(Expose Now ब्यूरो, जयपुर/नागौर)
राजस्थान के नागौर जिले के किसानों के लिए एक बड़ी और सुखद खबर सामने आ रही है। रेगिस्तान की मिट्टी में उगने वाला ‘हरा सोना’ यानी “नागौरी पान मेथी” अब दुनिया भर में अपनी विशिष्ट पहचान दर्ज कराने के बेहद करीब है। ‘Expose Now’ की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, अपनी विशिष्ट सुगंध और स्वाद के लिए दुनिया भर की रसोइयों की पहली पसंद बनी “नागौरी पान मेथी” को अब आधिकारिक रूप से अपनी भौगोलिक पहचान (Geographical Indication – GI Tag) मिलने की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।

चेन्नई में बड़ी प्रगति: 5 फरवरी को विशेषज्ञों ने परखी गुणवत्ता
भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत आने वाले ‘जीआई रजिस्ट्री विभाग’ ने इस दिशा में बड़ी तेजी दिखाई है। नागौरी पान मेथी के आवेदन की प्रारंभिक जांच (Scrutiny) पूरी कर ली गई है।
- अहम बैठक: जीआई रजिस्ट्री, चेन्नई ने इसकी विशिष्टताओं और गुणवत्ता का वैज्ञानिक मूल्यांकन करने के लिए 5 फरवरी 2026 को एक परामर्शदात्री समूह (Consultative Group Meeting – CGM) की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की।
- उद्देश्य: इस बैठक का मुख्य उद्देश्य ‘माल के भौगोलिक उपदर्शन (रजिस्ट्रीकरण और संरक्षण) नियम, 2002’ के नियम 33 के तहत इस उत्पाद की उन खास विशेषताओं की जांच करना था, जो इसे दुनिया के अन्य क्षेत्रों में पैदा होने वाली मेथी से अलग और श्रेष्ठ बनाती हैं।
सांसद हनुमान बेनीवाल का मिशन ‘नागौर की पहचान’ लाया रंग

इस सफलता के पीछे नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल की लंबी और निरंतर पैरवी को बड़ी वजह माना जा रहा है। बेनीवाल ने संसद के पटल से लेकर मंत्रालय के गलियारों तक किसानों की आवाज को मजबूती से उठाया।
- संसदीय प्रयास: बेनीवाल ने सदन में नागौरी पान मेथी के विशिष्ट गुणों का पक्ष रखते हुए सरकार को इस प्रक्रिया को प्राथमिकता देने पर मजबूर किया।
- प्रशासनिक समन्वय: अधिकारियों के साथ लगातार समन्वय कर आवेदन में आ रही तकनीकी बाधाओं को दूर करवाया। बेनीवाल की इस जीत से नागौर के किसानों को अब बिचौलियों से मुक्ति और फसल का दोगुना दाम मिलना तय माना जा रहा है।
अब आगे क्या? (What Next in the Process)
विशेषज्ञ समिति द्वारा मूल्यांकन पूरा होने के बाद, इस मामले को जीआई अधिनियम 1999 के प्रावधानों के तहत आगे बढ़ाया जाएगा:
- जर्नल में प्रकाशन: यदि समिति संतुष्ट होती है, तो नागौरी पान मेथी के दावे को जीआई पत्रिका (Journal) में प्रकाशित किया जाएगा।
- आपत्ति आमंत्रण: प्रकाशन के बाद 4 महीने का समय दिया जाता है ताकि देश-विदेश का कोई अन्य पक्ष इस पर आपत्ति दर्ज करा सके।
- अंतिम पंजीकरण: यदि कोई आपत्ति नहीं आती है, तो नागौर की इस ‘हरी पत्तियों’ को आधिकारिक जीआई प्रमाण पत्र (GI Certificate) जारी कर दिया जाएगा।
क्या बदल जाएगा नागौर के किसानों के लिए?
जीआई टैग मिलते ही नागौरी पान मेथी एक ‘अंतरराष्ट्रीय ब्रांड’ बन जाएगी। इससे किसानों की तकदीर बदलना तय है:
- ब्रांड प्रोटेक्शन: अब कोई भी दूसरी जगह की मेथी ‘नागौरी’ के नाम से नहीं बिक सकेगी। इससे नकली उत्पादों पर रोक लगेगी।
- सीधा निर्यात: किसान अब सीधे खाड़ी देशों, यूरोप और अमेरिका में अपनी फसल भेज सकेंगे, जहाँ इसकी भारी मांग है।
- प्रीमियम दाम: वैश्विक बाजारों में जीआई टैग वाले उत्पादों की कीमत सामान्य से अधिक होती है। इससे किसानों को उनकी मेहनत का पूरा फल मिलेगा।
- आर्थिक क्रांति: नागौर के ग्रामीण क्षेत्रों में मेथी प्रोसेसिंग यूनिट्स लगेंगी, जिससे हजारों युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलेगा।
ऐतिहासिक उपलब्धि की ओर नागौर
गौरतलब है कि हाल ही में नागौर के ही “नागौरी अश्वगंधा” को भी जीआई टैग मिल चुका है। यदि अब पान मेथी को भी यह दर्जा मिलता है, तो यह नागौर जिले की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि होगी।
