AI एक एक्सटेंशन है, एक्सप्रेशन नहीं: जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में बोले प्रसून जोशी

जयपुर: “सबसे सुंदर गीत अभी लिखा ही नहीं गया है…” जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (JLF) 2026 के मंच से जब दिग्गज गीतकार और कवि प्रसून जोशी ने ये शब्द कहे, तो पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। राजस्थान पत्रिका द्वारा आयोजित सत्र ‘Imagine the New Horizons of Creativity’ में जोशी ने एआई (AI) और मानवीय रचनात्मकता के बीच की महीन रेखा को स्पष्ट किया।

AI के पास बीता हुआ कल है, इंसान के पास आने वाला कल

प्रसून जोशी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि इसे ‘आर्टिफिशियल’ कहना ही तकनीकी रूप से अधूरा है, क्योंकि यह पूरी तरह मानवीय डेटा पर टिका है। उन्होंने तर्क दिया कि AI केवल उस डेटा और एल्गोरिद्म पर काम करता है जो पहले से मौजूद है।

“AI के पास वह सब है जो कहा जा चुका है, जबकि इंसान के पास वह है जो अभी कहा जाना बाकी है। रचनात्मकता की जड़ें भावनाओं और ‘अव्यक्त को व्यक्त’ करने की मानवीय क्षमता में होती हैं।”

दादी थीं संघर्ष की असली रोल मॉडल

अपनी व्यक्तिगत यात्रा को साझा करते हुए जोशी ने बताया कि उनकी असली प्रेरणा उनकी दादी थीं। उत्तराखंड के एक छोटे से गांव से आने वाली उनकी दादी ने कम उम्र में पति को खोने के बाद हार नहीं मानी। 18-19 साल की उम्र में पढ़ना-लिखना सीखा और अंततः एक स्कूल प्रिंसिपल के रूप में सेवानिवृत्त हुईं। उन्होंने कहा कि उनके जीवन में अनुशासन और अभिव्यक्ति का संतुलन उनके माता-पिता की देन है।

‘HMT’ से हिंदी के गौरव तक का सफर

भाषा के मुद्दे पर जोशी ने पुराने दिनों को याद किया जब हिंदी बोलने वालों को ‘HMT’ (Hindi Medium Type) कहकर कमतर आंका जाता था। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज भाषा हीनता का कारण नहीं बल्कि आत्मविश्वास का माध्यम है। उन्होंने ‘जुगाड़’ शब्द के इस्तेमाल पर भी आपत्ति जताई और कहा कि हमें भारतीय नवाचार को ‘इनोवेशन’ कहना चाहिए, जुगाड़ कहकर उसकी गरिमा कम नहीं करनी चाहिए।

हर व्यक्ति को है एक ‘जामवंत’ की तलाश

सत्र के समापन पर उन्होंने रामायण के जामवंत और हनुमान प्रसंग का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में हर इंसान को एक ऐसे ‘जामवंत’ की जरूरत है जो उसे उसकी सोई हुई शक्तियों और आंतरिक क्षमता का अहसास करा सके।

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