जयपुर: राजधानी जयपुर में आधुनिक और सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था उपलब्ध कराने के दावों के बीच जयपुर सिटी बस सेवा की बदहाल स्थिति यात्रियों की परेशानी बढ़ा रही है। शहर में बसों की लाइव लोकेशन बताने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद यात्रियों को जयपुर बस ऐप पर बसों की सटीक जानकारी नहीं मिल पा रही है। नई इलेक्ट्रिक बसें भी कथित तौर पर जीपीएस ट्रैकिंग से बाहर हैं। ऐसे में यात्रियों को यह पता लगाने के लिए भटकना पड़ता है कि उनकी बस कहां है और गंतव्य तक पहुंचने के लिए कितनी देर इंतजार करना होगा।

बस स्टैंड पर बसें खड़ी, फिर भी यात्रियों को इंतजार
जयपुर में सार्वजनिक परिवहन की इस अव्यवस्था का असर रोजाना सफर करने वाले हजारों यात्रियों पर पड़ रहा है। कई बार बसों की लाइव लोकेशन ऐप पर अपडेट नहीं होती। यात्रियों को बस के आने का समय पता नहीं चलता और उन्हें लंबे समय तक बस स्टैंड पर खड़े होकर इंतजार करना पड़ता है। स्थिति तब और परेशान करने वाली हो जाती है, जब बस स्टैंड पर तीन से चार बसें खड़ी होने के बावजूद वे अपने गंतव्य के लिए रवाना नहीं होतीं। यात्री कभी मोबाइल ऐप देखते हैं तो कभी बस चालक या परिचालक को तलाशते हैं, लेकिन उन्हें बस के संचालन को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाती।
टोंक रोड पर यात्रियों की परेशानी ज्यादा
जयपुर के टोंक रोड पर सार्वजनिक बसों से सफर करने वाले यात्रियों को इस समस्या का सामना करना पड़ रहा है। इनमें कोचिंग और कॉलेज जाने वाले विद्यार्थी, नौकरीपेशा लोग, परकोटे में काम करने वाले कर्मचारी और स्टेडियम में खेल प्रशिक्षण के लिए जाने वाले खिलाड़ी शामिल हैं। इन यात्रियों के लिए समय पर बस मिलना बेहद जरूरी है, लेकिन अनिश्चित संचालन और लाइव लोकेशन की अनुपलब्धता उनकी दिनचर्या को प्रभावित कर रही है।
यात्रियों को कई बार बस के भरोसे घर से एक से डेढ़ घंटे पहले निकलना पड़ता है, ताकि समय पर अपने गंतव्य तक पहुंच सकें। इसके बावजूद बस समय पर मिलेगी या नहीं, इसकी कोई निश्चितता नहीं रहती। जिन यात्रियों के पास समय की कमी होती है, वे मजबूरी में ऑटो या निजी बसों का सहारा लेते हैं। इससे उन्हें अधिक किराया देना पड़ता है और भीड़भाड़ का सामना भी करना पड़ता है।
अग्रवाल फार्म बस स्टैंड पर भी समय-सारणी पर सवाल
अग्रवाल फार्म बस स्टैंड पर भी बसों के संचालन को लेकर यात्रियों की शिकायतें सामने आ रही हैं। यात्रियों के मुताबिक, कई बार सुबह बसें खड़ी रहती हैं, लेकिन उनमें से कोई 7 बजे से पहले रवाना नहीं होती और शाम को बसें खड़ी रहने के बावजूद भी रवाना नहीं होती, वहां पर कोई पूछताछ काउंटर भी नहीं है जबकि बस का समय 9:30 PM तक है। ऐसे में बस उपलब्ध होने के बावजूद यात्रियों को दूसरी परिवहन सुविधाओं की तलाश करनी पड़ती है।

यात्रियों का कहना है कि जयपुर बस ऐप पर बसों के संचालन का समय सुबह 5:30 बजे से रात 9:30 बजे तक बताया जाता है, जबकि जमीनी स्तर पर बसों का संचालन इस समय-सारणी के अनुरूप नहीं दिखाई देता। उनके अनुसार, सुबह पहली बस कई बार छह बजे के बाद चलती है, जबकि शाम को बसें नहीं मिलने की शिकायतें हैं। यदि निर्धारित समय पर बसों का संचालन नहीं हो रहा है, तो इसकी नियमित निगरानी और जवाबदेही तय करना जरूरी है।
चार-पांच दिन ऐप बंद रहा, लेकिन नहीं हुआ सुधार
कुछ दिन पहले जयपुर बस ऐप चार से पांच दिन तक बंद रहने और बसों में ऑफलाइन टिकट दिए जाने की स्थिति भी सामने आई थी। यात्रियों को उम्मीद थी कि शायद ऐप के रखरखाव या तकनीकी सुधार का काम किया जा रहा है, जिससे आगे चलकर उन्हें राहत मिलेगी। हालांकि, ऐप दोबारा उपलब्ध होने के बाद भी लाइव लोकेशन और बसों के समय पर संचालन से जुड़ी समस्याएं दूर नहीं होने की शिकायतें हैं।
ऐसे में सवाल उठता है कि यदि डिजिटल ट्रैकिंग व्यवस्था यात्रियों को बसों की सही स्थिति ही नहीं बता पा रही है, तो इस पर खर्च किए गए बजट का वास्तविक लाभ आमजन तक क्यों नहीं पहुंच रहा? सार्वजनिक परिवहन को सुविधाजनक बनाने के लिए केवल ऐप तैयार करना पर्याप्त नहीं है। बसों में जीपीएस उपकरणों का सही ढंग से काम करना, उनका नियमित डेटा अपडेट होना और निर्धारित समय-सारणी के अनुसार बसों का संचालन भी उतना ही जरूरी है।
जयपुर में तकनीकी व्यवस्था पर सवाल
दूसरे शहरों में बसों की लाइव लोकेशन आसानी से ट्रैक होने की तुलना में जयपुर की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। यदि अन्य शहरों में ऐसी तकनीक यात्रियों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है, तो राजधानी में इसका प्रभावी संचालन सुनिश्चित करने की जरूरत और बढ़ जाती है। नई इलेक्ट्रिक बसों की लोकेशन ऐप पर नहीं दिखने की शिकायतें भी इस व्यवस्था की तकनीकी खामियों की ओर इशारा करती हैं।
हालांकि, इन समस्याओं के पीछे तकनीकी खराबी, जीपीएस उपकरणों की स्थिति, डेटा अपडेट में देरी या संचालन संबंधी कमियां जिम्मेदार हैं, इसकी आधिकारिक जांच और विभागीय जवाब जरूरी है।
ड्राइवर-कंडक्टर की लापरवाही या सिस्टम की नाकामी?

बसों के निर्धारित समय पर रवाना नहीं होने की शिकायतों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि समस्या कर्मचारियों की ड्यूटी व्यवस्था में है या परिवहन प्रणाली की निगरानी में। यदि बसें लंबे समय तक स्टैंड पर खड़ी रहती हैं, तो उनके संचालन में देरी की वजह क्या है? क्या कर्मचारियों की ड्यूटी, निर्धारित समय और बसों के प्रस्थान की नियमित निगरानी हो रही है? इन सवालों का जवाब संबंधित अधिकारियों को देना चाहिए।
साथ ही, बसों के संचालन की वास्तविक समय-सारणी सार्वजनिक करने, ऐप पर लाइव लोकेशन नियमित अपडेट करने और नई इलेक्ट्रिक बसों को जीपीएस ट्रैकिंग से जोड़ने की आवश्यकता है। यात्रियों को बस स्टैंड पर अनिश्चित समय तक इंतजार करने के बजाय विश्वसनीय डिजिटल जानकारी मिलनी चाहिए।
सवालों के घेरे में स्मार्ट ट्रांसपोर्ट के दावे
जयपुर में बस सेवा आमजन के लिए सस्ता और सुलभ परिवहन साधन है। विद्यार्थी, कर्मचारी और रोजाना काम पर जाने वाले लोग इसी व्यवस्था पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में बसों की अनिश्चित उपलब्धता और ऐप पर सही जानकारी नहीं मिलने से उन्हें समय और पैसे, दोनों का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
सरकार और संबंधित विभाग सार्वजनिक सुविधाओं को बेहतर बनाने के दावे करते हैं, लेकिन इन सुविधाओं का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब तकनीक और जमीनी व्यवस्था के बीच तालमेल हो। करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद यदि यात्री बस की लोकेशन और उसके रवाना होने का समय तक नहीं जान पा रहे हैं, तो इस निवेश की उपयोगिता की समीक्षा जरूरी है।
अब सवाल यह है कि जयपुर की बस सेवा को वास्तव में स्मार्ट बनाने के लिए जिम्मेदार विभाग कब ठोस कदम उठाएगा? क्या बसों की लाइव ट्रैकिंग, समय-सारणी और कर्मचारियों की ड्यूटी व्यवस्था की समीक्षा होगी, या राजधानी के यात्रियों को इसी तरह बस स्टैंड पर खड़े होकर बस का इंतजार करना पड़ेगा