RPSC के बाद अब कर्मचारी चयन बोर्ड में बड़ा धमाका: SOG ने उजागर किया OMR शीट घोटाला, तकनीकी प्रमुख सहित 5 गिरफ्तार

जयपुर, राजस्थान में सरकारी नौकरियों की शुचिता पर एक और गहरा दाग लगा है। RPSC के बाद अब राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSSB) की भर्तियों में भी भीषण धांधली का खुलासा हुआ है। राजस्थान स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने सनसनीखेज पर्दाफाश करते हुए बताया कि कैसे OMR शीट में नंबर बढ़ाकर अयोग्य अभ्यर्थियों को सरकारी नौकरी रेवड़ियों की तरह बांटी गई। इस मामले में एसओजी ने बोर्ड के तकनीकी प्रमुख और प्रोग्रामर सहित 5 लोगों को गिरफ्तार किया है।

SOG का खुलासा: 35 से अधिक अभ्यर्थियों के बढ़ाए गए अंक

एसओजी मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में एडीजी विशाल बंसल ने बताया कि वर्ष 2018 की तीन प्रमुख भर्तियों में यह फर्जीवाड़ा किया गया। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने गोपनीय डेटा तक पहुंच बनाकर अभ्यर्थियों के अंक मैनुअली बदल दिए।

  • उदाहरण: आरोपी तकनीकी प्रमुख संजय माथुर ने अपनी परिचित अभ्यर्थी पूनम माथुर के महज 63 अंकों को बढ़ाकर 182 अंक कर दिया ताकि उसका चयन सुनिश्चित हो सके।

इन तीन बड़ी भर्ती परीक्षाओं में हुई धांधली

SOG की जांच के अनुसार, निम्नलिखित परीक्षाओं के परिणाम तैयार करते समय OMR स्कैनिंग में हेराफेरी की गई:

  1. सुपरवाइजर (महिला अधिकारिता) सीधी भर्ती-2018
  2. प्रयोगशाला सहायक (Lab Assistant) भर्ती-2018
  3. कृषि पर्यवेक्षक (Agriculture Supervisor) भर्ती-2018

इन परीक्षाओं में करीब 9.40 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए थे, जिनके भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया।

गिरफ्तार किए गए मुख्य आरोपी

एसओजी ने इस संगठित गिरोह के प्रमुख मोहरों को दबोच लिया है:

  • संजय माथुर: तत्कालीन तकनीकी प्रमुख, कर्मचारी चयन बोर्ड।
  • प्रवीण गंगवाल: प्रोग्रामर, कर्मचारी चयन बोर्ड।
  • शादान खान व विनोद कुमार गौड़: आउटसोर्स फर्म (राघव लिमिटेड, दिल्ली) के कर्मचारी।
  • पूनम माथुर: लाभार्थी अभ्यर्थी।

कैसे अंजाम दिया गया घोटाला?

जांच में सामने आया कि वर्ष 2019 में जब OMR शीट की स्कैनिंग और डेटा प्रोसेसिंग का कार्य दिल्ली की फर्म को दिया गया था, तब बोर्ड के अधिकारियों ने मिलीभगत कर सॉफ्टवेयर और डेटा शीट में छेड़छाड़ की। अयोग्य अभ्यर्थियों से मोटी रकम लेकर उनकी ओएमआर शीट के अंक बढ़ाए गए, जिससे मेरिट लिस्ट पूरी तरह बदल गई।

अब रडार पर फर्जी नौकरी पाने वाले अभ्यर्थी

एडीजी विशाल बंसल ने संकेत दिए हैं कि यह केवल ‘टिप ऑफ द आइसबर्ग’ है। एसओजी अब उन सभी अभ्यर्थियों की सूची तैयार कर रही है जिनके अंक संदिग्ध रूप से बढ़ाए गए हैं। आने वाले दिनों में कई और गिरफ्तारियां संभव हैं और फर्जी तरीके से नौकरी पाने वालों को बर्खास्तगी के साथ जेल की हवा खानी पड़ सकती है।

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