Expose Now Exclusive:जलदाय विभाग में ‘ठेका राज’, भ्रष्टाचार उजागर करने वाले इंजीनियरों को ‘सजा-ए-मंत्रालय’!

राजस्थान के जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) में इन दिनों नियमों की नहीं, बल्कि ‘ठेकेदारों की मर्जी’ की सरकार चल रही है। विभाग में भ्रष्टाचार का आलम यह है कि जो अधिकारी सरकारी खजाने को चूना लगाने वाले ठेकेदारों पर नकेल कसने की कोशिश करता है, उसे सिस्टम सुधारने के बजाय रास्ते से ही हटा दिया जाता है। ताज़ा मामला उदयपुर संभाग का है, जहां दो जांबाज अधिशाषी अभियंताओं (XEN) को महज इसलिए उनके पदों से हटा दिया गया क्योंकि वे ‘फर्जी बिलों’ और ‘घोटालों’ के आगे झुकने को तैयार नहीं थे।

ईमानदारी की ‘सजा’:

काम फील्ड में, हाजिरी मंत्री दफ्तर में विभाग ने एक अजीबोगरीब परिपाटी अपना ली है— ‘कार्य व्यवस्था’। उदयपुर और बांसवाड़ा में तैनात दो एक्सईएन को फील्ड से हटाकर जयपुर स्थित मंत्री कार्यालय में ‘कार्यव्यवस्थार्थ’ लगा दिया गया है। सूत्रों की मानें तो मंत्री कार्यालय में इनके पास करने को कोई काम नहीं है। ये अधिकारी सप्ताह में महज एक दिन अपनी उपस्थिति दर्ज कराने जयपुर आते हैं और बाकी समय सिस्टम की इस लाचारी पर मौन रहने को मजबूर हैं।

केस 1: श्याम लाल चौधरी (XEN, बांसवाड़ा)

आदेश दिनांक: 1 दिसंबर 2025
क्या था मामला: श्याम लाल चौधरी, अधिशाषी अभियंता (परियोजना खण्ड द्वितीय, बांसवाड़ा) के पद पर तैनात थे ।
क्यों हटाए गए:

चर्चा है कि चौधरी ने मैसर्स भूरत्नम कंपनी द्वारा किए जा रहे कार्यों में बड़े स्तर पर फर्जीवाड़े को उजागर कर रहे थे। उन्होंने कंपनी के फर्जी कार्यों के बिल पास करने से साफ मना कर दिया था।
परिणाम: कंपनी के रसूख के आगे विभाग नतमस्तक हो गया और संयुक्त शासन सचिव (प्रथम) प्रवीण कुमार लेखरा के हस्ताक्षर से उन्हें हटाकर मंत्री कार्यालय अटैच कर दिया गया ।

केस 2: धीरेन्द्र राजपुरोहित (XEN, उदयपुर)

आदेश दिनांक: 31 मार्च 2026
क्या था मामला: धीरेन्द्र राजपुरोहित, अधिशाषी अभियंता (परियोजना खण्ड प्रथम, उदयपुर) के पद पर कार्यरत थे ।
क्यों हटाए गए:

राजपुरोहित ने अपने क्षेत्र में 2-3 बड़ी कंपनियों द्वारा किए जा रहे संदिग्ध कार्यों पर सवाल उठाए थे। वे न केवल बिल रोकने की तैयारी में थे, बल्कि इन कार्यों की उच्च स्तरीय जांच करवाने वाले थे।
परिणाम: जांच शुरू होने से पहले ही ‘सिस्टम’ सक्रिय हुआ और 31 मार्च को जारी आदेश के जरिए उन्हें भी ‘कार्य व्यवस्था’ के नाम पर पीएचईडी मंत्री कार्यालय भेज दिया गया ।

बड़े सवाल: आखिर किसका है विभाग पर कब्जा?
इन दो आदेशों ने पीएचईडी के भीतर चल रहे ‘नेक्सस’ की पोल खोल दी है:

ठेकेदारों की जेब में सिस्टम?

क्या जलदाय विभाग की कमान शासन सचिवालय के बजाय ठेका कंपनियों के हाथों में है, जो अपनी मर्जी से अधिकारियों के तबादले करवा रही हैं?

जांच से डर किसका?

जब ये इंजीनियर फर्जीवाड़े की जांच कर रहे थे, तो उन्हें रोकने के लिए मंत्री कार्यालय का इस्तेमाल क्यों किया गया? राजस्थान की जनता के टैक्स का पैसा (जल जीवन मिशन व अन्य प्रोजेक्ट्स) क्या इसी तरह फर्जी बिलों के जरिए घोटालेबाज कंपनियों की भेंट चढ़ता रहेगा?

Expose Now की पड़ताल बताती है कि उदयपुर संभाग में ठेकेदारों और रसूखदारों का गठबंधन इतना मजबूत है कि वहां ईमानदारी से काम करना अब जोखिम भरा हो गया है। संभाग में कुछ ठेकेदारों को पीएचईडी मंत्री कार्यालय का पूरा आशीर्वाद मिला हुआ है, जिसके चलते उदयपुर संभाग में जलदाय विभाग के सारे इंजीनियर्स इन ठेकेदारों से डरते हैं। कुछ भ्रष्ट इंजीनियर्स इन ठेकेदारों की हाजिरी करते हैं तो कुछ इनके तलवे चाटते हैं। और जो इंजीनियर्स इन ठेकेदारों के फर्जी बिल पास नहीं करते तो ‘कार्य व्यवस्था’ के नाम पर आपको साइडलाइन कर दिया जाएगा।

अब देखना यह है कि करोड़ों के इन घोटालों और ठेका कंपनियों की ‘मेहरबानी’ पर सरकार क्या रुख अपनाती है या फिर भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ का नारा महज कागजी आदेशों तक ही सीमित रहेगा?

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