जयपुर, राजस्थान सरकार की उपमुख्यमंत्री तथा महिला एवं बाल विकास मंत्री दिया कुमारी के विजन को धरातल पर उतारने के लिए सोमवार को ‘प्रेरणा अभियान 2.0’ का शुभारंभ किया गया। निदेशालय समेकित बाल विकास सेवाएं (ICDS) द्वारा संचालित यह अभियान मातृ एवं शिशु पोषण तथा बच्चों के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक बड़ा कदम है।
क्या है प्रेरणा अभियान 2.0?
आईसीडीएस निदेशक वासुदेव मालावत ने बताया कि ‘प्रेरणा’ का अर्थ है— प्रेग्नेन्सी रजिस्ट्रेशन एण्ड अर्ली चाइल्डहुड एजुकेशन एण्ड न्यूट्रिशन अवेयरनेस (Pregnancy Registration and Early Childhood Education and Nutrition Awareness)।
यह अभियान 19 जनवरी से 19 फरवरी 2026 तक पूरे प्रदेश में चलाया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य आईसीडीएस सेवाओं से वंचित पात्र लाभार्थियों को मुख्यधारा से जोड़ना है।
अभियान के मुख्य लक्ष्य और लाभार्थी
अभियान के तहत निम्नलिखित वर्गों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा:
- गर्भवती महिलाएं: विशेषकर शुरुआती तीन माह वाली महिलाएं।
- धात्री महिलाएं: स्तनपान कराने वाली माताएं।
- बच्चे: 0 से 6 वर्ष तक के सभी बच्चे।
- किशोरी बालिकाएं: आकांक्षी जिलों (Aspirational Districts) की किशोरियां।
इन योजनाओं का मिलेगा सीधा लाभ
पंजीकृत लाभार्थियों को आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं से जोड़ा जाएगा, जिनमें शामिल हैं:
- प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY 2.0)
- मुख्यमंत्री मातृत्व पोषण योजना
- मुख्यमंत्री अमृत आहार योजना
- पूरक पोषाहार कार्यक्रम
डिजिटलाइजेशन पर जोर: APAAR और ABHA ID
निदेशक ने निर्देश दिए हैं कि सभी लाभार्थियों का पंजीकरण डिजिटल मोड में होगा। इसके लिए शत-प्रतिशत सर्वे और पोषण ट्रैकर (Poshan Tracker) पर प्रविष्टि सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही, लाभार्थियों की स्वास्थ्य और शिक्षा पहचान के लिए ABHA ID और APAAR ID का निर्माण भी किया जाएगा।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए विशेष दिशा-निर्देश
अभियान की सफलता के लिए मैदानी स्तर पर काम करने वाली कार्यकर्ताओं को 5 प्रमुख कार्यों की जिम्मेदारी सौंपी गई है:
- पूर्ण सर्वे: वंचित बच्चों और गर्भवती महिलाओं का शत-प्रतिशत पंजीकरण।
- कुपोषण प्रबंधन: ‘अम्मा कार्यक्रम’ के तहत SAM (गंभीर कुपोषित) और MAM (मध्यम कुपोषित) बच्चों की पहचान करना।
- वृद्धि निगरानी: हर बच्चे का सही वजन और लंबाई नापना और रजिस्टर में दर्ज करना।
- प्रथम 1000 दिन: जीवन के शुरुआती 1000 दिनों के महत्व को समझाने के लिए गृह भ्रमण (Home Visit) कर जागरूकता फैलाना।
- शाला पूर्व शिक्षा (ECCE): 3 से 6 वर्ष के बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना।
निष्कर्ष: निदेशक वासुदेव मालावत ने विभागीय अधिकारियों को प्रेरित करते हुए कहा कि ‘प्रेरणा 2.0’ के माध्यम से हम एक स्वस्थ और सुपोषित भविष्य की नींव रख रहे हैं। इसमें कोताही बरतने वाले केंद्रों पर निगरानी रखी जाएगी और उत्कृष्ट कार्य करने वालों को प्रोत्साहित किया जाएगा।
