जयपुर। प्रदेश में सरकारी स्कूलों के बच्चों की डिजिटल पढ़ाई पर शिक्षा विभाग के अधिकारियों के कमीशनखोरी का खेल भारी पड़ रहा है। इसी कारण से 3213 सरकारी स्कूलों में ICT लैब स्थापना का कार्य दूसरे शैक्षणिक सत्र में भी शुरू नहीं हो पाया। करीब 360 करोड़ की लागत के इस कार्य में विभाग के अधिकारियों और ठेका कंपनियों के बीच सांठगांठ हो जाने के कारण खुलेआम निविदा शर्तों एवं RTPP नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही है, जिसके चलते 3 बार निविदाओं को निरस्त किया जा चुका है।
शिक्षा विभाग की ओर से 06 अक्टूबर, 2025 को चौथी बार 3213 सरकारी स्कूलों में ICT लैब स्थापना कार्य की निविदा संख्या- 05/2025-26 आमंत्रित की गई। विभाग के उच्चाधिकारियों द्वारा खुद को करोड़ों का लाभ प्राप्त करने के लिए फिर से वहीं कहानी दोहरा दी। निविदा प्रक्रिया में चार कंपनियों ने भाग लिया और आनन-फानन में बिना दस्तावेजों की जांच किए ही सभी कंपनियों की तकनीकी बिड खोल दी।
तकनीकी बिड में शामिल सभी कंपनियों के दस्तावेजों में गंभीर खामियां होने के बाद भी निविदा प्रक्रिया को निरस्त करने की बजाए अधिकारी निविदा की वित्तीय बिड खोलने में जुटे हैं। विभाग के अधिकारियों ने चहेती ठेका कंपनियों के साथ खुद को करोड़ों का फायदा पहुंचाने के लिए न केवल निविदा प्रक्रिया को दूषित कर दिया, बल्कि 2 साल से सरकारी स्कूलों के लाखों बच्चों के भविष्य के साथ बड़ा खिलवाड़ किया जा रहा है।

नई निविदा में सौदेबाजी का खेल उजागर नहीं हो इसलिए पिछली निविदा में भाग लेने वाली ठेका कंपनी Unbox Gadgets Pvt Ltd के स्थान पर नई निविदा में Hello Mobiles Pvt Ltd ने निविदा में भाग लिया, जबकि दोनों कंपनियों का रजिस्टर्ड पता House No: 2-56/2-33, Plot No. 1303, Near YSR Statue, Khanamet, Road No.- 48, Ayyappa Society- Madhapur, Hyderabad- 500081, Telangana एक ही है।
शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारी सौदेबाजी के बाद चहेती कंपनियों पर इस कदर मेहरबान है कि उक्त निविदा की शर्तों की पालना नहीं किए जाने के बाद भी कंपनियों की न केवल पद का दुरूपयोग करते हुए तकनीकी बिड खोल दी गई, बल्कि उन्हें अवैध तरीके से निविदा की तकनीकी बिड में पास कर उन्हें कार्य देने की तैयारी है। निविदा में ठेका कंपनियों की गंभीर कमियां, जो निम्न प्रकार हैः-
Hello Mobiles Pvt Ltd की निविदा में गंभीर कमियांः-
- उक्त निविदा में भाग लेने वाली कंपनी Hello Mobiles Pvt Ltd ने डेस्कटॉप में दो कंपनियों (Dell & HP) के ऑथोराइजेशन सर्टिफिकेट लगाए हुए है, जो पूरी तरह से RTPP नियमों की अवहेलना है। नियमानुसार कोई भी बिडर एक आइटम के लिए सिर्फ एक ही ऑथोराइजेशन दे सकता है।
- कंपनी का डेस्कटॉप MAF ऑथोराइजेशन RFP में मांगे हुए ड्राफ्ट के अनुसार न होकर खुद के हिसाब से टर्म्स एण्ड कंडीशंस डालकर सबमिट किया गया है, जो की निविदा शर्तों का खुला उल्लंघन है।
- कंपनी द्वारा सशर्त डेस्कटॉप आइटम कोट किया गया है, जिसमें SFF/MT के स्थान पर Tower Cabinet कोट किया हुआ है, जो कोट किए हुए डेस्काटॉप को अयोग्य बना देता है।
- कंपनी द्वारा Acer Thin Client में जो अनुभव लगाया हुआ है वह कम लोकेशन्स का है, जो कि RFP में मांगे गए 1000 लोकेशन की शर्त को पूरा नहीं करता है।
- निविदा में Desktop, Thin clint, Printer, UPS, IFPD में Govt School/ College/ Govt Institution का अनुभव मांगा गया है, जबकि कंपनी की ओर से सबमिट किया गया कार्य अनुभव को-ऑपरेटिव बैंक का है, जो कि अमान्य है।
- कंपनी द्वारा Headphone के स्थान पर Web Camera का RoHS सर्टिफिकेट दिया हुआ है, जो कि निविदा शर्तों के अनुसार अमान्य है।
- कंपनी द्वारा एंटी-वायरस में अलग से शर्त जोड़ी हुई है और सशर्त एंटी वायरस आइटम कोट किया गया है, जो कि गलत और अमान्य है।
Extramarks Education India Pvt Ltd की निविदा में गंभीर कमियांः-
- उक्त निविदा में भाग लेने वाली कंपनी Extramarks Education India Pvt Ltd ने बिड में पार्टिसिपेट करने के लिए 150 रूपए के स्टाम्प पर BG बनाकर प्रस्तुत की है, जबकि निविदा शर्तों के अनुसार 25000 रूपए के स्टाम्प पर BG बनाकर प्रस्तुत की जानी थी। कंपनी की यह बिड प्राइमरी स्टेट पर ही रिजेक्ट हो जानी थी, लेकिन मिलीभगत के चलते विभागीय अधिकारियों द्वारा कंपनी की BG को टेक्निकली एक्सेप्ट कर बिड खोलकर पूरी बिड को ही अवैध व दूषित कर दिया, जो कि गंभीर लापरवाही और पद के दुरूपयोग की श्रेणी में आता है।
- निविदा शर्तों के अनुसार बिडर को निविदा में सफल होने के लिए पिछले 3 वित्तीय वर्षों में 60 Crore one order / 40 Crore Two orders/ 30 Crore 3 orders का कार्य अनुभव होना अनिवार्य है। कंपनी Extramarks Education India Pvt Ltd द्वारा निविदा में वित्तीय वर्ष 2021-22 का 127 करोड़ के अलावा एक 45 करोड़ तथा दूसरा 35 करोड़ का कार्य अनुभव प्रमाण पत्र लगाया गया है, जो कि निविदा शर्तों के अनुरूप नहीं है। कंपनी द्वारा लगाया गया 2021-22 का 127 करोड़ का कार्य अनुभव पिछले 3 वित्तीय वर्षों का न हो कर चौथे वित्तीय वर्ष का है, जो कि अमान्य है।
- कंपनी द्वारा IFPD Product में जो कार्य कार्य अनुभव प्रमाण पत्र लगाया है, वह सबमिट कराए गए वर्क कम्पलीशन सर्टिफिकेट की डेट से मैच नहीं कर रहा, जो कि कार्य अनुभव प्रमाण पत्र की विश्वसनीयता पर ही सवाल खड़े कर रहा है।
Kendriya Bhandar की निविदा में गंभीर कमियांः-
- कंपनी द्वारा निविदा में Power of Attorney / Board of Resolution नहीं लगाया हुआ है, जो निविदा शर्तों का खुला उल्लंघन है।
- कंपनी द्वारा निविदा में MOA / AOA नहीं लगाया हुआ है, जो निविदा शर्तों का खुला उल्लंघन है।
- कंपनी द्वारा Acer Thin Client में जो अनुभव लगाया हुआ है वह कम लोकेशन्स का है, जो कि RFP में मांगे गए 1000 लोकेशन की शर्त को पूरा नहीं करता है।
- उक्त निविदा में भाग लेने वाली कंपनी Kendriya Bhandar ने डेस्कटॉप में दो कंपनियों (Dell & HP) के ऑथोराइजेशन सर्टिफिकेट लगाए हुए है, जो पूरी तरह से RTPP नियमों की अवहेलना है। नियमानुसार कोई भी बिडर एक आइटम के लिए सिर्फ एक ही ऑथोराइजेशन दे सकता है।
- निविदा में Desktop, Thin clint, Printer, UPS, IFPD में Govt School/ College/ Govt Institution का अनुभव मांगा गया है, जबकि कंपनी की ओर से सबमिट किया गया कार्य अनुभव को-ऑपरेटिव बैंक का है, जो कि अमान्य है।
- कंपनी द्वारा एंटी-वायरस में अलग से शर्त जोड़ी हुई है और सशर्त एंटी वायरस आइटम कोट किया गया है, जो कि गलत और अमान्य है।
MIRC Electronics Ltd की निविदा में गंभीर कमियांः-
- उक्त निविदा में भाग लेने वाली कंपनी MIRC Electronics Ltd द्वारा प्रस्तुत बिड डॉक्यूमेंट साइन ही नहीं है, जो कि मान्य ही नहीं है।
- उक्त निविदा में भाग लेने वाली कंपनी MIRC Electronics Ltd ने डेस्कटॉप में दो कंपनियों (Dell & HP) के ऑथोराइजेशन सर्टिफिकेट लगाए हुए है, जो पूरी तरह से RTPP नियमों की अवहेलना है। नियमानुसार कोई भी बिडर एक आइटम के लिए सिर्फ एक ही ऑथोराइजेशन दे सकता है।
- कंपनी द्वारा Acer Thin Client में जो अनुभव लगाया हुआ है वह कम लोकेशन्स का है, जो कि RFP में मांगे गए 1000 लोकेशन की शर्त को पूरा नहीं करता है।
- कंपनी का डेस्कटॉप MAF ऑथोराइजेशन RFP में मांगे हुए ड्राफ्ट के अनुसार न होकर खुद के हिसाब से टर्म्स एण्ड कंडीशंस डालकर सबमिट किया गया है, जो की निविदा शर्तों का खुला उल्लंघन है।
- कंपनी द्वारा IFPD Product में जो कार्य कार्य अनुभव प्रमाण पत्र लगाया है, वह सबमिट कराए गए वर्क कम्पलीशन सर्टिफिकेट की डेट से मैच नहीं कर रहा, जो कि कार्य अनुभव प्रमाण पत्र की विश्वसनीयता पर ही सवाल खड़े कर रहा है।
- निविदा में Desktop, Thin clint, Printer, UPS, IFPD में Govt School/ College/ Govt Institution का अनुभव मांगा गया है, जबकि कंपनी की ओर से सबमिट किया गया कार्य अनुभव को-ऑपरेटिव बैंक का है, जो कि अमान्य है।
- कंपनी द्वारा एंटी-वायरस में अलग से शर्त जोड़ी हुई है और सशर्त एंटी वायरस आइटम कोट किया गया है, जो कि गलत और अमान्य है।
PMO में शिकायत के बाद 4 महिने पहले निरस्त करनी पड़ी थी निविदाः-
विभाग की ओर से इससे पहले के जनवरी, 2025 में निविदा संख्या- 24/2024-25 आमंत्रित की गई थी, जिसे भी विभाग के उच्चाधिकारियों द्वारा खुद को करोड़ों का लाभ पहुंचाने के लिए नियम विरूद्ध तरीके से चहेती फर्मों को कार्यादेश देने के कूटरचित प्रयास किए जा रहे थे, जिसके चलते 8 महिने तक निविदा प्रक्रिया को लटकाए रखा था। विभाग के अधिकारियों और ठेका कंपनियों के इस मिलीभगत व सौदेबाजी के खेल की प्रधानमंत्री कार्यालय तक शिकायत पहुंची थी, जिसकी भनक लगते ही अधिकारियों ने आनन-फानन में निविदा प्रक्रिया को निरस्त कर दिया। हालांकि इस निविदा को निरस्त करने के प्रकरण में आज दिनांक तक किसी भी संबंधित अधिकारी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिसके चलते इस मिलीभगत के खेल पर और भी ज्यादा सवाल खड़े हो गए हैं।
करोड़ों के एडवांश के खेल में फंसे अधिकारी, काम देना हुआ मजबूरीः-
सूत्रों के अनुसार 3213 सरकारी स्कूलों में आईसीटी लैब स्थापना का कार्य को लेकर विभाग के कुछ अधिकारियों और ठेका कंपनियों के बीच पहले से करोड़ों के एडवांश में लेनदेन हो चुका था, जिसके बाद विभाग की ओर से निविदा संख्या- 24/2024-25 आमंत्रित कर ठेका कंपनी को काम दिया जाना था। लेकिन निविदा प्रक्रिया पर खुलेआम नियम व शर्तों की धज्जियां उड़ाने को लेकर गंभीर शिकायतें होने के बाद शिक्षा मंत्री के विरोध और पीएमओ तक शिकायतें पहुंचने के बाद इस निविदा को आनन-फानन में निविदा को निरस्त करना पड़ गया। निविदा के निरस्त हो जाने और आगे काम की संभावना नहीं दिखने पर ठेका कंपनी की ओर से करोड़ों के एडवांश का पैसा वापस लौटाने की डिमाण्ड करने से विभाग के अधिकारी भारी दबाव में आ गए। इसके बाद विभाग के अधिकारियों ने ठेका कंपनी को आश्वस्त किया कि जल्द ही निविदा प्रक्रिया फिर से शुरू होगी और काम दे दिया जाएगा।
सौदेबाजी के खेल का ACB में परिवाद दर्ज, शिक्षा शासन सचिव से मांगी तथ्यात्मक रिपोर्ट:-
जनवरी, 2025 में आमंत्रित की गई निविदा संख्या- 24/2024-25 में विभाग के उच्चाधिकारियों द्वारा खुद को करोड़ों का लाभ पहुंचाने के लिए नियम विरूद्ध तरीके से चहेती ठेका कंपनियों को मोटा फायदा पहुंचाने के खेल को लेकर एसीबी में शिकायत हुई थी, जिस पर एसीबी ने दिनांक- 03.11.2025 को परिवाद संख्याः सी-एचआर-42/2025 दर्ज किया गया है। परिवार को लेकर एसीबी की ओर से सचिव, स्कूल शिक्षा विभाग, राजस्थान, जयपुर से तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी गई है। हालांकि विभाग के अधिकारियों की ओर से अभी तक एसीबी को तथ्यात्मक रिपोर्ट नहीं भेजी गई, जिससे भी शिक्षा विभाग के अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।
EXPOSE NOW के सवाल, जो जवाब मांगते हैः-
- गंभीर अनियमितताएं और भ्रष्टाचार उजागर होने के बाद निविदा संख्या- 24/2024-25 को निरस्त किया गया, लेकिन दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
- निविदा संख्या- 05/2025-26 में RTPP नियमों व निविदा शर्तों की अवहेलना होने के बाद भी निविदा को निरस्त क्यों नहीं किया गया?
- निविदा संख्या- 05/2025-26 में RTPP नियमों व निविदा शर्तों में सभी कंपनियां अपात्र, फिर भी वित्तीय बिड क्यों खोली जा रही है?
