जयपुर/फरीदाबाद, हरियाणा के फरीदाबाद में आयोजित विश्व प्रसिद्ध सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय क्राफ्ट मेले में इस बार राजस्थान अपनी कला और संस्कृति की अमिट छाप छोड़ रहा है। मेले के इतिहास में यह पहली बार है जब राजस्थान आधिकारिक रूप से इसमें सहभागी बना है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की पहल पर प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और हस्तशिल्प को वैश्विक मंच प्रदान किया गया है।
‘राजस्थान चौक’ पर उमड़ रहे पर्यटक
राजस्थान लघु उद्योग निगम (राजसिको) द्वारा मेले में विशेष रूप से ‘राजस्थान चौक’ तैयार किया गया है। यह चौक देश-विदेश से आने वाले सैलानियों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यहाँ राजस्थान की पारंपरिक वास्तुकला, रंग-बिरंगी लोक संस्कृति और कलात्मकता का जीवंत प्रदर्शन किया जा रहा है।
20 स्टॉल्स पर हस्तशिल्प और ODOP का जलवा
राजसिको के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक शिखर अग्रवाल ने बताया कि 15 फरवरी तक चलने वाले इस मेले में राजस्थान के उत्पादों के लिए 20 विशेष स्टॉल्स लगाई गई हैं। इन स्टॉल्स की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:
- विविध उत्पाद: महिला एवं बाल विकास विभाग, खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड और ‘राजस्थली’ के उत्कृष्ट हस्तशिल्प उत्पादों का प्रदर्शन।
- ODOP प्रदर्शन: ‘एक जिला एक उत्पाद’ (ODOP) योजना के तहत प्रदेश के विभिन्न जिलों से चयनित विशिष्ट उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुँचाने का प्रयास।
- पारंपरिक कला: राजस्थान के बुनकरों और कारीगरों द्वारा निर्मित खादी एवं अन्य पारंपरिक उत्पादों की प्रदर्शनी।
वैश्विक पहचान की ओर बढ़ता ‘पंच गौरव’
राज्य सरकार स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए ‘पंच गौरव’ जैसे कार्यक्रमों के जरिए कारीगरों को प्रोत्साहित कर रही है। सूरजकुंड मेले में सहभागिता इसी दिशा में एक बड़ा कदम है। श्री अग्रवाल ने विश्वास जताया कि इस आयोजन से राजस्थान के हस्तशिल्प और लोककला को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान और बड़ा बाजार मिलेगा।
