Expose Now Exclusive: 20,000 करोड़ का ‘जल जीवन’ घोटाला—पूर्व IAS सुबोध अग्रवाल की गिरफ्तारी और PHED का वो ‘4000 करोड़ी’ खेल!

राजस्थान के बहुचर्चित जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए पूर्व आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल को शिकंजे में लिया है। ‘Expose Now’ के पास मौजूद एक्सक्लुसिव जानकारी के मुताबिक, यह सिर्फ भ्रष्टाचार का मामला नहीं, बल्कि सरकारी तिजोरी में सुनियोजित तरीके से लगाई गई भारी-भरकम सेंधमारी है।

20,000 करोड़ के टेंडर और 5% कमीशन का ‘फिक्स गेम’

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की जांच में जो सबसे चौंकाने वाला खुलासा हुआ है, वह है ‘टेंडर पूलिंग’ का खेल। जांच के अनुसार जेजेएम के करीब 20,000 करोड़ रुपये के 44 बड़े टेंडरों की सौदेबाजी पहले ही हो चुकी थी। तत्कालीन PHED एसीएस सुबोध अग्रवाल और उनकी टीम ने ठेका कंपनियों के साथ 5 प्रतिशत कमीशन का खेल फिक्स किया था। इस सौदे को अमलीजामा पहनाने के लिए टेंडर की शर्तों में ‘साइट विजिट’ की ऐसी पेचीदा शर्त डाली गई, जिससे बाकी कंपनियां बाहर हो जाएं और सिर्फ ‘चहेती’ कंपनियां ही दौड़ में रहें।

खजाने पर 4000 करोड़ का अतिरिक्त भार

पूलिंग के इस सुनियोजित खेल का असर यह हुआ कि टेंडरों की दरें बाजार भाव से 25 से 42 प्रतिशत तक अधिक आईं। हैरानी की बात यह है कि फायनेंस कमेटी की बैठक में इन ऊंची दरों (25-32% अधिक) को बिना किसी आपत्ति के एप्रूव कर दिया गया। अगर एक गोपनीय शिकायत ने इस खेल का पर्दाफाश न किया होता, तो राज्य सरकार पर 4000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ना तय था।

रडार पर ‘सिंडिकेट’ की 15 कंपनियां और इंजीनियर्स

सुबोध अग्रवाल की गिरफ्तारी के बाद अब उन 14-15 ठेका कंपनियों की शामत आने वाली है जो इस पूलिंग सिंडिकेट का हिस्सा थीं। एसीबी की पूछताछ में कई बड़े राज उगलने की उम्मीद है, जिससे तत्कालीन एक्सईएन संजय अग्रवाल और कई एडिशनल चीफ इंजीनियर्स (ACE) के नाम जांच के घेरे में हैं।

गिरफ्तारी की बड़ी वजह: ‘पूलिंग’ और ‘फर्जी सर्टिफिकेट’ का खेल

एसीबी की तफ्तीश में सामने आया है कि जेजेएम के टेंडरों में भ्रष्टाचार की जड़ें बहुत गहरी थीं। सुबोध अग्रवाल से मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर पूछताछ की जाएगी:

इरकॉन (IRCON) के फर्जी सर्टिफिकेट: इरकॉन के फर्जी अनुभव प्रमाण पत्रों के आधार पर करोड़ों के टेंडर हथियाए गए। ताज्जुब की बात यह है कि फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद भी मैसर्स गणपति ट्यूबवैल जैसी कंपनियों को जेजेएम के कार्य सौंपे गए।

श्याम ट्यूबवैल पर दबाव: आरोप है कि एक अन्य कंपनी, श्याम ट्यूबवैल पर अनुचित दबाव बनाकर करोड़ों रुपये का फर्जी भुगतान कराया गया।

20,000 करोड़ के टेंडर और 5% कमीशन की ‘डील’
घोटाले की परतें खोलते हुए सूत्रों ने बताया कि जेजेएम के 20,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि के 44 टेंडरों में ‘पूलिंग’ का गंदा खेल खेला गया। चर्चा है कि ठेका कंपनियों से इन बड़े टेंडरों के बदले 5 प्रतिशत कमीशन की सौदेबाजी हुई थी। इस सौदेबाजी को अमलीजामा पहनाने के लिए टेंडर की शर्तों में जानबूझकर ‘साइट विजिट’ की अनिवार्य शर्त जोड़ी गई।इसी ‘साइट विजिट’ की आड़ में चहेती 14-15 कंपनियों का एक सिंडिकेट बनाया गया। परिणाम यह हुआ कि प्रतिस्पर्धा खत्म कर दी गई। टेंडरों की दरें बाजार भाव से 25 से 42 प्रतिशत तक अधिक आईं।

शिकायतकर्ताओं के अनुसार, इस पूलिंग के जरिए राजस्थान के राजस्व को सीधे तौर पर 4000 करोड़ रुपये की चपत लगाने की तैयारी थी।

रडार पर कई ‘नाम’ और ठेका कंपनियां:-

सुबोध अग्रवाल की गिरफ्तारी तो सिर्फ शुरुआत है। एसीबी की इस पूछताछ की तपिश अब महकमे के कई और अधिकारियों तक पहुंचने वाली है। तत्कालीन OSD एक्सईएन संजय अग्रवाल समेत कई तत्कालीन एडिशनल चीफ इंजीनियर्स (ACE) एसीबी की रडार पर हैं। पूलिंग के जरिए L-1 आने वाली उन 14-15 कंपनियों पर भी बड़ी कार्रवाई तय मानी जा रही है, जिन्होंने भ्रष्टाचार के इस खेल में मलाई काटी।

Expose Now इस महा-घोटाले की हर अपडेट आप तक पहुंचाता रहेगा। राजस्थान के जन-स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) में मची इस खलबली ने साफ कर दिया है कि ‘नल से जल’ पहुंचाने की योजना में कुछ रसूखदारों ने अपनी जेबें भरने का कोई मौका नहीं छोड़ा।

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