बांसवाड़ा, देशभर में घरों को रोशन करने वाली महत्वाकांक्षी ‘पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में अपनी चमक खोती नजर आ रही है। जिले में रूफ टॉप सोलर पैनल लगाने की रफ्तार इतनी धीमी है कि डिस्कॉम द्वारा तय किए गए लक्ष्यों का महज 11.47 प्रतिशत ही पूरा हो पाया है। यह आंकड़ा पूरे डिस्कॉम के औसत (23%) से भी आधा है।
📊 आंकड़ों की जुबानी: लक्ष्य बनाम उपलब्धि
बांसवाड़ा वृत में सोलर प्लांट लगाने की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है:
- वार्षिक लक्ष्य: 6,000 से अधिक प्लांट
- अब तक स्थापना: मात्र 730 प्लांट
- स्वीकृत आवेदन: 1,000 से ज्यादा (जो अभी लंबित हैं)
- औसत रफ्तार: करीब 100-125 प्लांट प्रति माह
🔍 पिछड़ने के 3 बड़े कारण
1. शहरी क्षेत्रों में ‘सब्सिडी लिंक’ का अभाव: शहरी उपभोक्ताओं में योजना को लेकर उत्साह तो है, लेकिन राज्य सरकार द्वारा दी जाने वाली अतिरिक्त सब्सिडी (₹17,000) के लिए निजी फर्मों के साथ पोर्टल का लिंक उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। इस तकनीकी खामी के कारण लोग निवेश करने से कतरा रहे हैं।
2. ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी: उपखंड स्तर पर अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा योजना के प्रचार-प्रसार में ढिलाई बरती जा रही है। गांवों में लोगों को योजना के दीर्घकालिक लाभों और आवेदन प्रक्रिया की सही जानकारी नहीं मिल पा रही है।
3. वेंडर्स और एजेंटों का गणित: जिले में केवल 5 रजिस्टर्ड वेंडर हैं। हालांकि, अन्य जिलों के एक दर्जन से ज्यादा वेंडर एजेंटों के माध्यम से सक्रिय हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर तकनीकी सहायता और भरोसे की कमी के कारण इंस्टालेशन में देरी हो रही है।
💰 सब्सिडी का गणित: क्यों है यह फायदे का सौदा?
योजना के तहत एक आम उपभोक्ता को दोहरी सब्सिडी का लाभ मिलता है:
- केंद्र सरकार: क्षमता के अनुसार ₹30,000 से ₹78,000 तक की सब्सिडी।
- राज्य सरकार: राजस्थान सरकार द्वारा अतिरिक्त ₹17,000 की सब्सिडी।
- कुल लाभ: ₹95,000 तक की कुल छूट मिलने पर 1.1 kW का प्लांट लगभग शून्य लागत पर लगाया जा सकता है।
⚡ आगे की राह
डिस्कॉम अधिकारियों का मानना है कि यदि राज्य सरकार की सब्सिडी वाली तकनीकी बाधा दूर हो जाए, तो जिले में प्लांट लगाने का आंकड़ा दोगुना हो सकता है। फिलहाल, 1000 से अधिक आवेदन पाइपलाइन में हैं, जिनके जल्द निस्तारण की उम्मीद है।
