देश में शिक्षा संकट: 5,694 सरकारी स्कूलों में जीरो नामांकन, 10 सालों में बंद हुए 8% स्कूल

नई दिल्ली: देश में सरकारी स्कूलों की हालत दिन-ब-दिन खस्ता होती जा रही है। शिक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश के 5,694 सरकारी स्कूलों में एक भी छात्र का नामांकन (Zero Enrollment) नहीं है। इसके अलावा, 11,149 स्कूल ऐसे हैं जो केवल एक ही शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं।

10 साल में 8% स्कूल बंद

रिपोर्ट बताती है कि पिछले एक दशक में देश में 8% सरकारी स्कूल बंद हो चुके हैं। वहीं, बीते 5 सालों में ही 18,727 स्कूलों पर ताला लग गया है। यह स्थिति तब है जब सरकार शिक्षा पर सालाना करीब 1.25 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च कर रही है।

राज्यों की स्थिति (जीरो नामांकन वाले स्कूल)

राज्यजीरो नामांकन स्कूलसिंगल टीचर स्कूल
राजस्थान1,9521,571
उत्तर प्रदेश82500
मध्य प्रदेश7485,987
गुजरात21100
छत्तीसगढ़10800
महाराष्ट्र1844

क्यों हो रही है यह दुर्दशा?

सरकारी स्कूलों की इस बदहाली के पीछे कई कारण माने जा रहे हैं:

  • निजी स्कूलों का दबदबा: गली-गली खुलते निजी स्कूल और बेहतर करियर का वादा अभिभावकों को आकर्षित कर रहा है।
  • गुणवत्ता और सुविधाओं की कमी: सरकारी स्कूलों में पढ़ाई में लापरवाही और संसाधनों का अभाव है।
  • मार्केटिंग: निजी स्कूल एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटी और मार्केटिंग में आगे हैं।
  • आर्थिक क्षमता: माता-पिता की बढ़ती आर्थिक क्षमता भी उन्हें निजी स्कूलों की ओर ले जा रही है।

विशेषज्ञों की राय

पूर्व आईएएस और शिक्षाविद मनोहर दुबे का कहना है कि सरकार को नए स्कूलों के निर्माण से पहले क्षेत्र की जरूरत का आकलन करना चाहिए। स्कूलों को सुविधाजनक बनाने और बच्चों को स्कूल तक लाने के लिए बेहतर व्यवस्था करनी होगी, तभी नामांकन बढ़ेगा।

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