Expose Exclusive: राजस्थान में 300 करोड़ का ‘लैंड स्कैम’, वन विभाग और प्राधिकरण की मिलीभगत से बना अवैध रिसॉर्ट, PMO पहुंची फाइल

By Admin

राजस्थान के जंगलों के बीच नियमों को कुचलकर खड़ा किया गया 300 करोड़ का ‘कंक्रीट का जंगल’। एक ऐसा ‘महाघोटाला’ जिसकी गूंज दिल्ली में PMO की टेबल तक जा पहुंची है। आखिर कैसे अफसरों ने नक्शे पर कर दिया ’50 मीटर’ का सबसे बड़ा खेल? पढ़िए इस एक्सक्लूसिव खुलासे में…

झीलों की नगरी उदयपुर की खूबसूरती पर भू-माफियाओं और भ्रष्ट अधिकारियों के गठजोड़ ने एक बदनुमा दाग लगा दिया है। सज्जनगढ़ अभयारण्य (Sajjangarh Wildlife Sanctuary) के इको-सेंसेटिव ज़ोन (ESZ) को बचाने के तमाम दावों की पोल एक ‘मेगा प्रोजेक्ट’ ने खोलकर रख दी है। ग्राम कालारोही में नियमों को कुचलकर एक विशालकाय रिसॉर्ट खड़ा किया जा रहा है, जिसकी गूंज अब दिल्ली के प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) तक पहुंच गई है। Expose Now के हाथ लगे दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि कैसे वन विभाग और उदयपुर विकास प्राधिकरण (UDA) के अधिकारियों ने कागजों में हेराफेरी कर प्रतिबंधित क्षेत्र में निर्माण की ‘हरी झंडी’ दे दी।

प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) पहुंची शिकायत
प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) पहुंची शिकायत

फर्जीवाड़ा: 1 किलोमीटर के नियम को ‘फीते’ से ऐसे दिया चकमा

1 किलोमीटर के नियम को ‘फीते’ से ऐसे दिया चकमा

इस महाघोटाले की नींव एक बड़े झूठ पर रखी गई है। नियमों के अनुसार, सज्जनगढ़ अभयारण्य के इको-सेंसेटिव ज़ोन की 1 किलोमीटर की परिधि में पक्का व्यावसायिक निर्माण प्रतिबंधित है या बेहद कड़े नियमों के अधीन है । लेकिन ग्राम कालारोही की आराजी संख्या 3347 से 3350, 3333, 1391 और 1399 पर चल रहे निर्माण को वैध ठहराने के लिए अधिकारियों ने नाप-जोख में बड़ा खेल कर दिया ।

एडवोकेट वीरेंद्र सिंह द्वारा PMO को भेजी गई शिकायत में गूगल मैप (Google Map) साक्ष्यों के साथ दावा किया गया है कि यह जमीन प्रतिबंधित 1 किलोमीटर के दायरे के अंदर आती है । लेकिन वन विभाग के अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट में इस रिसॉर्ट की दूरी 1050 मीटर बता दी। यानी मात्र 50 मीटर का हेरफेर करके इसे प्रतिबंधित दायरे से बाहर दिखा दिया गया। इसी झूठी रिपोर्ट के आधार पर इको-सेंसेटिव ज़ोन कमेटी ने पट्टा जारी कर दिया और UDA ने निर्माण स्वीकृति दे दी ।

नियमों का उल्लंघन: जी+2 की आड़ में तान दी 4 मंजिला इमारत

कागजों में जो स्वीकृतियां ली गईं और मौके पर जो निर्माण हो रहा है, उसमें जमीन-आसमान का अंतर है। शिकायत के मुताबिक, नियमानुसार यहाँ जी+2 (Ground + 2) से ज्यादा की अनुमति नहीं मिल सकती थी, लेकिन मौके पर जी+4 (4 मंजिला) पक्का निर्माण धड़ल्ले से जारी है ।

बिल्डर्स ने अधिकारियों की मिलीभगत से अवैध 2 मंजिलों को “अस्थायी ढांचा” (Temporary Structure) बताकर फाइल पास करवा ली, जबकि हकीकत में वहाँ पक्के कमरे बनाए जा रहे हैं। नियमों के मुताबिक, अस्थायी ढांचे में केवल लिफ्ट की गमटी, पानी की टंकी या सोलर पैनल ही आ सकते हैं, लेकिन यहाँ पूरा होटल खड़ा कर दिया गया है ।

कंक्रीट का जंगल: 96 हजार की जगह 4 लाख स्क्वेयर फीट निर्माण

96 हजार की जगह 4 लाख स्क्वेयर फीट निर्माण

इस रिसॉर्ट का आकार ही इसके अवैध होने का सबसे बड़ा सबूत है। इको-सेंसेटिव ज़ोन के नियमों के तहत यहाँ अधिकतम 96,000 स्क्वेयर फीट का निर्माण हो सकता था, लेकिन रिसॉर्ट मालिकों ने नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए लगभग 4,00,000 (चार लाख) स्क्वेयर फीट का निर्माण कर दिया है ।

यही नहीं, ‘ग्राउंड कवरेज’ (Ground Coverage) के नियम को भी तार-तार कर दिया गया। जहाँ कुल जमीन का केवल 20% हिस्सा (52,000 फीट) कवर किया जा सकता था, वहाँ 75% हिस्से (1,50,000 फीट) पर कंक्रीट बिछा दिया गया है । पर्यावरण को ताक पर रखते हुए हरियाली (Greenery) के लिए आरक्षित 80% क्षेत्र को घटाकर मात्र 15% कर दिया गया है ।

UDA की कार्रवाई पर सवाल: छोटी मछलियों पर जाल, मगरमच्छ फरार?

यह मामला इसलिए भी गंभीर हो जाता है क्योंकि हाल ही में (जनवरी 2026) उदयपुर विकास प्राधिकरण (UDA) ने बड़ी, हवाला और मोरवानिया गांवों में अवैध निर्माणों के खिलाफ अभियान चलाकर 17 विला और होटलों को सीज किया है। सवाल यह उठता है कि जब प्रशासन सैटेलाइट इमेज और ड्रोन सर्वे का दावा करता है, तो उन्हें कालारोही का यह 4 लाख स्क्वेयर फीट वाला अवैध ढांचा नजर क्यों नहीं आया? आरोप है कि रिसॉर्ट मालिक अत्यधिक प्रभावशाली हैं, जिसके कारण स्थानीय प्रशासन उन पर हाथ डालने से कतरा रहा है और कार्रवाई केवल छोटे निर्माणों तक सीमित है ।

PMO और ED से शिकायत: मनी लॉन्ड्रिंग की जांच की मांग

मामले की गंभीरता को देखते हुए शिकायतकर्ता ने इसकी शिकायत प्रधानमंत्री (PMO), केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) को भेजी है । शिकायत में आरोप लगाया गया है कि यह केवल अवैध निर्माण का मामला नहीं है, बल्कि इको-सेंसेटिव ज़ोन की बेशकीमती जमीनों को खुर्द-बुर्द करने और काले धन (Black Money) के निवेश का बड़ा ‘सिंडिकेट’ है। मांग की गई है कि जिम्मेवार अधिकारियों और रिसॉर्ट मालिकों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम और IPC की धाराओं में मामला दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए ।

Expose Now इस खबर पर लगातार नजर बनाए हुए है। क्या दिल्ली से आदेश आने के बाद उदयपुर प्रशासन की नींद टूटेगी? क्या इस अवैध ‘महल’ पर बुलडोजर चलेगा? यह आने वाला वक्त बताएगा।

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