“अगर गुरु तेग बहादुर न होते, तो न कोई हिन्दू बचता न सिख”: अमित शाह का बड़ा बयान; ‘हिंद की चादर’ को किया नमन

नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सिखों के नौवें गुरु, श्री गुरु तेग बहादुर जी के सर्वोच्च बलिदान को याद करते हुए एक भावुक और ऐतिहासिक बयान दिया है। शाह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत का अस्तित्व और यहां की सनातन संस्कृति अगर आज जीवित है, तो इसका श्रेय ‘हिंद की चादर’ गुरु तेग बहादुर जी को जाता है।

अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा, “मैं कई बार कह चुका हूं और आज फिर दोहराता हूं, अगर इस देश में गुरु तेग बहादुर न होते, तो न कोई हिन्दू बचता और न ही कोई सिख रहता।”

“हजारों सालों तक नहीं भूल सकते उपकार” गृह मंत्री ने गुरु साहिब के त्याग को नमन करते हुए कहा कि धर्म और मानवता की रक्षा के लिए दिया गया उनका बलिदान अद्वितीय है। उन्होंने कहा, “हजारों सालों तक गुरु तेग बहादुर का उपकार हमारा भारत भूल नहीं सकता। उन्होंने उस समय बलिदान दिया जब क्रूर शासकों द्वारा जबरन धर्म परिवर्तन कराया जा रहा था।”

इतिहास के पन्नों से: क्यों कहा जाता है ‘हिंद की चादर’? अमित शाह का यह बयान इतिहास के उस काले अध्याय की याद दिलाता है जब मुगल बादशाह औरंगजेब के शासन में कश्मीरी पंडितों और हिंदुओं पर अत्याचार हो रहे थे। उन्हें जबरन इस्लाम कबूलने पर मजबूर किया जा रहा था। तब कश्मीरी पंडितों का एक दल गुरु तेग बहादुर जी की शरण में गया था। गुरु साहिब ने तिलक और जनेऊ (हिन्दू धर्म के प्रतीक) की रक्षा के लिए अपना शीश कटा दिया, लेकिन धर्म नहीं झुकने दिया। इसी कारण उन्हें सम्मान से “हिंद की चादर” (भारत की ढाल) कहा जाता है।

राष्ट्रवाद और एकता का संदेश अमित शाह के इस बयान को सामाजिक समरसता और राष्ट्र की एकता के संदेश के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि सिख गुरुओं का इतिहास केवल एक समुदाय का नहीं, बल्कि पूरे भारतवर्ष के स्वाभिमान का इतिहास है। जिस निडरता से गुरु तेग बहादुर जी ने अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई, वह आज भी हर भारतीय के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

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