राजस्थान में 900 करोड़ का RTE बकाया: नए दाखिले रोकने की चेतावनी, गहलोत ने घेरा ‘सुशासन’ का दावा

जयपुर: राजस्थान में नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए ‘शिक्षा का अधिकार’ (RTE) के तहत प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही सियासत गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदेश की भजनलाल सरकार पर ‘असंवेदनशीलता’ का आरोप लगाते हुए सीधा हमला बोला है। गहलोत का कहना है कि सरकार की संवादहीनता और बकाया भुगतान न होने के कारण गरीब बच्चों की शिक्षा का आधार स्तंभ यानी RTE अब बदहाली की कगार पर है।

₹900 करोड़ का बकाया: स्कूलों की दो टूक

पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने दावा किया कि निजी स्कूलों का कक्षा 1 से 8 तक की फीस का लगभग 900 करोड़ रुपये का पुनर्भरण (Reimbursement) सरकार की ओर से बकाया है। इसके चलते निजी स्कूल संचालकों ने चेतावनी दी है कि जब तक पिछला भुगतान नहीं होगा, वे नए सत्र में दाखिले नहीं लेंगे। गहलोत ने सवाल उठाया कि क्या यह सरकार की जिम्मेदारी नहीं है कि वह समय पर भुगतान सुनिश्चित करे?

‘2 साल बनाम 5 साल’ के दावों की खुली पोल

भजनलाल सरकार के सुशासन के दावों पर कटाक्ष करते हुए गहलोत ने कहा कि जो सरकार बच्चों की फीस नहीं भर सकती, उसके विकास के दावे खोखले हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा:

“हमने RTE का दायरा कक्षा 9 से 12 तक बढ़ाकर ऐतिहासिक काम किया था, लेकिन वर्तमान सरकार पुराने बकाया को चुकाने में भी अक्षम साबित हो रही है। मुख्यमंत्री जी के ‘2 साल बनाम 5 साल’ के दावों की सच्चाई अब जनता के सामने है।”

बैजकॉल और अभिभावकों की चिंता

सिर्फ स्कूल संचालक ही नहीं, बल्कि ‘संयुक्त अभिभावक संघ’ ने भी सरकार को चेतावनी दी है। बताया जा रहा है कि पिछले साल के लगभग 44 हजार बच्चों का बैकलॉग अभी तक क्लियर नहीं हो पाया है। यदि सरकार ने जल्द समाधान नहीं निकाला, तो अभिभावकों ने सड़कों पर उतरने की चेतावनी दी है।

प्रवेश प्रक्रिया और विवाद के मुख्य बिंदु

  • महत्वपूर्ण तिथियां: शिक्षा विभाग ने 20 फरवरी से 4 मार्च तक आवेदन की तारीख तय की है, जिसकी लॉटरी 6 मार्च को निकलनी है।
  • हाईकोर्ट का हवाला: निजी स्कूलों का तर्क है कि हाईकोर्ट के आदेशों की सही व्याख्या नहीं हो रही है और पुनर्भरण की राशि (करीब 13 हजार रुपये प्रति छात्र) भी वर्षों से नहीं बढ़ाई गई है।
  • एंट्री लेवल पर पेंच: स्कूलों की मांग है कि प्रवेश केवल एंट्री लेवल कक्षा में ही हो, जबकि दिशा-निर्देशों में अधिक कक्षाओं का प्रावधान है।
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