EXPOSE NOW MEGA INVESTIGATION: सरकारी तिजोरी पर ‘राइजिंग’ हवन? 102 करोड़ स्वाहा, फिर भी निवेश का अता-पता नहीं!

इवेंट मैनेजमेंट के नाम पर 'लूट' का खेल: CII और FICCI पर लुटाए 66 करोड़, 'चाय-नाश्ते' (विविध खर्च) में ही उड़ गए 18 करोड़!

By Admin

(Expose Now स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम)

जयपुर। राजस्थान के औद्योगिक विकास और रोजगार के सुनहरे सपने दिखाकर राज्य सरकार द्वारा आयोजित ‘राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट-2024’ (RRGIS 24) अब सवालों के घेरे में है। सरकार ने इस आयोजन को प्रदेश की तकदीर बदलने वाला बताया था, लेकिन Expose Now की एक्सक्लूसिव पड़ताल में जो दस्तावेज हाथ लगे हैं, वे एक अलग ही कहानी बयां कर रहे हैं।

राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट-2024

ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टमेंट प्रमोशन (BIP) के आधिकारिक और गोपनीय दस्तावेजों के मुताबिक, इस समिट की चमक-धमक बनाए रखने के लिए जनता की गाढ़ी कमाई के 102 करोड़ रुपये से अधिक (₹1,02,93,06,609) पानी की तरह बहा दिए गए। 22 दिसंबर 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार, यह पैसा निवेश लाने के लिए कम और ‘इवेंट कंपनियों’ की जेबें भरने के लिए ज्यादा खर्च किया गया है।


खर्चों का ‘लेखा जोखा’: पार्टनरशिप के नाम पर करोड़ों का खेल

दस्तावेजों की गहराई से जांच करने पर पता चलता है कि सरकार ने खुद काम करने के बजाय निजी संस्थाओं और ‘पार्टनर्स’ पर सरकारी खजाना लुटाने में ज्यादा दिलचस्पी दिखाई। यह पूरा खेल ‘कोलाब्रेशन’ (Collaboration) के नाम पर खेला गया:

1. CII पर 51 करोड़ की मेहरबानी: क्या सरकार खुद कुछ नहीं कर सकती?

सबसे बड़ा सवाल ‘समिट इंडस्ट्री पार्टनर’ यानी CII (Confederation of Indian Industry) को किए गए भुगतान पर है। अकेले इस संस्था को ₹51,06,32,536 (इक्यावन करोड़ छह लाख बत्तीस हजार) का भुगतान किया गया है।

  • Expose Now का सवाल: क्या राजस्थान सरकार का अपना उद्योग विभाग और प्रशासनिक अमला इतना अक्षम है कि एक इवेंट के लिए किसी बाहरी एजेंसी को 51 करोड़ रुपये देने पड़े? क्या बिना इतनी भारी रकम चुकाए उद्योगपतियों को आमंत्रित नहीं किया जा सकता था?

2. FICCI को 15 करोड़: एक और पार्टनर, एक और चेक

सिर्फ CII ही नहीं, एक अन्य ‘इंडस्ट्री पार्टनर’ FICCI को भी ₹15,12,37,716 (पंद्रह करोड़ बारह लाख) थमा दिए गए। यानी, केवल दो संस्थाओं (CII और FICCI) को मिलाकर ही सरकार ने करीब 66 करोड़ रुपये की रेवड़ियां बांट दीं।

3. प्रचार का मायाजाल: ब्रांडिंग पर फूंके 25 करोड़

निवेश धरातल पर उतरे या न उतरे, लेकिन होर्डिंग्स और विज्ञापनों में कमी नहीं होनी चाहिए। मीडिया और प्रमोशन (Media & Promotion) के नाम पर ₹25,62,15,432 खर्च किए गए। इसमें सोशल मीडिया कैंपेन, आउटडोर पब्लिसिटी और इवेंट की ब्रांडिंग शामिल है। जानकारों का कहना है कि यह खर्च निवेश लाने के लिए कम और नेताओं की व्यक्तिगत ब्रांडिंग (Image Building) के लिए ज्यादा किया गया।

4. मिसलेनियस (विविध) खर्च का रहस्य: 18 करोड़ का ‘अदृश्य’ खर्चा

इस पूरी इन्वेस्टिगेशन का सबसे चौंकाने वाला और संदिग्ध पहलू है ‘Misc. Exp.’ (विविध खर्च)। इस मद में ₹18,31,85,596 (अठारह करोड़ इकतीस लाख) डाले गए हैं।

  • बड़ा सवाल: यह 18 करोड़ रुपये आखिर कहां गए? क्या यह पैसा अधिकारियों और मेहमानों के हवाई जहाज के टिकट, फाइव स्टार होटलों के बिल, लजीज खाने और महंगे गिफ्ट्स पर उड़ाया गया? इसका कोई ठोस विवरण (Breakdown) जनता के सामने नहीं रखा गया है।

इन्वेस्टिगेशन टेबल: कहाँ कितना लुटाया गया पैसा?

Expose Now आपके सामने ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टमेंट प्रमोशन (BIP) के खर्चों का वह कच्चा चिट्ठा रख रहा है, जिसे फाइलों में दबाया गया था:

मद (Account Name)खर्च की गई राशि (INR)टिप्पणी (Remark)
समिट इंडस्ट्री पार्टनर (CII)₹51,06,32,536सबसे बड़ा भुगतान, कुल खर्च का लगभग 50%
मीडिया और प्रमोशन (Media/Promo)₹25,62,15,432विज्ञापन और ब्रांडिंग का खर्चा
विविध खर्च (Misc Exp)₹18,31,85,596संदिग्ध खर्चा, कोई स्पष्ट विवरण नहीं
इंडस्ट्रीज पार्टनर (FICCI)₹15,12,37,716दूसरे पार्टनर को भुगतान
नॉलेज पार्टनर (PWC)₹3,39,15,298केवल सलाह और रिपोर्ट बनाने का खर्च
कुल योग (Total)₹1,02,93,06,609(एक सौ दो करोड़ तिरानवे लाख…)

(नोट: यह आंकड़ा 22 दिसंबर 2025 तक का है।)


Expose Now के तीखे सवाल: जवाब दे सरकार

इस महा-खुलासे के बाद Expose Now सरकार और जिम्मेदार अधिकारियों से सीधे सवाल पूछता है:

  1. आउटसोर्सिंग का मोह क्यों?
    • करोड़ों रुपये निजी कंसल्टेंट्स (PWC) और पीआर एजेंसियों (APCO) को क्यों दिए गए? क्या राजस्थान सरकार के ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टमेंट प्रमोशन (BIP) और RIICO के पास ऐसे सक्षम अधिकारी नहीं हैं जो यह काम कर सकें?
  2. ROI (Return on Investment) क्या है?
    • 102 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद प्रदेश में अब तक कितनी फैक्ट्रियां लगीं? कितने लोगों को रोजगार मिला? या फिर यह समिट भी पिछली सरकारों की तरह सिर्फ एक ‘फोटो-अप’ (Photo-op) कार्यक्रम बनकर रह गया?
  3. विविध खर्च की ऑडिट कब होगी?
    • ₹18 करोड़ का ‘मिसलेनियस’ खर्च आखिर किसकी जेब में गया? जनता को यह जानने का हक है कि उनके टैक्स के पैसे से किसके लिए ‘हवन’ किया गया।

निष्कर्ष: जनता की गाढ़ी कमाई स्वाहा

दस्तावेजों से यह साफ है कि सरकार ‘निवेश लाने’ से ज्यादा ‘निवेश दिखाने’ के आयोजन (Event Management) में व्यस्त रही है। 102 करोड़ रुपये की यह बर्बादी उस समय हुई है जब प्रदेश कर्ज के बोझ तले दबा है। Expose Now की टीम इस मामले की तह तक जाएगी और जल्द ही यह खुलासा भी करेगी कि इन ‘महंगे पार्टनर्स’ ने पैसे लेने के बदले राजस्थान को असल में क्या दिया?

Share This Article
Leave a Comment
error: Content is protected !!