गुलाबी नगरी में मकर संक्रांति की धूम: पतंगबाजी का कारोबार ₹18 करोड़ पार, व्यापारियों में भारी उत्साह

जयपुर, मकर संक्रांति के पर्व पर जयपुर का आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से सजने को तैयार है। इस बार गुलाबी नगरी के पतंग बाजारों में जबरदस्त रौनक देखी जा रही है। व्यापारियों के अनुसार, इस साल जयपुर में पतंग और मांझे का कुल कारोबार 18 करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान है, जिससे बाजार में खुशी का माहौल है।

बाजार में उमड़ा जनसैलाब, 1.5 करोड़ पतंगों की बिक्री की उम्मीद

जयपुर के प्रमुख पतंग बाजारों जैसे हांडीपुरा, किशनपोल, चांदपोल और हल्दियों का रास्ता में पैर रखने तक की जगह नहीं है। व्यापारियों का मानना है कि संक्रांति तक 1.5 करोड़ से अधिक पतंगें बिक जाएंगी। पिछले साल के मुकाबले इस बार ग्राहकी में 30 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया है।

कहां कितनी दुकानें और क्या हैं दाम?

जयपुर में पतंगों का एक बड़ा नेटवर्क है, जो दूर-दराज के व्यापारियों को भी आकर्षित करता है:

  • दुकानों की संख्या: शहर में 1500 से अधिक दुकानें सजी हैं, जिनमें 250 से ज्यादा होलसेल की दुकानें हैं।
  • पतंगों की वैरायटी: बाजार में ₹2 से लेकर ₹150 तक की पतंगें उपलब्ध हैं। अद्धा, मझौली और पोणी के साथ फैंसी पन्नी वाली पतंगों की भारी मांग है।
  • मांझा और चरखी: एक चरखी (3 रील मांझा) की कीमत ₹250 से लेकर ₹2000 तक है।

बाहरी राज्यों के व्यापारियों का जमावड़ा

जयपुर की पतंगबाजी इतनी प्रसिद्ध है कि बरेली, मुरादाबाद, लखनऊ और फर्रूखाबाद के साथ-साथ बीकानेर और सीकर के व्यापारी महीनों पहले ही यहां आकर डेरा डाल लेते हैं। कारीगरों की चांदी हो रही है; एक कारीगर प्रतिदिन ₹600 से ₹1500 तक कमा रहा है।

सिर्फ पतंग ही नहीं, ‘कळपने’ और ‘विशिंग लैम्प’ का भी क्रेज

मकर संक्रांति पर दान-पुण्य की परंपरा के चलते बाजारों में 14-14 वस्तुओं के पैकेट (कळपने का सामान) खूब बिक रहे हैं। इनकी कीमत ₹30 से लेकर ₹2000 तक है। इसके अलावा, रात के समय आसमान को रोशन करने वाले विशिंग लैम्प का भी ₹1 करोड़ से अधिक का कारोबार होने की उम्मीद है।


एक नजर में बाजार का हाल

विवरणआंकड़े/कीमत
कुल अनुमानित कारोबार₹18 करोड़ +
पतंगों की अनुमानित बिक्री1.5 करोड़ से अधिक
महंगाई का असरपिछले साल से 20% महंगी
कारीगरों की कमाई₹600 – ₹1500 प्रतिदिन
प्रमुख बाजारहांडीपुरा, किशनपोल, चांदपोल
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