जयपुर। राजस्थान के महत्वाकांक्षी ‘जल जीवन मिशन’ (JJM) में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका सनसनीखेज खुलासा बीकानेर संभाग के खाजूवाला और नोखा में हुआ है। ‘Expose Now’ की पड़ताल और ताजा प्रशासनिक रिपोर्टों सामने आया है कि यहाँ आम जनता की प्यास बुझाने के नाम पर ठेका कंपनी ने पीएचईडी इंजीनियर्स के साथ मिलकर करोड़ों रूपए का फर्जी भुगतान उठा लिया।
भ्रष्टाचार का ‘ट्रेंच’ मॉडल: एक खुदाई, दोहरा मुनाफा
जांच में जो सबसे चौंकाने वाली बात सामने आई है, वह है ‘एक ट्रेंच में दो पाइप’ की थ्योरी। खाजूवाला और नोखा में ठेकेदारों ने मिलीभगत कर एक ही खाई खोदी, उसमें दो अलग-अलग पाइप लाइनें बिछा दीं, लेकिन सरकार से भुगतान दो अलग-अलग ट्रेंच (खाइयों) का उठाया। यह सीधे तौर पर सरकारी खजाने में सेंधमारी का मामला है। नियमानुसार एक ट्रेंच में 2 पाइपलाइनें डालना पूरी तरह से अवैध है। अब सबसे बड़ा सवाल उठता है कि विभाग के इंजीनियर्स ने इसे कैसे एप्रूव्ड कर दिया और फिर कैसे इसका दोहरा भुगतान कर दिया?
- चोरी का पैमाना: पाइप लाइन बिछाने का काम ट्रैक्टर ट्रेंचर से कराया गया, जिसकी अधिकतम चौड़ाई 200 एमएम होती है।
- कागजी खेल: भुगतान 350 एमएम की चौड़ाई दिखाकर उठाया गया, ताकि बजट को कई गुना बढ़ाकर डकारा जा सके।
80 ओवरहेड टैंक: कमरे गायब, पेमेंट पूरा!
घोटाले की कहानी यहीं खत्म नहीं होती। संभाग में लगभग 80 ओवरहेड टैंकों (पानी की टंकियों) के निर्माण के साथ नियमतः पंप हाउस और मशीनरी के लिए कमरों का निर्माण होना था।
सच्चाई: फील्ड सर्वे में पता चला है कि दर्जनों जगहों पर ये कमरे बनाए ही नहीं गए, लेकिन फाइलों में निर्माण दिखाकर उनका पूरा भुगतान उठा लिया गया।
प्रकरण में दो-दो जांच कमेटियां गठित, लेकिन नतीजा जीरो!
खाजूवाला और नोखा में कार्यरत फर्म ‘ओम इंफ्रा लिमिटेड’ के विरुद्ध नियम विरुद्ध भुगतान के आरोपों की जांच में विभाग के बड़े अधिकारियों की भूमिका भी कटघरे में है। तत्कालीन चीफ इंजीनियर ने अतिरिक्त मुख्य अभियंता चूरू को इस मामले में पत्र लिखकर सचेत किया था, लेकिन आरोप है कि रसूखदार ठेकेदारों को बचाने के लिए उस वक्त मामले को रफा-दफा कर दिया गया और आज दिनांक तक मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई।
उक्त दोनों प्रकरणों में हुए फर्जीवाड़े के खेल का मीडिया में खुलासा होने तथा शिकायतों के बाद आर.के.मीणा, मुख्य अभियंता, क्वालिटी कंट्रोल, पीएचईडी द्वारा जांच कमेटी गठित की गई थी, लेकिन जांच कमेटी द्वारा ठेका कंपनी के साथ मिलीभगत हो जाने के चलते फर्जीवाड़े के इस गंभीर प्रकरण में कोई कार्रवाई नहीं की गई, बल्कि मामले को दबा दिया गया। इसके बाद संदीप शर्मा, अतिरिक्त सचिव एवं मुख्य अभियंता, पीएचईडी द्वारा पिछले दिनों दूसरी जांच कमेटी का गठन किया गया था, जिसकी जांच में मीडिया में प्रकाशित खबरें पूरी तरह से प्रमाणित होने के साथ ही ये चौकाने वाले मामले सामने आए हैं।
‘Expose Now’ का सवाल: जब 2024 में काम पूरा होना था और अब तक केवल 70-80% ही काम हुआ है, तो ठेकेदारों को अतिरिक्त भुगतान किसके इशारे पर किया गया?
देखते रहिए ‘Expose Now’, उक्त दोनों प्रकरणों को लेकर जल्द ही भ्रष्टाचार के शुरुआती खेल का भी होगा पर्दाफाश!
