बोर्ड परीक्षाओं के बीच ‘उत्सव’ का आदेश, असमंजस में शिक्षक और छात्र, जानें क्या है पूरा विवाद
जयपुर: राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के निर्देशों पर जारी फरवरी 2026 के शिविरा पंचांग ने प्रदेश के लाखों बोर्ड परीक्षार्थियों और शिक्षकों के लिए नई मुसीबत खड़ी कर दी है। मामला 28 फरवरी को आयोजित होने वाले विशेष उत्सवों और उसी दिन होने वाली बोर्ड परीक्षाओं के टकराव का है।
क्या है पूरा मामला?
शिक्षा विभाग द्वारा जारी कैलेंडर (शिविरा पंचांग) के अनुसार, 28 फरवरी को प्रदेश के सभी स्कूलों में ‘राष्ट्रीय विज्ञान दिवस’ और ‘महाराणा प्रताप राज्यारोहण दिवस’ धूमधाम से मनाने के निर्देश दिए गए हैं।
दूसरी ओर, इसी दिन राजस्थान बोर्ड (RBSE) की महत्वपूर्ण परीक्षाएं भी निर्धारित हैं:
- 10वीं बोर्ड: संस्कृत का पेपर।
- 12वीं बोर्ड: अर्थशास्त्र, कृषि जीव विज्ञान और जीव विज्ञान की परीक्षा।
- 5वीं बोर्ड: पर्यावरण अध्ययन का पेपर।
शिक्षकों और छात्रों की उलझन
शिक्षकों का कहना है कि बोर्ड परीक्षा के दौरान स्कूलों में बैठक व्यवस्था पूरी तरह बदली हुई होती है। परीक्षा खत्म होते ही छात्र अगली तैयारी के लिए घर लौट जाते हैं। ऐसे में उन्हें रोककर किसी उत्सव या कार्यक्रम में शामिल करना व्यावहारिक रूप से असंभव है।
शिक्षक संगठनों का पक्ष:
- परीक्षा से एक घंटा पहले और एक घंटा बाद तक स्टाफ परीक्षा ड्यूटी और पेपर जमा करने के कार्यों में व्यस्त रहता है।
- यदि सरकार के आदेश की पालना नहीं की जाती, तो विभागीय कार्रवाई का डर है।
- संगठनों ने संकेत दिया है कि इस दिन आयोजन केवल औपचारिक (Formal) ही रखा जाएगा ताकि परीक्षा कार्य प्रभावित न हो।
सरकार का तर्क
हालांकि, शिक्षा विभाग का मानना है कि महापुरुषों और विज्ञान से जुड़ी जानकारी छात्रों तक पहुँचना आवश्यक है। लेकिन परीक्षा के तनाव के बीच इन निर्देशों ने स्कूलों में कशमकश की स्थिति पैदा कर दी है।
