उदयपुर ACB की बड़ी कार्रवाई: मांडवा थानाधिकारी और कांस्टेबल 8 लाख की रिश्वत लेते गिरफ्तार, NDPS केस में फंसाने की दी थी धमकी

विशेष संवाददाता राजस्थान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की उदयपुर इंटेलिजेंस यूनिट ने बुधवार को एक बड़ी कार्रवाई करते हुए मांडवा पुलिस थाने के थानाधिकारी (SHO) और एक कांस्टेबल को भारी रिश्वत राशि के साथ गिरफ्तार किया है। भ्रष्टाचार के खिलाफ इस बड़ी स्ट्राइक ने महकमे में हड़कंप मचा दिया है।

क्या है पूरा मामला?

ACB को दी गई शिकायत के अनुसार, परिवादी मोहनलाल और उसके भाई कामाराम ने बताया कि 20 मार्च 2026 को मांडवा पुलिस ने उनके क्षेत्र में डोडा-चूरा पकड़ने की कार्रवाई की थी। इसके बाद थानाधिकारी निर्मल कुमार खत्री और बीट कांस्टेबल भल्लाराम पटेल परिवादी के घर पहुंचे और पूरे घर की तलाशी ली। आरोपियों ने धमकी दी कि वे परिवादी, उसके भाई, पिता और चचेरे भाई को इस केस में मुल्जिम बनाकर जेल भेज देंगे।

20 लाख की मांग और 8 लाख में सौदा

आरोपियों ने केस से नाम निकालने की एवज में प्रति व्यक्ति 5 लाख रुपये के हिसाब से कुल 20 लाख रुपये की रिश्वत मांगी। परिवादी द्वारा काफी गिड़गिड़ाने और असमर्थता जताने पर सौदा 8 लाख रुपये में तय हुआ। परिवादी ने आरोप लगाया कि पुलिस पहले ही उनके घर से चांदी के गहने, ₹15,000 नकद और उनकी टीवीएस अपाचे बाइक (RJ 27 AX 9743) भी ले जा चुकी थी।

ACB का जाल और डमी नोटों का प्रयोग

एसीबी के पुलिस निरीक्षक डॉ. सोनू शेखावत ने शिकायत का सत्यापन करवाया, जिसमें रिश्वत की मांग की पुष्टि हुई। बुधवार को जाल बिछाया गया। परिवादी गरीब होने के कारण केवल 1 लाख रुपये का ही इंतजाम कर पाया था, इसलिए ACB ने 1 लाख असली नोटों के साथ 7 लाख रुपये के ‘चिल्ड्रन बैंक’ के डमी नोट मिलाए।

ऐसे दबोचे गए आरोपी

  • कांस्टेबल की गिरफ्तारी: कांस्टेबल भल्लाराम जब परिवादी के घर रिश्वत लेने पहुंचा और बाइक के बैग में पैसे रखवाए, तभी ACB टीम ने उसे दबोच लिया।
  • वॉट्सऐप कॉल से फंसा SHO: गिरफ्तारी के बाद कांस्टेबल ने ACB के सामने स्वीकार किया कि वह थानाधिकारी के कहने पर पैसे ले रहा था। इसके बाद कांस्टेबल से SHO को वॉट्सऐप कॉल करवाया गया, जिसमें रिश्वत की सहमति मिलने पर ACB ने थानाधिकारी निर्मल खत्री को उनके सरकारी क्वार्टर से गिरफ्तार कर लिया।

कानूनी धाराएं और जांच

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7 और भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 61(2) के तहत मामला दर्ज किया है। मामले की आगे की जांच चित्तौड़गढ़ एसीबी के उप पुलिस अधीक्षक हरिश्चंद्र सिंह को सौंपी गई है।

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