सुप्रीम कोर्ट की सरकारों को कड़ी फटकार: ‘सब कुछ मुफ्त मिलेगा तो लोग काम क्यों करेंगे?’

नई दिल्ली | देश की सर्वोच्च अदालत ने ‘फ्रीबीज कल्चर’ (मुफ्त की योजनाओं) पर अब तक की सबसे तीखी टिप्पणी की है। गुरुवार को एक सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि अगर सरकारें सुबह से शाम तक मुफ्त खाना, गैस और बिजली बांटती रहेंगी, तो नागरिकों में काम करने की आदत खत्म हो जाएगी। कोर्ट ने जोर देकर कहा कि सरकारों का ध्यान मुफ्त सुविधाएं देने के बजाय रोजगार के अवसर पैदा करने पर होना चाहिए।

CJI सूर्यकांत की बेंच के 3 बड़े सवाल

जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने सुनवाई के दौरान राजनीति और अर्थशास्त्र के बीच संतुलन पर सवाल उठाए:

  1. आत्मसम्मान बनाम मुफ्तखोरी: कोर्ट ने कहा, “आपको रोजगार के रास्ते बनाने चाहिए ताकि लोग कमा सकें और अपना आत्मसम्मान बनाए रखें। जब सब कुछ मुफ्त मिलेगा, तो क्या हम ‘परजीवियों’ की जमात खड़ी करना चाहते हैं?”
  2. चुनाव और तुष्टीकरण: बेंच ने पूछा कि आखिर चुनाव के आसपास ही ऐसी योजनाओं का ऐलान क्यों होता है? सक्षम और अक्षम लोगों के बीच फर्क किए बिना सबको मुफ्त बिजली देना क्या केवल तुष्टीकरण की नीति नहीं है?
  3. विकास में रुकावट: कोर्ट ने चेतावनी दी कि अधिकांश राज्य पहले से ही राजस्व घाटे में हैं। ऐसे में विकास को नजरअंदाज कर मुफ्त की घोषणाएं करना देश की प्रगति को रोक देगा।

क्या है पूरा मामला?

यह टिप्पणी तमिलनाडु पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड की याचिका पर सुनवाई के दौरान आई। नियम 23 के तहत उपभोक्ताओं की वित्तीय स्थिति देखे बिना सभी को 100 यूनिट मुफ्त बिजली देने का प्रस्ताव था। कोर्ट ने इस पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

पुराने बयानों का हवाला

कोर्ट ने याद दिलाया कि दिसंबर 2024 और फरवरी 2025 में भी मुफ्त राशन बांटने पर सवाल उठाए गए थे। केंद्र ने बताया था कि देश के 81 करोड़ लोग मुफ्त या रियायती राशन पर निर्भर हैं, जिस पर कोर्ट ने पूछा था कि इन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास क्यों नहीं हो रहे।

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