जयपुर, राजस्थान के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में आयोजित राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC) की बैठक में युवाओं और उद्यमियों के हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। मुख्य सचिव ने बैंक अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि स्वरोजगार और उद्यमिता से जुड़े ऋण आवेदनों की स्वीकृति (Sanction) और वितरण (Disbursement) के बीच राशि और समय के अंतर को न्यूनतम करने के लिए विशेष प्रयास किए जाएं।
प्रमुख योजनाओं पर केंद्रित रही बैठक
बैठक के दौरान राज्य और केंद्र सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ लक्षित वर्ग तक प्रभावी ढंग से पहुँचाने पर चर्चा हुई। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
- पीएम विश्वकर्मा योजना और पीएम स्वनिधि।
- पीएमईजीपी (PMEGP) और पीएमएफएमई (PMFME)।
- पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना।
- मुख्यमंत्री नारी शक्ति उद्यम प्रोत्साहन योजना।
- विश्वकर्मा युवा उद्यमी प्रोत्साहन योजना।
- मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना।
विकसित राजस्थान@2047 का लक्ष्य
मुख्य सचिव ने कहा कि ‘विकसित राजस्थान@2047’ के विजन के अनुरूप प्रदेश की क्रेडिट वृद्धि (Credit Growth) को बढ़ाना आवश्यक है। इसके लिए कृषि, एमएसएमई (MSME), महिला उद्यमिता और युवाओं पर केंद्रित ऋण योजनाओं को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं। बैंकों को ऋण मूल्यांकन और दस्तावेजीकरण में आवेदकों की सहायता करने को भी कहा गया है ताकि किसी भी प्रोजेक्ट की लागत देरी के कारण न बढ़े।
बेहतर समन्वय से बढ़ेगी रफ्तार
समिति ने जिला स्तरीय क्रेडिट योजनाओं को सुदृढ़ करने और आरबीआई (RBI), नाबार्ड (NABARD), राज्य सरकार के विभागों तथा बैंकों के बीच बेहतर तालमेल पर जोर दिया। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर लोन का वितरण हो सके, जिससे उद्यमियों को समय पर कार्य शुरू करने में आसानी हो।
