केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान को लेकर एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। जारी की गई नई गाइडलाइन के अनुसार, अब देश के सभी स्कूलों और सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रगान (जन गण मन) से ठीक पहले ‘वंदे मातरम्’ गाना अनिवार्य होगा। खास बात यह है कि अब इसके केवल शुरुआती दो नहीं, बल्कि सभी 6 अंतरे गाने होंगे।
तय हुआ समय और क्रम गृह मंत्रालय द्वारा 28 जनवरी के आदेश के तहत जारी दिशा-निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि जब भी किसी कार्यक्रम में राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान दोनों का गायन या वादन होगा, तो पहले ‘वंदे मातरम्’ गाया जाएगा।
- समय सीमा: राष्ट्रगीत के सभी 6 अंतरे गाने में कुल 3 मिनट 10 सेकंड का समय लगेगा। जबकि राष्ट्रगान की अवधि 52 सेकंड तय है।
- नियम: गायन के दौरान सभी को ‘सावधान’ की मुद्रा में खड़ा रहना अनिवार्य होगा। जरूरत पड़ने पर गीत को प्रिंट करके लोगों में बांटा जा सकता है ताकि वे सही उच्चारण के साथ गा सकें।
क्या सजा का है प्रावधान? गाइडलाइन में स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई व्यक्ति इसे नहीं गाता है, तो फिलहाल इसके लिए किसी दंड या कानूनी कार्यवाही का प्रावधान नहीं किया गया है।
- छूट: किसी फिल्म या डॉक्यूमेंट्री के बीच में इसे बजाना अनिवार्य नहीं होगा, क्योंकि इससे प्रस्तुति के प्रवाह में बाधा आ सकती है।
इतिहास के पन्नों से: 1870 में हुई थी रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 1870 के दशक में ‘वंदे मातरम्’ की रचना की थी। 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा ने इसे ‘राष्ट्रगीत’ का दर्जा दिया था। देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कहा था कि इस गीत को राष्ट्रगान के समान ही सम्मान दिया जाएगा। यह गीत 1905 के बंगाल विभाजन के दौरान ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ प्रतिरोध का प्रतीक बना था।
स्कूलों के लिए निर्देश सभी सरकारी स्कूलों में दिन की शुरुआत सामूहिक गायन से होगी। स्कूलों को यह सुनिश्चित करना होगा कि छात्रों में इसके प्रति सम्मान की भावना विकसित हो।
