राजस्थान विद्युत श्रमिक महासंघ ने ऊर्जा सचिव के समक्ष उठाई कर्मचारियों की आवाज, निजीकरण पर जताई चिंता

रिकवरी सुधार कर निजीकरण टालने पर जोर; पदोन्नति, भत्तों और नए पद सृजन पर प्रशासन का सकारात्मक रुख

जयपुर।

राजस्थान के बिजली निगमों में कर्मचारियों की लंबित मांगों, निजीकरण के बढ़ते खतरे और कार्य स्थितियों को लेकर राजस्थान विद्युत श्रमिक महासंघ (BMS) ने एक बार फिर अपनी आवाज बुलंद की है। सोमवार को महासंघ के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेशाध्यक्ष लखन सिंह गुर्जर के नेतृत्व में ऊर्जा विभाग की शासन सचिव एवं जयपुर डिस्कॉम की CMD आरती डोगरा से शिष्टाचार भेंट कर विस्तृत चर्चा की। बैठक में कर्मचारियों के हितों, निगमों की वित्तीय स्थिति और भविष्य की चुनौतियों पर गंभीरता से विचार-विमर्श किया गया।

निजीकरण पर चिंता, रिकवरी सुधारने की अपील

बैठक के दौरान शासन सचिव ने विशेष रूप से जोधपुर डिस्कॉम के बढ़ते घाटे और वार्षिक राजस्व वसूली में गिरावट पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि कर्मचारी और अधिकारी मिलकर कार्य करें और रिकवरी में सुधार लाएं, तो निजीकरण जैसे विकल्पों से बचा जा सकता है।
महासंघ ने भी इस दिशा में पूर्ण सहयोग का भरोसा देते हुए कहा कि कर्मचारियों के हितों की रक्षा के साथ-साथ निगमों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में संगठन सक्रिय भूमिका निभाएगा।

टाइम बाउंड पदोन्नति पर जल्द निर्णय के संकेत

लंबे समय से अटकी टाइम बाउंड पदोन्नति की मांग पर प्रशासन का रुख सकारात्मक नजर आया। शासन सचिव ने बताया कि इस मुद्दे पर वित्त विभाग के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है और जल्द ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
इस आश्वासन से कर्मचारियों में उम्मीद जगी है कि वर्षों से लंबित पदोन्नति का रास्ता अब साफ हो सकता है।

नए पद सृजन और भत्तों पर सहमति

बैठक में कर्मचारियों से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा हुई:

  • संस्थापन अधिकारी (मंत्रालयिक) पद: इस नए पद के सृजन के लिए आगामी ‘कोऑर्डिनेशन कमेटी’ की बैठक में प्रस्ताव रखा जाएगा।
  • हार्ड ड्यूटी अलाउंस: कर्मचारियों को कठिन परिस्थितियों में काम करने के लिए यह भत्ता जल्द लागू किए जाने पर सहमति बनी।
  • मासिक वर्दी धुलाई भत्ता: इस मांग पर भी प्रशासन ने सकारात्मक संकेत दिए हैं और शीघ्र निर्णय की संभावना जताई है।

महासंघ ने जताई संतुष्टि

प्रदेश महामंत्री सतीश राठौड़ ने बैठक को सकारात्मक और सौहार्दपूर्ण बताते हुए कहा,
“हम कर्मचारियों के हितों के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। प्रशासन के साथ हुई यह वार्ता रचनात्मक रही है और हमें उम्मीद है कि जल्द ही इसके ठोस परिणाम सामने आएंगे।”

उच्चाधिकारियों से भी की विस्तृत चर्चा

प्रतिनिधिमंडल ने इस दौरान ऊर्जा विभाग और बिजली निगमों के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से भी मुलाकात की। इनमें ऊर्जा सलाहकार नवीन अरोड़ा, उत्पादन निगम के MD देवेंद्र श्रंगी, जयपुर डिस्कॉम के CPO एचएस भाटिया और प्रसारण निगम की सचिव अलका मीणा शामिल रहे।
इन अधिकारियों के साथ विभिन्न विभागीय समस्याओं, कार्य परिस्थितियों और समाधान के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई।

प्रतिनिधिमंडल में कई प्रमुख पदाधिकारी रहे शामिल

बैठक में महासंघ के कई वरिष्ठ और सक्रिय पदाधिकारी मौजूद रहे। इनमें प्रदेश महामंत्री सतीश राठौड़, सुशील सैन, विशाल गुप्ता, महेंद्र कुमार, शैलेश सिंह शेखावत, अजय सक्सेना, सरस्वती जी, रणजीत सिंह, लवजीत पंवार, जनक गहलोत, नरेंद्र सिंह और आईदान सिंह इंदा सहित अन्य सदस्य शामिल थे।

यह बैठक न केवल कर्मचारियों की समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाने का माध्यम बनी, बल्कि बिजली निगमों के भविष्य को लेकर भी महत्वपूर्ण संकेत दे गई। यदि प्रशासन और कर्मचारी मिलकर काम करते हैं, तो न केवल निजीकरण के खतरे को टाला जा सकता है, बल्कि राज्य की बिजली व्यवस्था को भी अधिक मजबूत और प्रभावी बनाया जा सकता है।

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