OMR का ‘काला सच’: यूपी की ब्लैकलिस्टेड कंपनी ने राजस्थान में कैसे लीं 10 परीक्षाएं?

जयपुर, राजस्थान में सरकारी भर्तियों की शुचिता पर एक बार फिर बड़ा सवालिया निशान खड़ा हो गया है। स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने प्रयोगशाला सहायक, कृषि पर्यवेक्षक और आंगनवाड़ी महिला सुपरवाइजर भर्ती परीक्षाओं में हुई भारी धांधली का पर्दाफाश करते हुए 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस खुलासे ने साबित कर दिया है कि सिस्टम के भीतर बैठे “दीमकों” ने लाखों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है।

10 लाख में नंबर बढ़ाने की डील

एसओजी की जांच में सामने आया है कि इस संगठित गिरोह ने ओएमआर (OMR) शीट में अंकों की हेराफेरी कर अयोग्य अभ्यर्थियों को पास कराने का जिम्मा लिया था। इसके बदले प्रत्येक उम्मीदवार से 10 लाख रुपये की मोटी रकम वसूली गई। यह पूरा खेल तकनीकी स्तर पर इतनी चतुराई से खेला गया कि सामान्य तौर पर इसे पकड़ना मुश्किल था।

सिस्टम के ‘भीतर’ से रचा गया षड्यंत्र

इस घोटाले का सबसे शर्मनाक पहलू यह है कि इसका मास्टरमाइंड कर्मचारी चयन बोर्ड का तत्कालीन टेक्निकल हेड संजय माथुर निकला। माथुर ने प्रोग्रामर प्रदीप गंगवाल के साथ मिलकर तकनीकी सिस्टम में ऐसी सेंध लगाई, जिससे ओएमआर शीट के परिणाम मनचाहे ढंग से बदले जा सकें। इसमें ओएमआर स्कैनिंग करने वाली कंपनी ‘राघव लिमिटेड’ के कर्मचारी विनोद कुमार और शादान खान ने भी सक्रिय भूमिका निभाई।

नाम बदलकर राजस्थान में घुसी ब्लैकलिस्टेड कंपनी

जांच में एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। ओएमआर स्कैनिंग का टेंडर हासिल करने वाली राघव लिमिटेड कंपनी वास्तव में उत्तर प्रदेश की एक्सिस लिमिटेड है, जिसे 2018 में परीक्षाओं में गड़बड़ी के चलते ब्लैकलिस्ट किया गया था।

  • फर्जीवाड़ा: कंपनी के मालिक रामप्रवेश यादव (जो अब जेल में है) ने नाम बदलकर राजस्थान में फर्जी दस्तावेजों के जरिए टेंडर हासिल किए।
  • व्यापकता: इस कंपनी ने 2018 के बाद से राजस्थान की लगभग 10 बड़ी परीक्षाओं की ओएमआर स्कैनिंग की जिम्मेदारी संभाली थी। इन सभी परीक्षाओं के परिणाम अब संदेह के घेरे में हैं।

बड़े अधिकारी और तत्कालीन अध्यक्ष रडार पर

एसओजी की सुई अब कर्मचारी चयन बोर्ड के तत्कालीन अध्यक्ष बीएल जाटावत की ओर भी घूम रही है। 2018 की भर्तियों में हुई री-स्कैनिंग और अनियमितताओं के बावजूद इस कंपनी को काम मिलना कई सवाल खड़े करता है। एसओजी का दावा है कि यह पिछली सरकार के कार्यकाल का सबसे संगठित भर्ती घोटाला है, जिसमें सत्ता और सिस्टम के तार गहराई से जुड़े हैं।

अभ्यर्थी हुए अंडरग्राउंड

एसओजी की इस कार्रवाई के बाद वे अभ्यर्थी जो पैसे देकर भर्ती सूची में शामिल हुए थे, वे अब गिरफ्तारी के डर से फरार हो गए हैं। एसओजी की टीमें अब उन सभी लाभार्थियों की पहचान करने में जुटी हैं जिन्होंने सिस्टम को रिश्वत देकर अपनी जगह बनाई थी।

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