जयपुर | राजस्थान विधानसभा का बजट सत्र इन दिनों भ्रष्टाचार के आरोपों और तीखी नोकझोंक का गवाह बन रहा है। बुधवार को प्रश्नकाल के दौरान जनजातीय क्षेत्रीय विकास (TAD) विभाग के आश्रम छात्रावासों में खाद्य सामग्री खरीद, विशेषकर ‘घी’ की खरीद में भारी अनियमितता का मामला गरमाया रहा। विपक्ष ने इसे सीधे तौर पर ‘घी घोटाला’ करार देते हुए सरकार को कटघरे में खड़ा किया।
क्या है ‘घी घोटाला’ और मुख्य आरोप?
कांग्रेस विधायक अर्जुन सिंह बामनिया और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सदन में बिलों का हवाला देते हुए इस कथित घोटाले का पर्दाफाश किया। विपक्ष के मुख्य आरोप निम्नलिखित हैं:
- दरों में भारी अंतर: आरोप लगाया गया कि एक ही विभाग के विभिन्न छात्रावासों के लिए घी अलग-अलग दरों पर खरीदा गया।
- सल्लापाट (बांसवाड़ा): ₹800 प्रति लीटर
- खेड़ा वलीपाड़ा: ₹550 प्रति लीटर
- सुहागपुरा: ₹539 प्रति लीटर
- रघुनाथपुरा: ₹408 प्रति लीटर
- टेंडर प्रक्रिया का उल्लंघन: नियमानुसार ₹50,000 से अधिक की खरीद टेंडर के जरिए होनी चाहिए, लेकिन वार्डनों को सीधे खरीद के अधिकार देकर नियमों को ताक पर रखा गया।
- भ्रष्टाचार की आशंका: विपक्ष का तर्क है कि जब सरस घी की सरकारी दर लगभग ₹551 है, तो ₹800 में खरीद भ्रष्टाचार को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।
मंत्री का बचाव और स्पीकर के कड़े निर्देश
टीएडी मंत्री बाबूलाल खराड़ी ने सफाई देते हुए कहा कि सहकारी उपभोक्ता भंडारों द्वारा राशन देने में असमर्थता जताने के बाद, बच्चों को समय पर भोजन उपलब्ध कराने के लिए स्थानीय स्तर पर खुली बाजार से खरीद की गई। हालांकि, मंत्री दरों में इस बड़े अंतर का संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए।
विपक्ष के भारी हंगामे को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) वासुदेव देवनानी ने हस्तक्षेप किया और मंत्री को पूरे मामले की गहन जांच कराने तथा दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अनियमितता पाए जाने पर भुगतान नहीं किया जाएगा।
