जयपुर: शहर में यूडी (अर्बन डेवलपमेंट) टैक्स वसूली को लेकर नगर निगम और औद्योगिक इकाइयों के बीच नया विवाद खड़ा हो गया है। झोटवाड़ा इंडस्ट्रियल (रीको) एरिया में विद्याधर नगर जोन की ओर से बीते एक सप्ताह में करीब 10 से 12 फैक्ट्रियों को यूडी टैक्स के नोटिस जारी किए गए हैं। इस कार्रवाई के बाद निगम और फैक्ट्री मालिक आमने-सामने आ गए हैं। इंडस्ट्रियल एरिया में निगम की इस कार्यप्रणाली को लेकर भारी विरोध शुरू हो गया है।
18 साल का निकाला हिसाब, 2 लाख रुपए तक की वसूली
झोटवाड़ा इंडस्ट्रियल एरिया में विद्याधर नगर जोन ने साल 2007 से 2025 तक (18 साल) का बकाया यूडी टैक्स जोड़कर नोटिस जारी किए हैं। इसके आधार पर प्रति यूनिट 1.5 लाख से 2 लाख रुपए तक की भारी-भरकम वसूली निकाली गई है। फैक्ट्री मालिकों का कहना है कि विशेषकर 164 से 174 यूनिट्स को जो नोटिस दिए गए हैं, उनमें एक भी यूनिट में उत्पादन के अलावा अन्य कोई व्यावसायिक या आवासीय गतिविधि नहीं हो रही है। इसके बावजूद निगम ने 18 साल की एकमुश्त गणना कर दी।
निगम का तर्क: वेयरहाउस और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां चल रहीं
इस विवाद पर नगर निगम (विद्याधर नगर जोन) की राजस्व अधिकारी सरोज पारीक का स्पष्ट कहना है कि केवल फैक्ट्री या प्रोडक्शन यूनिट होने पर यूडी टैक्स नहीं लिया जाता है। नियमतः जहां वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज, आवासीय या अन्य व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं, वहां यूडी टैक्स लागू होता है। निगम के अधिकारियों के अनुसार, इसी आधार पर झोटवाड़ा इंडस्ट्रियल एरिया में ये नोटिस जारी किए गए हैं।
मालिकों का पक्ष: वास्तविक जांच के बिना ही थमा दिए नोटिस
झोटवाड़ा एसोसिएशन के अध्यक्ष आनंद और अन्य फैक्ट्री मालिकों ने निगम के दावों को सिरे से खारिज किया है। उनका तर्क है कि रीको (RIICO) एरिया में जमीन आवंटन के बाद वे तमाम तरह के टैक्स, लीज राशि और अन्य शुल्क सीधे ‘रीको’ को ही जमा कराते हैं।
मालिकों का आरोप है कि निगम द्वारा यूडी टैक्स के नोटिस देना पूरी तरह गलत है, क्योंकि निगम इस क्षेत्र में कोई मूलभूत सुविधाएं (सड़क, सीवरेज आदि) भी उपलब्ध नहीं करवा रहा है। इसके अलावा, निगम के अधिकारियों ने मौके पर कोई वास्तविक (फिजिकल) जांच किए बिना ही हवा-हवाई तरीके से लाखों रुपए के नोटिस थमा दिए हैं।
