राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने शनिवार (4 अप्रैल 2026) को प्रदेश की सबसे चर्चित और बड़ी पुलिस भर्तियों में से एक, सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती-2021 को पूरी तरह रद्द करने का ऐतिहासिक आदेश सुनाया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एस.पी. शर्मा की खंडपीठ ने एकलपीठ द्वारा 28 अगस्त 2025 को दिए गए फैसले को सही ठहराते हुए राज्य सरकार और चयनित अभ्यर्थियों की अपीलों को सिरे से खारिज कर दिया।
कोर्ट ने अपने कड़े फैसले में माना कि परीक्षा के दौरान बड़े पैमाने पर पेपरलीक, धांधली और अनियमितताएं हुई थीं, जिससे संपूर्ण चयन प्रक्रिया की शुचिता और पारदर्शिता पूरी तरह नष्ट हो गई थी।
कानूनी लड़ाई का पूरा घटनाक्रम: कब क्या हुआ?
यह मामला पिछले कई महीनों से कानूनी दांव-पेच और अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा था। यहाँ देखें इस केस की पूरी टाइमलाइन:
| तिथि | घटनाक्रम |
| 28 अगस्त 2025 | हाईकोर्ट की एकलपीठ ने अनियमितताओं के आधार पर पूरी भर्ती रद्द करने का आदेश दिया। |
| 8 सितंबर 2025 | खंडपीठ ने अंतरिम आदेश जारी कर एकलपीठ के फैसले पर रोक लगाई, जिससे चयनितों को अस्थाई राहत मिली। |
| 24 सितंबर 2025 | मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँचा। शीर्ष अदालत ने ‘यथास्थिति’ (Status Quo) का आदेश देते हुए फील्ड पोस्टिंग पर रोक लगा दी। |
| 19 जनवरी 2026 | खंडपीठ ने सभी पक्षों की लंबी दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रखा। |
| 4 अप्रैल 2026 | अंतिम फैसला: खंडपीठ ने भर्ती को पूरी तरह रद्द करने का आदेश सुनाया। |
कोर्ट की तल्ख टिप्पणी: “धांधली के आगे प्रतिभा की हार नहीं हो सकती”
एक्टिंग सीजे की खंडपीठ ने आदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया कि जब परीक्षा की निष्पक्षता पर ही गंभीर प्रश्नचिह्न लग जाएं और जांच में पेपरलीक के पुख्ता प्रमाण मौजूद हों, तो पूरी प्रक्रिया को निरस्त करना ही एकमात्र संवैधानिक विकल्प है। कोर्ट ने कहा कि एक ‘दूषित’ चयन प्रक्रिया के माध्यम से योग्य और ईमानदार अभ्यर्थियों के अधिकारों का हनन नहीं किया जा सकता।
अभ्यर्थियों के लिए बड़ी राहत: आयु सीमा में मिलेगी छूट
भले ही इस फैसले से चयनित अभ्यर्थियों को झटका लगा है, लेकिन कोर्ट ने उन युवाओं के लिए एक सुरक्षा कवच भी तैयार किया है जो इस लंबी कानूनी लड़ाई के कारण ‘ओवर-एज’ हो गए हैं। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि:
- जब भी यह परीक्षा दोबारा आयोजित की जाएगी, भर्ती प्रक्रिया का हिस्सा रहे सभी अभ्यर्थियों को आयु सीमा (Age Limit) में विशेष छूट दी जाएगी।
- इससे उन हजारों युवाओं को दोबारा अपनी योग्यता साबित करने का मौका मिलेगा जो सिस्टम की खामियों के कारण अधर में लटके थे।
सरकार और RPSC के लिए बड़ी चुनौती
इस फैसले के बाद अब राज्य सरकार और राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के कंधों पर दोहरी जिम्मेदारी है:
- पदों की रिक्तता: 800 से अधिक पदों की यह भर्ती रद्द होने से पुलिस विभाग में अधिकारियों की कमी की समस्या बरकरार रहेगी।
- पारदर्शिता की परीक्षा: अब सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि आगामी परीक्षा ‘पेपरलीक प्रूफ’ हो ताकि प्रदेश के युवाओं का भर्ती प्रणाली पर भरोसा दोबारा बहाल हो सके।
सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रिया
कोर्ट के इस आदेश के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। जहाँ एक तरफ वे अभ्यर्थी हैं जो सालों की ट्रेनिंग और मेहनत के बाद नौकरी गंवा चुके हैं और न्याय की गुहार लगा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बेरोजगारों का एक बड़ा वर्ग इस फैसले को ‘सत्य की जीत’ बता रहा है और माफियाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहा है।
