EXPOSE NOW SPECIAL टोंक सहकारी भंडार घोटाला: तत्कालीन GM करूणेश कुमार सोनी सेवा से बर्खास्त, IAS समित शर्मा का बड़ा एक्शन

-भजनलाल सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कार्रवाई, 4.80 करोड़ रुपये के गबन और फर्जी दस्तावेज तैयार करने के आरोप प्रमाणित

जयपुर। राजस्थान में भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ का दावा करने वाली भजनलाल सरकार इस समय पूरे एक्शन मोड में है। सहकारिता विभाग में सालों से जड़े जमाए बैठे भ्रष्टाचारियों की अब खैर नहीं है। इसका सबसे ताजा और बड़ा शिकार बना है—टोंक जिला सहकारी उपभोक्ता होलसेल भंडार का तत्कालीन महाप्रबंधक (GM) करूणेश कुमार सोनी। शासन सचिव एवं रजिस्ट्रार डॉ. समित शर्मा ने कड़ा रुख अपनाते हुए इस महाभ्रष्ट अधिकारी को सहकारी सेवा से बर्खास्त (Dismissed from Service) कर दिया है। करूणेश कुमार सोनी पर कोई छोटा-मोटा नहीं, बल्कि जनता की गाढ़ी कमाई के 4.80 करोड़ रुपये के गबन का संगीन आरोप है, जो जांच में पूरी तरह प्रमाणित हो चुका है।

Expose Now का खुलासा, कैसे हुआ ‘महाघोटाला’:-

यह पूरा काला चिट्ठा वर्ष 2012-13 से 2015-16 के बीच का है। जब टोंक जिला सहकारी उपभोक्ता भंडार में जनता और किसानों की अमानत राशि को लूटा जा रहा था। जांच रिपोर्ट में जो खुलासे हुए हैं, वो होश उड़ाने वाले हैं:

-फर्जी दस्तावेजों का खेल: सरकारी रिकॉर्ड और बैंक खातों में हेरफेर करने के लिए धड़ल्ले से फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए।

-अमानत राशि का अपहरण: विभिन्न व्यक्तियों और संस्थाओं से करोड़ों रुपये की अमानतें (Deposits) तो ली गईं, लेकिन उन्हें भंडार की मुख्य लेखा पुस्तिकाओं (Ledger) में दर्ज ही नहीं किया गया। इस राशि को साजिश के तहत गायब कर दिया गया।

-कैश का अवैध आहरण: बैंक खातों से नियमों को ताक पर रखकर धड़ाधड़ नकद राशि निकाली गई और अनाधिकृत (Unauthorized) व्यक्तियों को भुगतान कर दिया गया।

-संस्था को करोड़ों की चपत: इस पूरे खेल से टोंक सहकारी भंडार को वित्तीय रूप से कंगाल कर दिया गया और सरकार की छवि को भारी नुकसान पहुंचाया गया।

सीसीए नियम 16 के तहत ‘फास्ट ट्रैक’ एक्शन:-

“राजस्थान सिविल सर्विसेज (क्लासिफिकेशन, कंट्रोल एंड अपील) नियम 1958 के नियम 16 के तहत करूणेश कुमार सोनी को नौकरी से निष्कासित कर दिया गया है।” बता दें कि साल 2015 में जब यह महाघोटाला सामने आया था, तब मामले में एफआईआर (FIR) दर्ज की गई थी। इसके बाद पुलिस ने गहनता से जांच कर कोर्ट में चार्जशीट भी दाखिल की थी। विभागीय जांच के दौरान जब बैंक रिकॉर्ड्स, बयानों और दस्तावेजों को खंगाला गया, तो तत्कालीन GM के खिलाफ चारों प्रमुख आरोप पूरी तरह सच साबित हुए। सहकारिता विभाग के शासन सचिव डॉ. समित शर्मा ने इस एक्शन के जरिए पूरे महकमे को एक कड़ा संदेश दे दिया है।

“सहकारी संस्थाएं आम जनता और किसानों के भरोसे की नींव हैं। इसमें किसी भी तरह का भ्रष्टाचार या सरकारी धन का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भविष्य में भी ऐसे मामलों में कठोरतम कार्रवाई होगी। अब नियमित ऑडिट, औचक निरीक्षण और निगरानी तंत्र को और मजबूत किया जा रहा है।” –डॉ. समित शर्मा

ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now

Share This Article
Leave a Comment