जयपुर, मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा और चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर के कड़े रुख के बाद चिकित्सा विभाग ने राजस्थान सरकार स्वास्थ्य योजना (RGHS) में सेंध लगाने वालों के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक शुरू कर दी है। पिछले एक महीने में ऑडिट और विभागीय जांच के बाद अनियमितता बरतने वाले अस्पतालों, फार्मेसी स्टोर्स और डॉक्टरों पर ऐतिहासिक कार्रवाई की गई है।
अस्पतालों और डायग्नोस्टिक सेंटर्स पर एक्शन
प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने बताया कि योजना की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए विभाग ने सख्त कदम उठाए हैं:
- डी-एम्पैनलमेंट: अनियमितताओं के चलते 8 अस्पतालों एवं डायग्नोस्टिक सेंटर्स को योजना की सूची से बाहर (De-empanel) कर दिया गया है।
- TMS ब्लॉक: 2 अस्पतालों का ट्रांजेक्शन मैनेजमेंट सिस्टम (TMS) पूरी तरह ब्लॉक कर भुगतान रोक दिया गया है, जबकि 3 अन्य अस्पतालों का सिस्टम 3 माह के लिए बंद किया गया है।
फार्मेसी स्टोर्स और कैश रिकवरी
परियोजना अधिकारी निधि पटेल के अनुसार, लाभार्थियों के हितों की रक्षा के लिए वित्तीय दंड भी लगाया गया है:
- निलंबन: नियमों के उल्लंघन पर 11 फार्मेसियों को निलंबित किया गया है।
- रिकवरी: जनवरी माह में फार्मेसियों से ₹8 लाख की वसूली की गई है, जबकि ₹23 लाख की रिकवरी के लिए नोटिस जारी किए गए हैं।
- रिफंड: दो मामलों में अस्पतालों द्वारा लाभार्थियों से अवैध रूप से वसूली गई ₹2,82,044 की राशि वापस लौटाई गई।
डॉक्टरों और लाभार्थियों पर भी गिरी गाज
योजना में गलत तरीके से उपचार दिखाने और लाभ लेने के मामलों में व्यक्तिगत उत्तरदायित्व भी तय किया गया है:
- निलंबन की अनुशंसा: अनुचित उपचार के मामले में 2 डॉक्टरों के निलंबन और 5 डॉक्टरों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई हेतु पत्र लिखा गया है।
- आईडी ब्लॉक: एक डॉक्टर की आईडी को 6 माह के लिए ब्लॉक किया गया है, जबकि 12 डॉक्टरों को चेतावनी दी गई है।
- लाभार्थी पर कार्रवाई: गलत तरीके से लाभ लेने वाले एक लाभार्थी के विरुद्ध भी संबंधित विभाग को अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए लिखा गया है।
“RGHS योजना सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए है। इसमें पारदर्शिता और अनुशासन हमारी प्राथमिकता है। किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।” — गायत्री राठौड़, प्रमुख शासन सचिव
