मुख्यमंत्री की ‘गोपाल सखी’ योजना को बल: राजस्थान में पशुपालकों के लिए वृहद कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू

राजस्थान में ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पशुपालकों के सशक्तिकरण के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत हो गई है। राजस्थान कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन (RCDF) से संबद्ध 19,000 से अधिक दुग्ध उत्पादकों को अब केवल पशुपालक ही नहीं, बल्कि कुशल और आत्मनिर्भर “डेयरी फार्मर–एंटरप्रेन्योर” बनाया जाएगा। यह महत्वाकांक्षी प्रशिक्षण कार्यक्रम भारत सरकार के कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) द्वारा संचालित प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) के चौथे चरण (4.0) के तहत क्रियान्वित किया जाएगा, जिसकी स्वीकृति मिल गई है।

‘गोपाल सखी’ से ग्रामीण महिलाओं को मिलेगा सशक्तिकरण

RCDF की प्रबंध संचालक श्रुति भारद्वाज ने बताया कि यह कार्यक्रम माननीय मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की दूरदर्शी “गोपाल सखी” योजना के अनुरूप तैयार किया गया है। मुख्यमंत्री ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, और इसी भावना के साथ प्रशिक्षण के माध्यम से महिलाओं को ‘गोपाल सखी’ के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा। ये ‘गोपाल सखी’ आगे चलकर अन्य पशुपालकों को तकनीकी सलाह, मार्गदर्शन और व्यावसायिक सहयोग प्रदान करेंगी, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की भूमिका और सशक्त होगी।

आधुनिक कौशल और उद्यमिता पर जोर

इस प्रशिक्षण में पुरुष और महिला पशुपालकों को आधुनिक तकनीक, पशु आहार प्रबंधन, दुग्ध गुणवत्ता सुधार, उत्पादकता बढ़ाने के तरीके और उद्यमिता विकास का गहन प्रशिक्षण दिया जाएगा। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य यह है कि पशुपालक सिर्फ दुग्ध उत्पादन तक सीमित न रहें, बल्कि डेयरी क्षेत्र को एक संगठित, प्रतिस्पर्धी और लाभकारी व्यवसायिक इकाई के रूप में विकसित कर सकें।

‘सरस मिनी मार्ट्स’ के संचालन से बनेगा स्वरोजगार

प्रशिक्षण का एक अभिनव पहलू यह भी है कि इसमें प्रतिभागियों को सरस ब्रांड के तहत विकसित किए जा रहे “सरस मिनी मार्ट्स” के संचालन के लिए भी तैयार किया जाएगा। उन्हें सेल्स, मार्केटिंग, ग्राहक प्रबंधन और स्टॉक हैंडलिंग जैसे व्यावहारिक कौशल सिखाए जाएंगे, जिससे प्रशिक्षित महिलाएं स्थानीय स्तर पर स्वयं का रोजगार सृजित कर सकेंगी और रिटेल एंटरप्रेन्योर बन सकेंगी।

सर्कुलर इकोनॉमी और स्थायी डेयरी इकोसिस्टम

भारद्वाज ने इस पहल को डेयरी सेक्टर में सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने, महिला सशक्तिकरण, स्थानीय रोजगार सृजन और सरस उत्पादों की बाजार पहुंच बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। RCDF इस कार्यक्रम के माध्यम से प्रदेश में एक समग्र, संगठित और टिकाऊ डेयरी इकोसिस्टम विकसित करने की दिशा में कार्यरत है।

पशुपालन एवं गोपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने इस कार्यक्रम को ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई उड़ान देने वाला, स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने वाला और पशुपालकों की आर्थिक व सामाजिक आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने वाली एक दूरगामी पहल बताया। यह पहली बार है जब RCDF अपने पशुपालकों के लिए ऐसा व्यापक और उद्यमिता-आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर रहा है।

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