राम जलसेतु लिंक परियोजना: चम्बल पर बन रहा 2.3 KM लम्बा एक्वाडक्ट, 17 जिलों की प्यास बुझाएगा 2,230 करोड़ का यह ‘जल सेतु’

जयपुर, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान जल आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ऐतिहासिक छलांग लगा रहा है। प्रदेश की महत्वाकांक्षी ‘राम जलसेतु लिंक परियोजना’ (संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चम्बल लिंक) के तहत चम्बल नदी पर 2.3 किलोमीटर लंबा विशाल एक्वाडक्ट (जल सेतु) आकार ले रहा है। 2,230 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा यह प्रोजेक्ट जून 2028 तक पूरा होने की उम्मीद है।

बीसलपुर और ईसरदा बांध तक पहुँचेगा पानी

इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य कालीसिंध नदी के अतिरिक्त पानी को उन क्षेत्रों तक पहुँचाना है जहाँ पानी की कमी है।

  • कनेक्टिविटी: यह एक्वाडक्ट कोटा के पीपलदा समेल गांव को बूंदी के गोहाटा गांव से जोड़ेगा।
  • कार्यप्रणाली: नवनेरा बैराज से पानी लिफ्ट कर मेज नदी में छोड़ा जाएगा, जहाँ से फीडर के जरिए इसे गलवा, बीसलपुर और ईसरदा बांध तक पहुँचाया जाएगा।
  • अतिरिक्त लाभ: यह एक्वाडक्ट न केवल पानी ले जाएगा, बल्कि आमजन के लिए आवागमन के एक नए मार्ग के रूप में भी काम करेगा।

निर्माण कार्य में आई तेजी: ‘मिशन मोड’ पर प्रोजेक्ट

मई 2025 में शुरू हुआ यह प्रोजेक्ट अब अपनी पूरी गति में है। वर्तमान प्रगति इस प्रकार है:

  • कैंप और बैचिंग प्लांट: 90 प्रतिशत कार्य पूर्ण।
  • पाइलिंग वर्क: कुल 5060 वर्किंग पाइल्स में से 860 पाइल्स का निर्माण पूरा हो चुका है।
  • मशीनरी: 12 रिग मशीनों की मदद से प्रतिदिन 15-20 पाइल का काम हो रहा है।
  • कंक्रीट: प्रतिदिन औसतन 500 क्यूबिक मीटर कंक्रीट का उपयोग किया जा रहा है।

“राम जलसेतु परियोजना राजस्थान के 17 जिलों की करीब 3.25 करोड़ आबादी के लिए जीवनदायिनी साबित होगी। यह मुख्यमंत्री की दूरदर्शिता और केंद्र-राज्य समन्वय का परिणाम है।”

90 हजार करोड़ की वृहद योजना का हिस्सा

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने ईआरसीपी (ERCP) को नया स्वरूप देते हुए इसे करीब 90 हजार करोड़ रुपये की वृहद ‘राम जलसेतु लिंक परियोजना’ में बदला है। जनवरी 2024 में मध्य प्रदेश के साथ हुए ऐतिहासिक एमओयू और दिसंबर 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में हुए एमओए (MoA) के बाद इस पर काम की रफ्तार तेज कर दी गई है।

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