जयपुर: गुलाबी नगरी को नशे का अड्डा बनने से रोकने के लिए जयपुर पुलिस ने ‘ऑपरेशन क्लीन स्वीप’ के तहत एक बड़ी सफलता हासिल की है। एडिशनल पुलिस कमिश्नर (CST) की टीम ने शहर के अलग-अलग हिस्सों में दबिश देकर 5 शातिर तस्करों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से चरस, एमडी (MD) और स्मैक जैसी खतरनाक ड्रग्स बरामद हुई हैं, जिनकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 12 से 15 लाख रुपये आंकी जा रही है।
कुल्लू का ‘नेपाली कनेक्शन’ और सप्लाई चेन
पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में पहला सिंह मुख्य कड़ी है। वह मूल रूप से नेपाल का रहने वाला है और हिमाचल प्रदेश के कुल्लू से उच्च गुणवत्ता वाली चरस लाकर जयपुर में सप्लाई करता था।
- नेटवर्क: यह गिरोह कुल्लू से ड्रग्स लाकर जयपुर के स्थानीय पैडलर्स (मनीष, महेंद्र, गोविंद और विनोद) को देता था।
- लॉजिस्टिक: तस्करों ने पुलिस की नजरों से बचने के लिए लग्जरी कारों और हाई-स्पीड मोटरसाइकिल का उपयोग किया, ताकि ‘होम डिलीवरी’ के दौरान संदेह न हो।
ऑपरेशन की बारीकियां: कहाँ-कहाँ हुई कार्रवाई?
CST ने मुखबिर की सूचना पर तीन अलग-अलग ठिकानों पर जाल बिछाया:
- आमेर क्षेत्र: यहाँ से नेपाली तस्कर पहला सिंह को 1.344 किलो चरस के साथ पकड़ा गया।
- बगरू इलाका: यहाँ से तीन अन्य तस्करों को स्मैक और एमडी ड्रग्स की छोटी पुड़ियों के साथ दबोचा गया।
- शहर के अन्य ठिकाने: तस्करों के पास से 28,870 रुपये नकद बरामद हुए हैं, जो ड्रग्स बेचकर कमाए गए थे।
खुलासा: स्कूल, कॉलेज और कैफे बने हॉटस्पॉट
पूछताछ में तस्करों ने जो कबूल किया वह बेहद डरावना है। उन्होंने बताया कि उनका प्राथमिक लक्ष्य स्कूल और कॉलेजों के छात्र थे।
- मोडस ऑपेरंडी: आरोपी छात्रों को पहले मुफ्त या कम दाम में ‘सैंपल’ देते थे और लत लगने के बाद उन्हें ऊंचे दामों पर ड्रग्स बेचते थे।
- लोकेशन: शहर के पॉश इलाकों के कैफे, होटल और पीजी (PG) आवासों के बाहर ये तस्कर सक्रिय रहते थे।
पुलिस की अगली रणनीति: मास्टरमाइंड की तलाश
पुलिस अब इन तस्करों के मोबाइल डेटा और बैंक खातों की जांच कर रही है। पुलिस को संदेह है कि इस गिरोह के तार दिल्ली और मुंबई के बड़े सप्लायर्स से भी जुड़े हो सकते हैं। पुलिस कमिश्नर ने साफ किया है कि “पकड़े गए आरोपी सिर्फ प्यादे हैं, हमारा लक्ष्य उस मास्टरमाइंड तक पहुँचना है जो जयपुर में इस जहर की फंडिंग कर रहा है।”
