SOG की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: विदेशी MBBS डिग्रीधारी अब ‘फर्जीवाड़े’ से बन रहे थे डॉक्टर; 73 मुन्नाभाई रडार पर

By Admin

जयपुर– राजस्थान की चिकित्सा व्यवस्था की नब्ज टटोलने वाले ही जब ‘फर्जी’ निकलें, तो मरीज की जान भगवान भरोसे ही है। सफेद कोट के पीछे चल रहे एक ऐसे काले कारोबार का पर्दाफाश हुआ है, जिसने पूरे मेडिकल सिस्टम की नींद उड़ा दी है। विदेश से लाखों रुपए खर्च कर एमबीबीएस (MBBS) की डिग्री तो ले आए, लेकिन जब भारत में प्रैक्टिस करने के लिए जरूरी ‘स्क्रीनिंग टेस्ट’ (FMGE) पास नहीं हुआ, तो शॉर्टकट का रास्ता चुना गया। यह रास्ता उन्हें अस्पताल नहीं, बल्कि सीधे जेल ले जा रहा है। राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने एक ऐसे संगठित ‘डॉक्टर माफिया’ को बेनकाब किया है, जो असफल छात्रों को फर्जी सर्टिफिकेट के दम पर अस्पतालों में इंटर्नशिप दिलवा रहा था। इस खुलासे के बाद से चिकित्सा जगत में हड़कंप मचा हुआ है।

विदेश भाग रहा था मास्टरमाइंड, दिल्ली से दबोचा

एसओजी के अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस विशाल बंसल के अनुसार, इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड भानाराम माली उर्फ भानु (30 वर्ष, निवासी चूरू) लंबे समय से पुलिस को चकमा दे रहा था। गिरफ्तारी से बचने के लिए वह थाईलैंड, श्रीलंका, दुबई, कजाकिस्तान और नेपाल जैसे देशों में ठिकाने बदल रहा था। एसओजी को इनपुट मिला कि आरोपी 2 फरवरी 2026 को दिल्ली पहुंचने वाला है। सूचना मिलते ही जाल बिछाया गया और 3 फरवरी को उसे दिल्ली एयरपोर्ट से दबोच लिया गया। फिलहाल वह 7 फरवरी तक पुलिस रिमांड पर है।

असफल छात्रों को ऐसे बनाते थे ‘डॉक्टर’

जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी भानाराम खुद एक विदेश से पढ़ा हुआ डॉक्टर है। उसने अपने नेटवर्क का इस्तेमाल कर उन छात्रों को टारगेट किया जो विदेश से MBBS करके तो आए, लेकिन भारत में प्रैक्टिस के लिए अनिवार्य FMGE (Foreign Medical Graduate Examination) पास नहीं कर पाए। यह गिरोह उनसे मोटी रकम वसूलता और बदले में ‘कूटरचित’ (फर्जी) FMGE पास सर्टिफिकेट तैयार कर देता। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर राजस्थान मेडिकल काउंसिल (RMC) में इंटर्नशिप के लिए आवेदन कराया जाता था।

73 ‘मुन्नाभाई’ रडार पर, नया केस दर्ज

एसओजी की जांच में एक चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है। करीब 73 ऐसे अभ्यर्थी चिन्हित किए गए हैं, जिन्होंने FMGE परीक्षा पास नहीं की, फिर भी फर्जी सर्टिफिकेट के दम पर इंटर्नशिप हासिल करने की कोशिश की। इस गंभीर खुलासे के बाद एसओजी ने 4 फरवरी 2026 को नया प्रकरण (संख्या 8/2026) दर्ज कर लिया है। अब इन सभी की डिग्रियों और सर्टिफिकेट्स की बारीकी से जांच की जा रही है।

खुद भी बना फर्जी डॉक्टर, फिर दूसरों को फंसाया

इस रैकेट में शामिल दूसरे आरोपी इंद्राज सिंह गुर्जर (27 वर्ष, निवासी करौली) को भी गिरफ्तार किया गया है। इंद्राज की कहानी और भी हैरान करने वाली है। उसने खुद दिसंबर 2022 का फर्जी FMGE सर्टिफिकेट बनवाया और उसके आधार पर राजीव गांधी मेडिकल कॉलेज, अलवर से अपनी इंटर्नशिप भी पूरी कर ली। खुद डॉक्टर बनने के बाद वह दलाल बन गया और अन्य अभ्यर्थियों को भी फर्जी सर्टिफिकेट दिलाने में मदद करने लगा।

मेडिकल कॉलेज और अधिकारी भी संदेह के घेरे में

एसओजी अब जांच का दायरा बढ़ा रही है। उन मेडिकल कॉलेजों और अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है, जिन्होंने बिना उचित सत्यापन (Verification) के इन फर्जी दस्तावेजों को स्वीकार किया और इंटर्नशिप की अनुमति दी। यह सवाल उठ रहा है कि आखिर इतनी बड़ी चूक सिस्टम में कैसे हो रही थी?

स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा खतरा

यह मामला सिर्फ धोखाधड़ी का नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य से जुड़ा है। अगर समय रहते इस रैकेट का भंडाफोड़ नहीं होता, तो बिना योग्यता वाले ये ‘फर्जी डॉक्टर’ अस्पतालों में मरीजों का इलाज कर रहे होते, जो किसी बड़े खतरे से कम नहीं था। एसओजी का कहना है कि आने वाले दिनों में और भी बड़ी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

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