लिए आवेदन किया था । रविकांत ने उम्मीद के साथ 5 Lakh के लोन के लिए 26 फरवरी और 4 मार्च 2026 को आवेदन किया, लेकिन विभाग ने तकनीकी कमियां बताकर उनकी फाइल को दो बार निरस्त (Reject) कर दिया । जब उन्होंने 11 मार्च को तीसरी बार आवेदन किया, तब असली खेल शुरू हुआ

बाबू नीरज की डिमांड और 2 हजार 500 का ‘सौदा’

लोन की फाइल तीसरी बार टेबल पर पहुँचते ही जिला उद्योग केंद्र के स्टेनोग्राफर (शीघ्रलिपिक) नीरज कुमार ने रविकांत को फोन कर ऑफिस बुलाया । बाबू नीरज ने साफ शब्दों में कहा कि फाइल में अभी भी कुछ कमियां हैं, लेकिन यदि वे 2 Hajar 500 रुपये की रिश्वत देते हैं, तो फाइल को तुरंत अप्रूवल (Approval) दिला दी जाएगी । रविकांत इस भ्रष्ट तंत्र के सामने झुकना नहीं चाहते थे, इसलिए उन्होंने 16 मार्च 2026 को एसीबी झुंझुनूं में शिकायत दर्ज करा दी

ऑफिस के अंदर ‘ट्रैप’ और रंगे हाथों गिरफ्तारी

17 मार्च 2026 को एसीबी की टीम ने बिसात बिछाई । योजना के मुताबिक, रविकांत 2 Hajar 500 रुपये लेकर ऑफिस पहुँचे और जैसे ही उन्होंने रिश्वत के नोट बाबू नीरज को थमाए, एसीबी की टीम ने उसे दबोच लिया । शातिर स्टेनोग्राफर ने रिश्वत की राशि अपने बाएं हाथ से लेकर पैंट की पिछली जेब में रख ली थी । जब एसीबी ने उसके हाथों को रासायनिक घोल में धुलवाया, तो उसका रंग गुलाबी हो गया, जो घूसखोरी का सबसे बड़ा वैज्ञानिक प्रमाण बना

प्रधानमंत्री की योजना को चूना लगाने वाला बाबू सलाखों के पीछे

एसीबी ने स्टेनोग्राफर नीरज कुमार को गिरफ्तार कर लिया है और उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है । ब्यूरो अब इस बात की भी जांच कर रहा है कि क्या इस लोन सिंडिकेट में विभाग के अन्य बड़े अधिकारी भी शामिल थे या यह बाबू अकेले ही युवाओं की फाइलों पर ‘मंथली’ या ‘कमीशन’ का खेल खेल रहा था

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